Monday, 24 September 2018

मायावती जी को प्रधानमंत्री बनना जरूरी क्यों

मायावती जी को प्रधानमंत्री बनना जरूरी  क्यों ….


मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना जरूरी क्यों है इसका सवाल जवाब लोगों को देना जरूरी है,  यह सवाल अक्सर लोग पूछा करते हैं कि मायावती जी प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसा क्या करेगी जो देश की जनता उन्हें प्रधानमंत्री बनाएं ।
सवाल का जवाब है कि मायावती जी ही देश की केवल एक मात्र ऐसे नेता है ,जो संपूर्ण मानव समाज का भला सोचती हैं क्योंकि मायावती जी खुद मानवतावादी अंबेडकरवादी है और अंबेडकरवादी कभी चींटी के साथ भी कभी नाइंसाफी नहीं कर सकता है फिर तो मानव की बात है और मायावती जी फुले,शाहू,अंबेडकर के आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली एकमात्र नेता हैं ।
आज आजादी के 72 साल होने के बाद भी देश का प्रधानमंत्री कोई दलित नहीं बन पाया है , यह पहला मौका है जब हम इस देश के दलित,शोषित,पीड़ित समाज की महिला को हम प्रधानमंत्री बनाएंगे । पिछले 72 सालों की राजनीति में बहुजन( SC, ST ,OBC and Minority) समाज के साथ अन्याय अत्याचार हुए उन्हें साज़िश के तहत  बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान में जो अधिकार दिए हैं उन अधिकारों का हनन होता रहा है उन्हें साज़िश के तहत शिक्षा से दूर किया गया ज़मीन से दूर किया गया रोज़गार से दूर किया गया, 72 साल से  मनुवादी लोग 85% बहुजन समाज पर 15 % वाले मनुवादी सोच वाले अमानवतावादी सोच वाले लोग हम पर शासन कर रहे हैं । तथा यह लोग हमारे वोटों की लूट कर रहे हैं , इन 72 सालों में कोई दलित शोषित समाज का प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है 2019 में मौका है कि हम बहन मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाये ।
आज देश में जब से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार बनी है तब से देश 20 साल पीछे हो गया है,देश में महँगाई बढ़ गई है देश में अन्याय अत्याचार हो रहे हैं बलात्कार हो रहे हैं sc.st.obc तथा मुस्लिमों के साथ आए दिन आयेे दिन घटनाएं  हो रही है शिक्षा का स्तर कम हो रहा है , सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 4 करोड़ से ज्यादा युवा बेरोजगार घूम रहे हैं ,यह सब भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में हुआ है और इस शासनकाल से बहुजन समाज के अलावा सवर्ण समाज भी परेशान हो गया है, आज देश केें किसान परेशान, मजदूर परेशान ,कर्मचारी परेशान, छोटे व्यापारी परेशान, सभी लोग बहुत ही ज्यादा परेशान और त्रस्त हो चुके हैं।






अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार अगले 5 सालों तक और रही तो यह जो डॉ बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखित जो संविधान हैं उस संविधान को खत्म करके हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा संविधान खत्म करने का ट्रेलर अभी आप 9 अगस्त को देख चुके हैं अगर 2019 के बाद ही फिर सत्ता में वापसी पूरा संविधान खत्म कर देंगे,  और यह देश एक बार फिर गुलाम बन जायेगा तथा यह देश धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र न होकर, लोकतांत्रिक राष्ट्र न होकर हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, और हिंदू राष्ट्र बनने का मतलब है इस देश में वर्ण व्यवस्था के आधार पर शासन व्यवस्था बनाए रखना । हिंदू राष्ट्र घोषित होने का मतलब है यह देश 5000 साल पीछे की ओर चले जाना, अगर देश हिंदू राष्ट्र घोषित हो गया तो ब्राह्मण ,बनिया ,ठाकुर की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी क्योंकि हिंदू राष्ट्र के अनुसार महिलाएं  अपवित्र हैं शूद्रों के समान हैं तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में महिलाओं को कोई भी अधिकार नहीं दिए हैं । अतः देश को बचाने के लिए भी देश की जनता को मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना पड़ेगा ।

  देश के लिए मायावती जी का प्रधानमंत्री बनना जरुरी क्यों:-

➡️देश की सुरक्षा के लिए…..
➡️रोजगार के लिए……..
➡️जातिवाद से मुक्ति के लिए….
➡️डॉ बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान देश में पूर्णता: लागू करने के लिए
➡️देश में बढ़ती महंगाई को कम करने के लिए
➡️महिलाओं तथा SC,ST,OBC तथा मुस्लिम     समाज के साथ हो रहे अन्याय अत्याचार को    जड़ से खत्म करने के लिए
➡️देश में समान शिक्षा लागू करने के लिए
➡️सामान स्वास्थ्य सेवाएं लागू कराने के लिए
➡️सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलाने के लिए
➡️बहुजन समाज को संख्या के आधार पर धन धरती दिलाने के लिए……
➡️देश में संख्या के आधार पर उसकी भागीदारी तय करने के लिए...
➡️लोकतंत्र बचाने के लिए …..
➡️संविधान को बचाने के लिए
अगर देश की भलाई सच में बिना कोई जातिवादी मानसिकता के तथा देश की एकता और अखंडता चाहता है तो बहन कुमारी मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना होगा क्योंकि अभी नहीं तो कभी नहीं पिछले 72 सालों में भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस ने इस देश पर शासन किया है अब वक्त आ गया है कि देश का कोई तीसरा दल देश का प्रधानमंत्री बने और इस देश के लिए जरूरी है ।


आप मायावती जी को  प्रधानमंत्री बनाने के बारे में  क्या विचार रखते हैं आप हमें कमेंट में  अवश्य बताएं तथा आप भी देश की भलाई के लिए बहन जी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं  तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ।

Thursday, 20 September 2018

छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से BSP की बड़ी खबर

छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से BSP की बड़ी खबर

Mayawati ji and Ajit Jogi
Mayawati ji and Ajit Jogi
आज 20 सितंबर को बहुजन समाज पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी करके छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश में 2018 में होने वाले चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया, छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी तथा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के साथ गठबंधन किया जिसने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया आपको बता दें कि अजीत जोगी आदिवासी समाज से आते हैं उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद IAS बने तथा मंत्री सांसद बने तथा 2001 में छत्तीसगढ़ के सबसे पहले मुख्यमंत्री बने कांग्रेस से मतभेद के बाद उन्होंने अपनी पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस की स्थापना की और अभी होने वाले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन किया ।
गठबंधन में बहुजन समाज पार्टी को 35 सीटें तथा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस को 55 सीटों पर गठबंधन हुआ तथा अजीत जोगी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बहन मायावती जी ने घोषित किया । मायावती जी ने कहा कि “ भारतीय जनता पार्टी पिछले 15 सालों से पावर में हैं तथा BJP ने 15 सालों में कुछ नहीं किया जो जी का सेक्शन के लोग हैं दलित पिछड़ा आदिवासी के लोग हैं अपर कास्ट के लोग हैं किसान मजदूर मेहनतकश लोग हैं उनके लिए केवल मीडिया में बरबरी घोषणाएं घोषित करते रहे लेकिन जमीनी हकीकत में कुछ काम नहीं हुआ है ”
वहीं मध्यप्रदेश में भी बहुजन समाज पार्टी ने 22 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है ऐसे में अब देखना होगा कि बहुजन समाज पार्टी इन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ राजस्थान 3 राज्यों के चुनाव में कैसा प्रदर्शन करती है यह पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर पता चलेगा ।
...............................………………………….........................

