Friday, 2 November 2018

जय भीम का क्या मतलब है

जय भीम का क्या मतलब है

Jai Bheem Ka Mtlb
जय भीम का क्या मतलब है

ये जय भीम क्या है ,जय भीम एक ऐसा नारा है जो राजनीतिक दल सामाजिक संगठन रैलियों में विरोध प्रदर्शनों में अंबेडकरवादी लोग आदि जय भीम का नारा अवश्य लगाते हैं, या जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलती हैं तो जय भीम बोल के अभिवादन करते हैं
“अक्सर जो गैर अंबेडकरवादी हैं वह पूछा करते हैं कि भाई तुम जय भीम जय भीम क्यों बोलते हो इसका क्या मतलब होता है” कुछ लोग तो जय भीम का मतलब यह सोचते हैं कि महाभारत में एक पात्र  भीम  था जिससे लोग समझते है कि यह एक काल्पनिक पात्र है जिसे लोग जय भीम बोलते हैं महाभारत में अक्सर कम ही लोग हैं जो जय भीम का मतलब सही अर्थ में जानते हैं,जय भीम का मतलब बताने से पहले मैं जय भीम शब्द की उत्पत्ति के बारे में  बताना चाहता हूं जय भीम शब्द का प्रयोग सबसे पहले बाबू हरदास ने किया था बाबू हरदास एल. एन. ने 6 फरवरी 1935 को “समता सैनिक दल“ के नाम पर एक पत्र लिखा था जय भीम का प्रचार प्रसार  अछूतो में जाकर करना है बाबू हरदास  एक पक्के अंबेडकरवादी थे।
वे बाबा साहब डॉ अंबेडकर के आंदोलन के साथ काम कर रहे थे।  एक बार जब मुस्लिम साथी कहीं जा रहे थे तब एक मुस्लिम व्यक्ति  दूसरे मुस्लिम व्यक्ति से अस्सलाम वालेकुम बोल रहे थे और जवाब में वालेकुम सलाम बोल कर निकल रहे थे तब उस समय उनके मन में विचार आया  और सोचा कि हमें भी कुछ ऐसा बोलना चाहिए जिससे हमारी पहचान हो तो उन्होंने जय भीम बोलने की शुरुआत की जय भीम बोलने लगे जवाब में बल भीम बोलने लगे । इसी कारण से जय भीम का उदय हुआ शुरुआत में जय भीम बल भीम चला लेकिन समय के साथ बल भीम  का प्रचलन कम हो गया लेकिन जय भीम बोलने का प्रचलन अभी भी जारी है 1949 के बाद डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक था कुछ  पत्रों में जय भीम लिखने लगे थे ।
जब जब विरोध प्रदर्शनों में जय भीम का नारा लगता है तो दुश्मनों के सीने में आग लगती है जय भीम एक ऐसा नारा है  जो फुले शाहू आंबेडकर के आंदोलन को बढ़ाने में यह नारा रीड की हड्डी का काम कर रहा है।
       जय भीम का शाब्दिक मतलब है डॉक्टर अंबेडकर की जीत जय भीम डॉक्टर अंबेडकर के लिए प्रत्येक सम्मान का प्रतीक है जय भीम बहुजन समाज की आवाज बन चुकी है कि हर सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, मुक्ति के लिए जगाने का काम कर रहा है जय का नारा लगाते ही अन्याय के प्रति ,दायित्व के प्रति, एक ताकत का एहसास होता है जय बहुजन समाज की आवाज है

इसलिए गर्व से बोलो “जय भीम”

Tuesday, 30 October 2018

जानिए दीपावली का सच

जानिए दीपावली का सच

दीपावली की सच्चाई
दीवाली की सच्चाई
दोस्तों जब हम किसी से पूछते हैं कि दीपावली क्यों मनाई जाती है तो उसका जवाब होता है कि इस दिन श्री रामचंद्र जी 14 वर्ष वनवास काटने के बाद अयोध्या वापस लौटे थे इसलिए मनाया जाता है राम चरित्र मानस के पेज नंबर 8 पर स्पष्ट लिखा है कि श्री राम वैशाख महीने में वापस अयोध्या आए जो कि अप्रैल का महीना होता है तो यह बात सिद्ध हो जाती है कि राम जी की वजह से दिवाली नहीं मनाई जाती है।