BSP big news from Chhattisgarh Madhya Pradesh



Today on 20th September Bahujan Samaj Party took a big decision on the elections in Chhattisgarh and Madhya Pradesh by releasing a press conference on September 20, with the Bahujan Samaj Party in Chhattisgarh and the Chhattisgarh Janata Congress, which together with Chhattisgarh Chief Minister Ajit Jogi, Chief Minister Announced the candidate for the post, tell you that Ajit Jogi comes from tribal society After IAS became an IAS and Minister became a Member of Parliament and after becoming the first Chief Minister of Chhattisgarh in 2001, after the differences with the Congress, he founded his party Chhattisgarh Janata Congress and formed a coalition of Bahujan Samaj Party in the upcoming elections.

In the coalition, the Bahujan Samaj Party got 35 seats and Chhattisgarh Janata Congress got 55 seats and Ajit Jogi was declared the Chief Ministerial candidate by sister Mayawati. Mayawati ji said that "Bharatiya Janata Party has been in power for the past 15 years and BJP has done nothing in 15 years, people of G section are people of Dalit backward tribal people. People of Upper cast are farmers laborers working for them. He continued to declare barbarity announcements only in the media, but in the ground reality there was no work "
At the same time, Bahujan Samaj Party has released the first list of 22 candidates in Madhya Pradesh, and now it is necessary to see how Bahujan Samaj Party demonstrates how the Madhya Pradesh Chhattisgarh performs in the elections of three states in Madhya Pradesh, depending on the performance of the party.

Wednesday, 19 September 2018

आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2

     आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2

Reservation in india
आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2
देश आजाद होने के बाद देश का नया संविधान लिखते समय भारत के संविधान निर्माताओं ने अपनी मानवतावादी और समानतावादी सोच के कारण लोगों को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता का अधिकार दिया और अनुच्छेद 19 के तहत स्वतंत्रता का अधिकार दिया लेकिन प्राचीन काल में हुए धार्मिक अन्याय के कारण दलित वर्ग पिछड़ा वर्ग, आदिवासी वर्ग ,तथा सभी वर्ग की महिलाएं हर दृष्टि से पिछड़े हुए थे । शोषित वर्ग संपन्न वर्ग की बराबरी नहीं कर पा रहे थे ।
इसीलिए संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण और संरक्षण की व्यवस्था की । जिस तरह माता-पिता अपने सबसे कमजोर बच्चे का ज्यादा ध्यान रखते हैं । ज्यादा अच्छा खाने को देते हैं । ताकि दूसरे मजबूत और हस्ट पुष्ट बच्चे की तरह कमजोर बच्चा हष्ट पुष्ट हो  जाये । इसी सोच के तहत बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों में उनकी संख्या के अनुपात में आरक्षण प्रदान किया ।
संविधान सभा में कई सदस्यों ने अन्य पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण की मांग की  थी । और बाबा साहब भी चाहते थे कि पिछड़ा वर्ग को भी आरक्षण की सुविIधा प्रदान की जाय लेकिन घोर विरोध के कारण बाबा साहब इस मांग को तुरंत पूरा नहीं कर सके । लेकिन संविधान में अनुच्छेद 340 बनाकर पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने की व्यवस्था की ताकि आयोग सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं और जिन कठनाइयों को वे झेल रहे है उनका पता लगाकर ,पिछड़े वर्ग की दशा को सुधारने के लिये सरकार से सिफारिश कर सके ।
बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के अनुच्छेद 330 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए लोकसभा में उनकी संख्या के अनुपात में स्थान आरक्षित किये तथा अनुच्छेद 332 में राज्य विधान सभाओ में इनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थान सुरक्षित किये राजनैतिक आरक्षण की समय सीमा 10 वर्ष रखी गई थी । यह राजनीतिक आरक्षण 10 वर्ष में अनुच्छेद 334 में संशोधन करके बढ़ा दिया जाता है ।
प्राचीन काल कि भेदभाव तथा अन्याय पूर्ण धार्मिक व्यवस्था के कारण पिछड़ा वर्ग हर क्षेत्र में इतना पिछड़ गया था कि स्वतंत्रता  के बाद तथा संविधान में समानता का अधिकार मिलने के बाद भी पिछड़ा वर्ग सामान्य वर्ग की तुलना में बहुत अधिक पिछड़ा हुआ था । इसी  पिछलेपन को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 340 के अनुसार एक आयोग का गठन किया गया जिसे मंडल आयोग कहा जाता था । इस आयोग की सिफारिशों को 1989 में बनी जनता दल की सरकार ने लागू किया और और अन्य पिछड़े वर्ग में आने वाली जातियों को सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सुविधा प्रदान की यही से अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिलने की शुरुआत हुई मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़े वर्गों को 14% आरक्षण दिया गया है और कई  राज्यों में प्रदान आरक्षण 27 प्रतिशत से कम है ।1993 से पहले ग्राम पंचायतों में अक्सर बड़े किसान ही सरपंच बना करते थे । यही हाल शहरी निकायों में था । क्योंकि पंचायतों व शहरी निकायों में पिछड़े हुये नागरिकों के किसी वर्ग को आरक्षण प्राप्त नहीं था । लेकिन 1993 में संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन करके अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग को विभिन्न पदों में आरक्षण प्रदान किया गया तथा सामान्य वर्ग सहित सभी वर्ग की महिलाओं को प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थान आरक्षित किये गये ।
संविधान के अनुच्छेद 243 में तीन स्तरों की पंचायतों के सदस्यों प्रधानों तथा अध्यक्षों के कम से कम एक तिहाई स्थान सामान्य वर्ग की महिलाओं सहित सभी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए ।  ये पद पंचायतों में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आवंटित किए गए इसी तरह चक्रानुक्रम से प्रत्येक नगर पालिका में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या के  कम से कम एक तिहाई स्थान सामान्य वर्ग की महिलाओं सहित सभी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए इस तरह स्थानीय निकायों में आरक्षण की शुरुआत हुई ।
लेकिन अभी तक 72 साल की आज़ादी के बाद भी कमजोर वर्ग इतना मजबूत और संपन्न नहीं हुआ है कि संपन्न वर्ग की हर स्तर पर बराबरी कर सकें ।
इसका एक कारण यह भी है, कि केंद्र और विभिन्न राज्यों में शासन करने वाली अधिकतर पार्टियां कमजोर वर्ग को संपन्न करना नहीं चाहती यही एक  कारण हैं कि आरक्षित पद अक्सर खाली रह जाते हैं । जबकि आरक्षण वर्ग के लाखों नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं यदि सरकारों की नियत सही होती तो सरकार ऐसे उपाय करती जिससे आरक्षित कोटे का कोई पद खाली नहीं रह पाता ।
लेकिन सरकार ने ऐसे प्रयास नहीं किए जिससे आरक्षित वर्ग का सामाजिक शैक्षणिक एवं आर्थिक पिछड़ापन खत्म हो सके । यही एक कारण है कि आरक्षित वर्ग जिसकी जनसंख्या करीब 65% है लेकिन सरकारी नौकरियों में आरक्षित वर्ग की भागीदारी 13% हो पाई है इसलिए मेरे हिसाब से जब तक कमजोर वर्ग सामान्य वर्ग की तरह हर स्तर पर बराबरी न कर ले तब तक आरक्षण और संरक्षण लागू रहना चाहिए ।
मेरा तो यह भी मानना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार 50% तक आरक्षण की सीमा को हटाने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन करके सामान्य वर्ग के गरीबी के नीचे रहने वाले व्यक्तियों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए तथा संसद और विधानसभाओं में स्थानों के लिए महिला आरक्षण बिल जो संसद में लंबित है जल्दी पास होना चाहिए तथा पदोन्नति में आरक्षण बिल जो संसद में लंबित है उसे भी जल्दी पास करना चाहिए तथा ऐसा कानून .बने जिससे आरक्षण का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को दंडित किया जा सके ।
अमेरिका में भी काले रंग के प्रजाति के अमेरिकी नागरिकों को समानता और बराबरी पर लाने के लिए आरक्षण दिया गया है ।
आरक्षण प्राचीन समय से धार्मिक ग्रंथों द्वारा मिली सामाजिक और धार्मिक असमानता की बीमारी को समाप्त करने का संवैधानिक उपचार हैं । यह आरक्षण रूपी दवा कड़वी जरूर है लेकिन यही एक रास्ता है जिस से देश में से सामाजिक असमानता की बीमारी को समाप्त किया जा सकता है । इसलिए इस देश के सामान्य नागरिकों को दवाई के गुणों को और अच्छाइयों को देखना चाहिए ना कि दवाई के कड़वेपन को। ब्राह्मण सहित सभी वर्ग की  महिलाये ने पिछड़ा वर्ग आदिवासी और दलितों ने हजारों बरसों से गुलामी अपमान और अभाव का जहर पिया है इसलिए सामान्य वर्ग को आरक्षण रूपी लेकिन समाज के लिए लाभदायक इस कड़वी दवा को जरूर स्वीकार करना चाहिए ।
   जय भीम , जय भारत
लेखक :- भोलाराम अहिरवार

Sunday, 16 September 2018

बिना नाम लिए चंद्रशेखर रावण पर बहन जी का बयान

बिना नाम लिए चंद्रशेखर रावण पर बहन जी का बयान

सभी साथियों को जय भीम आज बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें बहन जी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण पर बयान दिया यह बयान मैं शेयर कर रहा हूं तथा आप अपनी राय दें...
Chandrashekhar
Mayawati ji and Chandrashekhar Ravan

कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ में तो ,कुछ लोग अपने बचाव तथा कुछ नौजवान दिखाने के लिए भी दिखाने के लिए भी जबरदस्ती का मेरे साथ कभी भाई बहन का तो कभी बुआ भतीजे का रिस्ता जोड़ देते है ,
उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में कराया गया खूनी कांड , में दलित उत्पीड़न कांड, इसमें शामिल केरल के साथ अभी-अभी व्यक्ति समाज में इन सब कमियों पर पर्दा डालने के लिए अब वह भी अपना जबरदस्ती का मेरे साथ बुआ और भतीजा का रिश्ता बता रहा है, इस किस्म के सभी लोगों को यह बताना चाहती हूं ,कि मेरा वास्तव में सही मायने में किसम के लोगों से, कभी भी पूरे तहे दिल व सम्मान के साथ रिश्ता नहीं हो सकता, बल्कि पूरे देश में पूरे सम्मान के साथ मेरा रिश्ता देश के केवल दलित, आदिवासियों के अन्य कमजोर वर्गों के लोगों से जिनके लिए मैंने अपनी पूरी जिंदगी समर्पित की मुझे अपना आदर्श मानकर चलता हमेशा में सुख दुख की घड़ी में मेरे साथ खड़े रहे हैं ,इसके साथ-साथ यह सावधानी के तौर पर खासकर दलितों आदिवासियों के अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों यह भी कहना चाहूंगी कि जिन लोगो ने वर्षो से आये दिन ऐसे बहुत से हजारों संगठन  चला आ रहे हैं, इसकी आड़ में वह किसी वे किसी न किसी अपनी रोजी रोटी का धन्धा चलते रहते है , और अपने समाज के लोगों के सामने और जो लोग अपने समाज के लोगों के सामने कहते कहते कुछ है और करते कुछ और है ,इसलिए सभी स्वार्थी किस्म के संगठनों में तत्वों के लिए इन वर्गों के लोगों को जरूर सावधान होना चाहिए ।  और इतना ही नहीं इस किस्म के वास्तव में व पूरी ईमानदारी से हमारे हितेशी व शुभचिंतक होते तब फिर लोगों को अपना कोई अलग संगठन बनाने की जरूरत न होती बल्कि फिर यह लोग पूरे देश में अपनी मातृ हितेषी बा कल्याणकारी पार्टी अर्थात BSP के झंडे के नीचे जुड़कर ही परम पूज्य डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर तथा मान्यवर कांशीराम साहब के मूवमेंट को  आगे बढ़ाते ।

In english






Some people, in their political interest, also show somebody to show their defense and show some young men, forcibly join me with the brother's sister and also the buoyant nephew,