आखिर इतना बड़ा पर्व जो कि पूरे विश्व में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है आखिर किस वजह से मनाया जाता है इस पर्व को यदि बारीकी से देखा जाए तो दो ही बातें मुख्य नजर आती है।

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1-दिवाली उत्सव अमावस्या को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन तथागत बुद्ध जी ज्ञान प्राप्त कर कपिलवस्तु वापस आए थे। उनके स्वागत में कपिलवस्तु के नागरिकों ने हजारों दीपक जलाए थे।

2-जब सम्राट अशोक ने बुद्ध धम्म यात्राएं की प्रचार, प्रसार किया विश्व में धम्म को फैलाया सम्राट अशोक ने प्रण लिया कि मैं तथागत बुद्ध एवं उनके शिष्यों द्वारा दिए गए 84 हजार उपदेशो को जीवंत करूंगा, उन्होंने अपने राज्य जो कि ईरान, इराक और अफगानिस्तान तक फैला था 84 हजार स्कंध बनवाएं थे,तथा स्मृति चिन्ह बनवाए सभी जगह बुद्ध की अस्थियां रखी गई।
यह सभी स्तूपो, जलाशयों, स्कूलो, बिहारो एवं मार्गों के रूप में विकसित किए गए सर्वाधिक बिहार, राजधानी मगध में बनवाए गए। जो कि आज बिहार के रूप में जाना जाता है सम्राट अशोक ने अपने राज्य में यह घोषणा की, कि 84 हजार धम्म स्कन्धो पर कार्तिक अमावस्या को दीप जलाए जाएंगे एवं इस दिन को दीपदानउत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
➡️इसका मतलब होता है, ज्ञान का दीपक! ज्ञान को दान देना! बुद्धि का विकास करना! तथागत बुद्ध के विचारों को आम जनमानस तक फैलाना!
आज कुछ लोगों ने इस उत्सव को स्वार्थ, नीति के तहत परिवर्तित कर दिया है, और त्यौहार का रूप दे दिया है। इस दिन हम सभी देशवासियों से यह कहना चाहते हैं कि इस दिन दीप जलाएं लेकिन,ज्ञान का दीपक जलाएं।
👉अपना दीपक स्वयं बने।
👉ज्ञान को बांटे,
👉बुद्धि का विकास करें ।
इस दिन ऐसा कोई कार्य न करें जिससे पर्यावरण को नुकसान हो पटाखे न जलाए  आतिशबाजी न करें इससे प्रदूषण फैलता है और आम जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ता हैं ।
➡️बहुजन समाज को त्योहारों की सच्चाई बताना बहुत ही जरूरी है क्योंकि जितने भी त्यौहार है ब्राह्मण धर्म में उनमें रत्तीभर सच्चाई नहीं हैं ,इन त्योहारों का संबंध तथागत बुद्ध ,बुद्ध धम्म से जरूर इसका संबंध हैं ।
तथागत बुद्ध के धम्म को  ज्यादा से ज्यादा फैलाए ,तथा इस जानकारी को अधिक से अधिक लोंगों तक Share करें ।
नमों बुद्धाय             जय भीम
Source By :- Social Networking Site

Friday, 12 October 2018

सरल भाषा में समझिए धर्म तथा धम्म में अंतर

सरल भाषा में समझिए धर्म तथा धम्म में अंतर

धर्म तथा धम्म
Lord Buddha
बुध्द कहते हैं- ईश्वर कहीं भी नही हैं उसे ढूढ़ने में अपना वक़्त और ऊर्जा बर्बाद मत करों । 🍃❗


धर्म और धम्म मेँ अंतर- 🍃❗


👉 धर्म में आप ईश्वर के खिलाफ नहीँ बोल सकते, धर्म ग्रंथो की अवेहलना नहीँ कर सकते, अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीँ कर सकते। 🍃❗


जबकि धम्म मेँ तो स्वयं को जाँचने परखने और अपनी बुद्धि का प्रयोग करने की शिक्षा हैँ। 🍃❗