In the bloody murder case of Shabbirpur village in the district of Saharanpur in Uttar Pradesh, the Dalit Harassment scandal, included in it, included in it, now in person to cover all these shortcomings in the society, now she also forcibly bunga and nephew Relationship is telling, I want to tell all the people of this kind, that in reality I really do not have relationships with the people of Kisam, and with complete heart and respect. It can be, but my relation with whole respect throughout the country is only with the people of the dalit, other weaker sections of the tribals, whom I dedicate my whole life to myself as my ideal and always stand in front of me in times of sadness Along with this, as a precaution, especially among the people of other backward classes of the dalit tribal people, I would like to say that those who have come from years of age Thousands of organizations are coming out from under it, under the guise of it, they are going to walk some other way to their livelihood, and in front of people of their own society and those who say in front of the people of their society and do something There is something else, so for all elements of selfish kind of organizations, people of these sections must be careful. Not only this, but in reality and sincerely, we would have no need to create a separate organization, but then these people would have to go all over the country under the flag of our Maternal Welfare Party, ie BSP. By joining the movement of the supreme worshiper Dr. Babasaheb Bhimrao Ambedkar and the legendary Kanshi Ram Sahab.
Related Article:- चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन

Friday, 14 September 2018

चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन

     चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन

चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन
चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन 

जय भीम कल  भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को  रात 2:30 बजे रहा कर दिया गया रिहा होने के बाद चंद्रशेखर आजाद रावण में मुख्य बातें की यह 10 मुख्य बातें आपसे शेयर कर रहा हूं , उम्मीद है आप पढ़ेंगे और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करेंगे .
1.चंद्रशेखर आजाद रावण ने महागठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया ।
2.  उन्होंने कहा कि अपने लोगों से कहूंगा कि बीजेपी को 2019 में सत्ता से उखाड़ फेंके ।
3. भाजपा दलित विरोधी है एक हाथ से प्रेम करती है दूसरे हाथ से बाहर करती है ।
4. भाजपा को सबक सिखाने का काम SC ST OBC और मुस्लिम समुदाय करेगा क्योंकि अभी ये सभी प्रताड़ित हैं ।
5. उन्होंने कहा कि, भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को एक भी वोट मत देना ।
6. भाजपा को वोट देने का मतलब है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के गले पर चाकू रख देना ।
7. सामाजिक आंदोलन को बढ़ाकर जागरूकता पैदा करेंगे ताकि असली नकली का फर्क पहचान सके ।
8. चंद्रशेखर आजाद रावण चुनाव नहीं लड़ेगा ।
9. जेल में इलाज नहीं दिया गया, मुलाकाते बंद कर दी, सताया गया और सूखी रोटियां दी गई ।
10. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रसूल काम में फंसा सकती है , तथा उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित था ,जिसकी सुनवाई होने ही वाली थी और वहां से रिलीफ मिल जाती क्योंकि मामले में दम नहीं था और ऐसे में सरकार की किरकिरी हो जाती ऐसे में सरकार Backfoot पर आ जाती इसलिए उन्होंने पहले ही रिहा कर दिया ।
In English
Key points after the release of Chandrasekhar Ravan

Jai Bhim, the founder of Bhim Army, Chandrasekhar Ravana has been kept at 2:30 pm after being released, Chandrasekhar Azad has shared this 10 main points of interest in Ravan, hopefully you will read and share it as much as possible. will do .

1. Chandrashekhar Azad Ravan announced to give support to the Maha coalition

2. He said that I would like my people to overthrow BJP in 2019.

3. The BJP is anti-Dalit, loves one hand and does it out of the other hand.

4. The task of teaching the BJP a lesson will be done by SC-ST OBC and Muslim community as they are all oppressed now.

5. He said, do not vote for a communal party like BJP, do not vote for one vote.

6. Voting for the BJP means that keeping a knife on your throats of next generation.

7. Increase the social movement and create awareness so that the real counterfeit can recognize the difference.

8. Chandrasekhar Azad Ravan will not contest elections.

9. Not treated in jail, stopped meeting, persecuted and dry roti.

10. He said that the Rasool can be implicated in the work by the government, and he said that the case was pending in the Supreme Court, which was supposed to be heard and relief from there because the case was not in vain and in such a case the government is weak In such a way the government would come back to Backfoot, so he already released.


Source By:- Dalit News Network

  1. Also Read this:- आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

Wednesday, 12 September 2018

आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

Reservation Policy
आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

  आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

आरक्षण एक ऐसा विषय है जिस विषय पर सबसे ज्यादा चर्चा और राजनीति होती है । आरक्षण लगभग हर चुनाव में  किसी ना किसी रूप में चुनावी मुद्दा रहता है आरक्षण के
मुद्दे पर राजनैतिक दल चुनाव हारते और जीतते रहते हैं। आरक्षण का मूल उद्देश्य विभिन्न वर्गों के बीच में व्याप्त असमानता को दूर कर समानतावादी समाज की स्थापना करना है। हमारे भारत देश में प्राचीन काल (पुराने समय) से ही भेदभाव पूर्ण और अन्याय पूर्ण वर्ण व्यवस्था बना दी गई थी। समाज को अवैज्ञानिक (बेतुका) तौर पर चार भागों या वर्णों में बांट दिया गया था। यह वर्ण थे (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य,और शुद्र) वेदों में और धार्मिक पुस्तकों में शूद्रों को केवल एक ही अधिकार दिया गया था। वह अधिकार है तीन वर्णों की बगैर स्वार्थ के सेवा करना। धार्मिक पुस्तकों में शूद्र वर्ण को नीच वर्ण कहकर कई जगह उसका घोर अपमान किया गया है। जैसे कि तुलसीदास ने रामचरित-मानस के पेज क्रमांक 986 में चौपाई नंबर 3 में लिखा है।
जे वरनाधम तेली कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।।
नारि  मुई गृह सम्पति नासी । मूड़ मुड़ाइ होहिं सन्यासी।।
ते विप्रन्ह सन आपु पूजवाहि। अभय लोक निज हाथ नासवहिं ।।”
अर्थात:-  तेली ,कुम्हार चांडाल, भील ,कोल,और कलवार आदि जो वर्ण में नीचे है, स्त्री के मरने पर अथवा घर की संपत्ति नष्ट हो जाने पर सिर मुंडवाकर संयासी हो जाते हैं। वे अपने को ब्राह्मणों से पुजवाते है। और अपने ही हाथों दोनों लोक नष्ट करते हैं।

पुराने समय में वेदों और धार्मिक पुस्तकों को संविधान का दर्जा प्राप्त था । इन्हीं धार्मिक पुस्तकों में लिखे अनुसार राजा राज्य करते थे आरक्षण की शुरुआत इसी काल  से मानी जाती है ।
मनुस्मृति के अनुसार पुरोहित के पद, राजा के प्रमुख सलाहकार, दंडाधीश के पद, तथा मंत्रियों के पद, ब्राह्मणों के लिए आरक्षित थे सभी महत्वपूर्ण पद ब्राह्मणों के लिए सुरक्षित थे सारे मंत्री ब्राह्मण ही होते थे। गैर ब्राह्मण जातियां बड़े पदों पर नहीं पहुंच सके इसलिए शिक्षा पर एकाधिकार जमाये रखने के लिए विधान बनाया गया । हिंदू समाज के निम्न वर्गों के लोगों तथा ब्राह्मण सहित सभी वर्गों की  महिलाओं के लिए पढ़ाई लिखाई अपराध घोषित कर दिया जिसका उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान था ।
मनुस्मृति के भाग 2 के श्लोके नंबर 67 में लिखा है:-
श्लोक:-
वैवाहिको स्त्रींणा: संस्कारो वैदित स्मृत।
पति सेवा गुरौ वासो गृहार्थी अग्नि परिक्रिया।।

अर्थात:- जैसे शूद्रों के लिए गुरु की दीक्षा (जनेऊ संस्कार) करना मना है । उसी प्रकार स्त्रियों के लिए भी पढ़ना-पढ़ाना गुरु दीक्षा लेना मना है ।

प्राचीन काल में ऐसी भेदभाव पूर्ण शासन  व्यवस्था तथा शिक्षा के अभाव के कारण महिलाएं (सभी वर्णों की) आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और दलित इन सभी की हालत इतनी दयनीय और सोचनीय हो गई थी कि इसकी मिसाल संसार में कहीं दूसरी जगह नहीं मिल सकती थी । दलित वर्ग के लिए जिंदा रहना भी मुश्किल हो गया था । दलित वर्ग के लोग न तो अच्छे काम कर पाते थे और न दलित वर्ग मंदिरों में पूजा कर सकते थे, और न तो तालाबों में पानी पी सकते थे और न तो कई सार्वजनिक सड़कों पर पैर रख सकते थे । जबकि कुत्ता बिल्ली और अन्य जानवर के साथ ऐसा सलूक नहीं किया जाता था ।
हजारों वर्ष तक महिलायें (सभी वर्ग की) आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग, इस धार्मिक अन्याय की चक्की में पिसते रहे। देश में कई राजे-महाराजे और शासक हुए लेकिन किसी ने इस धार्मिक अन्याय को दूर करने के लिए कुछ भी प्रयास नहीं किया। क्योंकि सभी राजे महाराजे वेदों,पुराणों और धार्मिक साहित्य का बहुत आदर करते थे । इसीलिए वेदों पुराणों के खिलाफ कुछ भी कदम उठाने की साहस नहीं जुटा पाते थे, और राजाओं को यह भी बताया जाता था, कि वेद ब्रह्मा के मुख से निकले है,इसीलिए  वेदों और पुराणों की लिखी बातों को न मानने का मतलब है। ईश्वर के दिए गए आदेश को न मानना । इसीलिए इस धार्मिक और सामाजिक अन्याय को दूर करने का साहस कोई राजा या शासक नहीं कर सका ।
छत्रपति शाहू जी महाराज
छत्रपति शाहू जी महाराज
लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत में कोल्हापुर रियासत के राजा शाहूजी महाराज ने वेदों और पुराणों के खिलाफ जाने का साहस किया तथा कोल्हापुर रियायत के प्रशासन को बगैर भेदभाव के संपूर्ण प्रजा के कल्याण के लिए समर्पित किया ।
छत्रपति शाहूजी महाराज ने 26 जुलाई 1902 में एक आदेश दिया,जिसके तहत पिछड़े वर्ग तथा निर्बल वर्ग को रियासत के सरकारी दफ्तरों में नौकरियों में 50%  आरक्षण देने का प्रावधान किया था । इस तरह भारत के निर्वल वर्ग को आरक्षण मिलने की शुरुआत हुई ।
शाहू जी महाराज चाहते थे  कि बहु
जन वर्ग के लिए शिक्षा मिले इसीलिए प्रत्येक देहात में स्कूल भी खुलवाई । शाहूजी महाराज ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपनी अधूरी शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक मदद देकर इंग्लैंड भेजा ताकि बाबा साहब ज्ञान अर्जित कर के देश में पिछड़े वर्ग तथा निर्बल वर्ग को सामाजिक तथा आर्थिक समानता दिला कर देश का भला कर सके ।
छत्रपति साहू जी महाराज द्वारा दिया गया आरक्षण कोल्हापुर रियायत तक ही सीमित था ।
लेकिन बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर पूरे देश में सामाजिक और आर्थिक अन्याय समाप्त कर समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहते थे ।
Puna Pact
डॉ. अम्बेडकर तथा गांधी जी


देश में अंग्रेजों के राज को करीब 150 वर्ष  बीत चुके थे भारतीय लंबे समय से स्वराज की मांग कर रहे मैं थे जिसे पूरा करने के लिए अँग्रेज़ सरकार ने सन 1930-1931 में लंदन में गोलमेज सम्मेलन बुलाया । बाबा साहेब ने गोलमेज सम्मेलन में दलितों की तरफ से भाग लिया
गोलमेज सम्मलेन में बाबा साहब  ने अपने भाषण में कहा था:- “भारत में अंग्रेजी नौकरशाही सरकार के स्थान पर लोगों द्वारा ,लोगों के लिए, लोगों की सरकार कायम की जाये “
बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने अँग्रेज़ सरकार से भारतीय के लिए  स्वराज देने की मांग रखी तथा दलितों के लिए विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्र देने की मांग रखी ।
बाबा साहब का मानना था कि भारत में लोग योग्यता और शिक्षा से ज्यादा जाति देखते हैं इसलिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में दलित वर्ग के उम्मीदवारों को सवर्ण और जातिवादी व्यक्ति वोट नहीं देंगे इसलिए दलित वर्ग के प्रतिनिधि विधानमंडलों में चुनकर नहीं जा पाएंगे जबकि दलित और पिछड़े वर्ग के लोग ब्राह्मण और सवर्णों को वोट देना पुण्य का काम समझेंगे इसलिए ब्राह्मण और सवर्ण जीत जाएंगे और सत्ता में आने पर स्वर्ण और दलितों पिछड़े वर्ग पर और भी ज्यादा अन्याय और अत्याचार करेंगे इसीलिए बाबा साहब ने चुनाव में दलितों के लिए ऐसे अलग चुनाव क्षेत्र की मांग रखी जिन क्षेत्रों में केवल दलित वर्ग के व्यक्ति ही चुनाव लड़ सके और केवल दलित वर्ग के व्यक्ति ही वोट डाल सकें।
बाबा साहेब अंग्रेज सरकार से ऐसा प्रावधान करने की मांग की जिससे किसी आदमी के सामने देश की सरकारी नौकरी में प्रवेश होने के संबंध में कोई बाधा न रहे । गोलमेज सम्मेलन में भाषण देते हुए बाबा साहब ने कहा था । महोदय, मेरा मत है की किसी भी एक  वर्ग को किसी देश की सारी सरकारी नौकरियों पर एकाधिकार कर लेने देना एक बड़े भारी सार्वजनिक खतरे को मोल लेने देना  है । मैं इसे सार्वजनिक खतरा कहता हूं, क्योंकि इससे जो जातियां फायदे में रहती हैं, उनके अंदर अहंकार का भाव पैदा हो जाता है। बाबा साहब ने यह भी कहा था । कि हम भारत के लिए एक नया विधान बनाने जा रहे हैं। हमें उस का आरंभ ऐसी पद्धति से करना चाहिए जिसमें महामहिम की प्रजा के हर आदमी को इस बात का अवसर हो कि वह सरकारी नौकरियों में अपनी अपनी योग्यता का परिचय दे सकें ।

सवर्णों का सरकारी नौकरियों में एकाधिकार है  जिसके चलते अन्य वर्गों की भारी उपेक्षा हो रही है। सवर्ण लोगों ने न्याय और समानता को दरकिनार कर अपने वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए अपने अधिकारों का दुरूपयोग किया है । सरकारी नौकरियों में सवर्णों को एकाधिकार को समाप्त करने के लिए इस प्रकार के नियम बनाया जाए जिससे की नौकरियों में भर्ती सभी संप्रदायों को उसका उचित भाग मिल सकें ।
प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस और गांधी ने भाग नहीं लिया लेकिन दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गांधी ने भाग लिया और अपनी गलत और अमानवीय सोच का परिचय देते हुए दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र और राजनीतिक अधिकार देने का डटकर विरोध किया । गांधी जी का कहना था कि दलित वर्ग हिंदू धर्म का ही एक हिस्सा है, इसलिए दलित वर्ग को हिंदू वर्ग से अलग नहीं किया जा सकता गांधी जी का कहना था कि मैं प्राणों की बाजी लगाकर इस तरह के राजनीतिक बंटवारे का मैं विरोध करूंगा।

गांधीजी के कड़े विरोध के बावजूद ब्रिट्रेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के तर्क पक्ष और मांग को सही मानते हुए 16 अगस्त सन 1932 को दलित वर्ग को राजनीतिक अधिकार देते हुए उन्हें विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्ताव मंजूर  किया । दलित वर्ग को राजनीतिक अधिकार मिलना गांधीजी को सहन नहीं हुआ । दलित वर्ग के लिए विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्र मिलने के विरोध में गांधी जी ने पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरु कर दिया । गांधी की मांग थी दलित वर्ग को जो राजनीतिक अधिकार स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र मिले हैं । उन्हें समाप्त कर दिया जाए । यरवदा जेल में गांधीजी के अनशन के कारण पूरे देश में कांग्रेसियों ने अंबेडकर का विरोध करना शुरू कर दिया । दलितों के साथ मारपीट तथा हत्याएं आगजनी करना शुरु कर दिए । दलितों के घर आग के हवाले कर दिए गये । यह सब कांग्रेसी इसलिए कर रहे थे कि बाबा साहब अंबेडकर दलितों को मिले राजनीतिक अधिकारों को छोड़ देवें ।

कांग्रेसी बाबा साहब से गाँधी से बात करने का अनुरोध भी कर रहे थे । अंत में देश में शांति और दलितों की जान माल की रक्षा के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने पुणे की यरवदा जेल में जाकर गांधी से मुलाकात की । लंबी बातचीत के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने विधानमंडलों में मिले अलग निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्ताव को छोड़ दिया । और बदले में दलित वर्ग के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र के मुआवजे के रुप में गांधी की मंशा के अनुसार राजनीतिक आरक्षण स्वीकार कर लिया । समझौते के तहत  विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्रों की जगह सुरक्षित क्षेत्र प्रदान किए गये । यानि जो  क्षेत्र दलित वर्ग के लिए सुरक्षित रखे गए उनमें केवल दलित वर्ग के प्रत्याशी ही खड़े हो सकेंगे लेकिन सभी वर्ग के मतदाता वोट डाल सकेगें  ।

24 सितंबर सन 1932 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और गांधी के बीच एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता या पूना पैक्ट के नाम से जाना जाता है । इस समझौते पर दलित वर्ग की तरफ से डॉक्टर अंबेडकर तथा सवर्ण हिंदुओं की तरफ से मदन मोहन मालवीय ने हस्ताक्षर किये । इसके बाद राजनीति में आरक्षण की शुरुआत हुई और गांधी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया । बाबा साहब का मानना था कि गांधी और कांग्रेस ने पूना  पैक्ट रुपी फल से प्राप्त रस को चूस लिया और छिलका दलितों के मुंह पर दे मारा ।
Related Article:- Read what is Poona Pact 1932 in English

Sunday, 9 September 2018

डॉ. अम्बेडकर और माता रमाबाई की कहानी ,जो आपको रुला के रख देगी

Dr.ambedkar and ramabai
Dr.B.R. Ambedakar and Ramabai Ambedkar

डॉ. अम्बेडकर और माता रमाबाई की कहानी ,जो आपको रुला के रख देगी

कृपया पूरी पोस्ट पढ़े।
जब बड़ौदा के महाराज ने बाबा साहब को वजीफा दिया और बाबा साहब विदेश जा कर पढ़ना चाहते थे तब उनकी पत्नी रमाबाई और 5 बच्चे थे। तो देखिए किस प्रकार से बाबा साहब अपनी बात रमाबाई के सामने रखते हैं।

बाबा साहब - रमा बड़ौदा के महाराज ने मुझे वजीफा दिया है और मैं विदेश जा कर पढ़ना चाहता हूं लेकिन जब मैं तेरी तरफ मुड़कर देखता हूं तेरे पास 5 बच्चे हैं आमदनी का कोई साधन नहीं है और मैं भी तुझे कोई पैसा देकर नहीं जा रहा हूं क्या ऐसी परिस्थिति में तू मुझे विदेश जाकर पढ़ने की अनुमति देगी।

रमाबाई - बाबा साहब यह बात सच है कि मेरे पास 5 बच्चे हैं और आमदनी का भी कोई साधन नहीं है और आप भी मुझे कोई पैसा देकर नहीं जा रहे हो लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाती हूं आप अपनी इच्छा को पूरी करके आना आप अपनी पढ़ाई को पूरी करके आना इन 5 बच्चों का पेट मैं खुद पाल लूंगी, और जब माता रमाबाई बाबा साहब को भरोसा दिलाती हैं तो बाबासाहब विदेश चले जाते हैं और अपनी पढ़ाई करते हैं और इधर माता रमाबाई अपने 5 बच्चों के पेट को पालने के लिए क्या करती है ।

माता रमाबाई मुंबई की गलियों से गोबर उठा कर लाती उसके बाद उपले बनाकर मुंबई की गलियों में उपले बेच कर आया करती और उससे जो पैसा आ जाता अपने बच्चों का पेट पालती है ।
इतना पैसा नहीं आता था कि वह अपने बच्चों की परवरिश कर पाती देखते ही देखते उनका बड़ा बेटा दामोदर बीमार हो गया। इलाज के पैसे नहीं थे इलाज के अभाव के कारण दामोदर इस दुनिया को छोड़ कर चला गया। यह बात माता रमाबाई ने बाबा साहब को नहीं बताई।

         (बाबा साहब द्वारा भेजा गया पत्र)

नानकचंद रत्तू खत पढ़ते हुए- बाबा साहब कहते हैं । कि रमा मैं यहां अगर एक वक्त का खाना खाता हूं तब भी मेरा काम नहीं चल पा रहा है मैं अपना जीवन बड़ी मुश्किल में व्यतीत कर रहा हूं में अपना सुबह का नाश्ता दोपहर में करता हूं और शाम को मैं पानी पीकर अपना काम चला रहा हूं और मैं जानता हूं कि तेरे सामने भी बहुत विफल परिस्थितियां हैं तेरे पास पांच बच्चे हैं  और आमदनी का भी कोई साधन नहीं है फिर भी अगर हो सके तो कुछ पैसा भिजवा देना

इधर माता रमाबाई ने बड़ी मुश्किल से कुछ पैसा इकट्ठा किये थे। लेकिन उनकी बेटी इंदु बीमार हो जाती है अब माता रमाबाई के सामने एक बहुत बड़ा सवाल था कि वे उस पैसे से अपनी बेटी का इलाज कराएं या अपने पति को दिए गए वचन को निभाएं लेकिन एक मां ने फैसला किया और वह पैसा बाबा साहब को भेज दिया और इधर उनकी बेटी इंदू ने भी दम तोड़ दिया और यह बात भी माता रमाबाई ने बाबा साहब को नहीं बताई और बाबा साहब पढ़ते रहे और कुछ समय के बाद बाबा साहब अपनी पढ़ाई छोड़कर बड़ौदा के महाराज की रियासत में नौकरी करने के लिए आते हैं तो रमाबाई खुश होती है और क्या कहती है।

रमाबाई - अब तो मेरा पति डॉक्टर बन के आ रहा है अब मेरा पति नौकरी करेगा तनखा कमा कर लाएगा अब तो अपने बच्चों को मैं भरपेट खाना खिलाऊंगी अब तो मेरी जिंदगी के दिन बदल जाएंगे।

बाबा साहब जब दफ्तर में प्रवेश करते हैं।

चपरासी - टाट को खींच लेता है और पानी के घड़े को उठाकर अलग रख देता है ।

बाबा साहब - अरे चपरासी  जरा मुझे फाइल तो लाकर देना
चपरासी - फाइल को भी डंडे से उठा कर देता है।
बाबा साहब क्या बदतमीजी है यह क्या हो रहा है तू एक चपरासी होकर मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है।

चपरासी - अंबेडकर तुम पढ़-लिख जरूर गए हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुम हमारी बराबरी पर आ गए हो तुम आज भी नीच हो और तुम्हारे साथ में काम करके अपना धर्म नष्ट नहीं कर सकता

बाबा साहब - क्या मतलब मेरे साथ तेरा धर्म कैसे नष्ट हो सकता है और तू जानता है कि मैं तुझे नौकरी से निकाल सकता हूं ।

चपरासी - अंबेडकर यह बात में अच्छे से जानता हूं और तुम मुझे नौकरी से भले ही निकाल दो लेकिन मैं तुम्हारे साथ रहकर इस दफ्तर में काम नहीं कर सकता।

बाबा साहब मैं ऐसे अपमानजनक स्थान पर और अधिक नौकरी नहीं कर सकता।

संचालक - बाबा साहब ने 11वें ही दिन अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपने घर के लिए निकलते हैं और बड़ौदा के रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं वहां उनकी ट्रेन 4 घंटे लेट होती है तो बाबा साहब एक पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं और क्या कहते हैं।

बाबा साहब - मैं पहले यह सोचता था कि हमारे लोग मरे पशुओं को उठाते हैं उनकी खाल खींचते हैं और उनका मांस खाते हैं हमारे लोग दूसरों की टट्टी को अपने सर ऊपर उठाकर फेंकने का काम करते हैं मेरे लोग गंदे रहते हैं उनके पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े नहीं है और उनके पास पैसा भी नहीं है तो हो सकता है यह लोग हमारे लोगों से इसलिए ऐसा व्यवहार करते हैं हो सकता है  यह लोग हमारे लोगों को इसीलिए नीच कहते है लेकिन आज तो मैंने यूरोप के कपड़े पहने हैं अमेरिका और जापान की यूनिवर्सिटियों से शिक्षा प्राप्त की है और एक अधिकारी बनकर मैं यहां आया हूं जब ये मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं तो जो मेरे समाज के अशिक्षित और अनपढ़ लोग हैं तो ये लोग उनके साथ कैसा व्यवहार करते होंगे (रोते हुए) अगर मैं अपने समाज को इस ग़ुरबत और गुलामी से आजाद नहीं करा पाया तो मैं वापस बड़ौदा लौट कर नहीं आऊंगा और मैं खुद को गोली मार लूंगा।

बाबा साहब जब नौकरी छोड़कर अपने घर पहुंचते हैं और यह बात रमाबाई को पता चलती है तो रमाबाई को बहुत दुख होता है।

बाबा साहब - रमा मैं नौकरी तो करना चाहता था लेकिन वहां का चपरासी मुझे फाइल डंडे में बांध कर देता पानी के घड़े को उठाकर अलग रख लेता और वहां के लोगों ने भी मुझे मारने की योजना बनाई मैं ऐसे अपमानजनक स्थान पर नौकरी नहीं कर सकता था इसीलिए मैं नौकरी छोड़ कर चला आया।

रमाबाई - बाबा साहब आपको जैसा अच्छा लगे आप वैसा ही काम करें मैं आपके साथ हूं।

फिर बाबा साहब को अपनी अधूरी पढ़ाई और बड़ौदा रेलवे स्टेशन पर लिए गए संकल्प का ख्याल आता है तो बाबा साहब फिर से विदेश जाकर हम सब की गुलामी का कारण जो हिंदू धर्म के ग्रंथों में लिखा हुआ है उसे खोजते हैं इधर उनका तीसरा बेटा रमेश भी इस दुनिया को छोड़ कर चला जाता है इस प्रकार से बाबा साहब के तीन बच्चे कुर्बान हो जाते हैं। और जब बाबा साहब विदेश से लौट कर आते हैं और हमारी गुलामी व नीचता का कारण हमें बताते हैं।

बाबा साहब - मैं कड़ी मेहनत और लगन से यह जान पाया हूं। कि हमारे समाज के लोगों के साथ जो नीचता भरा और गुलामी का व्यवहार हो रहा है उसका कारण हिंदू धर्म के जो ग्रंथ हैं उनमें लिखा हुआ है और मैं आज यह घोषणा करता हूं कि 25 दिसंबर सन 1927 को पूरी देश की मीडिया को सूचना देकर इस हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ को अग्नि की भेंट चढ़ा कर आप सब को आजाद कर दूंगा।

संचालक - और बाबा साहब 25 दिसंबर सन 1927 को हजारों लाखों की संख्या के सामने हिंदू धर्म के ग्रंथों को वह मनुस्मृति को अग्नि की भेंट चढ़ा कर आप सबको हम सबको इस नीचता और जिल्लत भरी जिंदगी से आजाद करते हैं और कहते हैं ।

25 दिसंबर 1927
बाबा साहब - मैं ऐसी किसी भी बात को नहीं मान सकता जो अमानवीय है और आज के बाद ऐसा कोई भी विधान  व कोई भी कानून मेरे समाज के लोगों पर लागू नहीं होगा जो अमानवीय है क्योंकि यह विधान जबरजस्ती हमारे समाज के लोगों पर थोपा गया हैं।

ऐसा कहकर बाबा साहब मनुस्मृति को अग्नि की भेंट चढ़ा देते हैं और आप सबको आजाद करा देते हैं उसके बाद बाबा साहब मुंबई की कोर्ट में वकालत करते हैं तो उनका जो चौथा बेटा होता है राजरतन वह बीमार हो जाता है देखिए वह दृश्य।

रमाबाई - नानकचंद रत्तू जाओ जल्दी से बाबा साहब को बुलाकर लाओ क्योंकि हमारा जो बेटा है राजरतन वह बहुत बीमार है और वह लंबी लंबी सांसे ले रहा है।

नानकचंद रत्तू - बाबा साहब बाबा साहब जल्दी से घर चलिए आपके पुत्र राजरतन की तबीयत बहुत खराब है और माता रमाबाई ने आपके लिए बुलावा भेजा है।

संचालक - जैसे ही बाबा साहब दौड़कर घर पहुंचते हैं और राजरतन को गोदी में लेते हैं तो राजरतन भी दम तोड़ देता है अपने चौथे बेटे की मौत पर पति के सामने माता रमाबाई क्या कहती हैं।

रमाबाई - रोते हुए बाबा साहब बस करो बाबा साहब अब तो बस करो क्योंकि आपके समाज सुधार की लालसा ने और ज्ञान पाने की लालसा ने मेरा पूरा घर उजाड़ के रख दिया है मैंने एक एक करके अपने 4 बच्चों को दफन कर दिया है बाबा साहब अब तो बस करो ।

बाबा साहब - रमा तू तो मुझे रो करके बता पा रही है मैं तो रो भी नहीं पा रहा हूं मैं तो रोज ऐसे सैकड़ों बच्चों को मरते हुए देखता हूं रमा तू चुप हो जा, रमा तू चुप हो जा।

रमाबाई - बाबा साहब मैंने आज तक आपकी हर बात को माना है और इस बात को भी मान लेती हूं और चुप हो जाती हूं लेकिन आप मुझे इतना बता दो कि आप बड़े फक्र से कहते थे कि तेरा बेटा राज रतन देश पर राज करेगा लेकिन अब यह इस दुनिया में नहीं रहा बताओ यह कैसे इस देश पर राज करेगा बाबा साहब मुझे बता दो कि यह कैसे देश पर राज करेगा।

बाबा साहब - रमा यह सच है कि तेरा यह पुत्र अब इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन मैं तुझे भरोसा दिलाता हूं और राजरतन के पार्थिव शरीर की सौगंध खाकर कहता हूं कि मैं अपने जीवन में ऐसा काम करके जाऊंगा कि हर रमा की कोख से पैदा हुआ राजरतन और हर मां की कोख से पैदा हुआ बेटा इस देश पर राज करेगा मैं तुझे भरोसा दिलाता हूं।

इतना कहने के बाद बाबा साहब अपनी जेबों में हाथ डालते हैं और राजरतन के कफन के लिए उन की जेब में एक पैसा तक नहीं होता है इस बात को माता रमाबाई जानती है और रमाबाई अपनी साड़ी का दुपट्टा पार कर राजरतन के ऊपर डाल देती है और बाबा साहब को ख्याल आता आता है कि मुझे गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन जाना है और बाबा साहब राजरतन के पार्थिव शरीर को छोड़ घर पर ही छोड़ कर लंदन के लिए निकलते हैं तभी पीछे से उनका भाई दौड़कर आता है और कहता है।

भाई - भीम तू पागल हो गया है यह तेरा पुत्र मरा पड़ा है और तुझे विदेश जाने की सूझ रही है तू कैसा बाप है जो अपने पुत्र को इस अवस्था में छोड़कर विदेश जा रहा है और यह समाज क्या कहेगा अपने पुत्र को कंधा देकर उसका अंतिम क्रिया कर्म तो कर ले।

बाबा साहब - भाई मैं जानता हूं कि यह मेरा पुत्र मरा पड़ा है लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि अगर आज मैं गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन नहीं गया तो गांधी एंड कंपनी के लोग मेरे करोड़ों करोड़ों लोगों को मार डालेंगे के सारे और हक अधिकारों को छीन लेंगे इसलिए मैं एक पुत्र की खातिर अपने करोड़ों करोड़ों लोगों को बलि चढ़ते हुए नहीं देख सकता यहां तुम सब लोग हो तुम सब संभाल लोगे ।

ऐसा कहते हुए बाबा साहब गोलमेज सम्मेलन के लिए लंदन चले जाते हैं और आज आपके जो बच्चे हैं आपका जो समाज है जो हक और अधिकार लेकर जी रहा है अपने बच्चों को अच्छे अच्छे कपड़े अच्छी अच्छी शिक्षा और नौकरियों में भेज रहा है इसका श्रेय केवल और केवल बाबा साहब को जाता है और आपके जो लोग हैं वह इस बात को अपने बच्चों को बताने तक शर्माते हैं।
(JAY BHIM JAY BHARAT)