👉 धर्म कहता हैँ कि तेरा भला करने तथाकथित ईश्वर जैसी कोई ताकत आयेगी। 🍃❗


जबकि धम्म कहता हैँ- अत्त दीप भवः अर्थात अपन दीपक स्वयं बनो।🍃❗


👉 बुध्द भी कहते हैँ: "ना मैँ मुक्तिदाता हुँ, ना मैँ मोक्षदाता हुँ। मैँ सिर्फ मार्ग दिखाने वाला हूँ। धम्म अर्थात जीवन जीने का सर्वोतम मानवतावादी आधार । 🍃❗


👉 बहुत से लोग मानते होँगे कि धर्म और धम्म एक ही हैँ। उनको विश्लेषण करने की जरुरत हैँ। धर्म मेँ जन्म लेना पङता हैँ, जबकि धम्म में (शिक्षा) प्राप्त करनी पङती हैँ। जिसे कोई भी प्राप्त कर सकता हैँ।🍃❗


👉 बुद्ध ने अपने अनुयाइयोँ से कहा था कि धर्म में अतार्किक बातेँ हैँ। जैसे आत्मा, परमात्मा,भूत, ईश्वर, देवी-देवता आदि। जबकि धम्म वैज्ञानिक द्रष्टिकोण पर आधारित हैँ। धम्म तर्क और बुद्धि को प्राथमिकता देता है। इसलिये ईश्वर को नकारता हैँ। 🍃❗



👉 धर्म मेँ असामनता है, भेदभाव है, ऊँच-नीच है। जबकि धम्म मेँ सब एक है। सब बराबर हैँ। कोई भेदभाव नही है। धम्म एक शिक्षा है, एक ज्ञान है, जो सबके लिये है। धर्म मेँ विभाजन है। अधिकार वर्गोँ मेँ विभाजित है। जबकि धम्म मेँ वर्गहीनता है। अधिकार और ज्ञान सभी के लिये है। 🍃❗


👉 धर्म मेँ कोई ब्रम्हा को सृष्टि का रचयिता बताता है, तो कोई स्वयं को ईश्वर का दूत कहता है। जबकि धम्म की शिक्षा देने वाले ने खुद को ईश्वर का दूत ना बताकर खुद को एक सच्चा मार्ग दिखाने वाला मनुष्य बताया। 🍃❗


👉 तथागत गौतम बुध्द, ’बुध्द’ का अर्थ बताते हुए कहते हैँ: "बुध्द" एक’अवस्था अथवा स्थिति का नाम हैँ। 
एक ऐसी स्थिति जो मानवीय ज्ञान की चरम अवस्था है। 
जब मनुष्य अपने तर्क और ज्ञान से एक दुर्लभ अवस्था (बोधिसत्व) को प्राप्त कर लेता है वो ‘बुध्द’ कहलाता है



👉 धर्मोँ मेँ कानून की कठोरता है। जबकि धम्म को मानने या ना मानने मेँ आप पूर्णतया स्वतंन्त्र है। 🍃❗


👉 धम्म आप पर कोई कानून नहीँ थोपता। धर्म मेँ सब कुछ फिक्स होता है। जैसे: जो धर्म ग्रंथों मेँ लिखा है, वही सत्य है। उसका पालन किसी भी कीमत पर आवश्यक है। जबकि धम्म परिस्थितियों के आधार पर मानव हित के लिये परिवर्तन को मानता है। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखता हैँ।🍃❗


👉 धम्म ‘ज्ञान’ है। इसलिये इससे तर्क-वितर्क और शिक्षा मे बढोतरी हो सकती है। जबकि धर्म मानव निर्मित ‘कानून’ है। ये जो भी नीला -पीला हैँ वही धर्म है।🍃❗


वैज्ञानिक तर्क वितर्क ही सफल जीवन का मूल आधार हैं 🍃


☸☸ नमो बुद्धाय ☸☸
Sources By  whatsapp

Monday, 8 October 2018

बहुजन महापुरुषों को एक करने वाले कांशीराम

बहुजन महापुरुषों को एक करने वाले कांशीराम

बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम साहब के 12वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर, कांशीराम जी का बहुजन समाज के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण योगदान बता रहा हूं, बहुजन समाज के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए, बहुजन समाज को बताना बहुत ही जरूरी है इसलिए यह लेख में प्रकाशित कर रहा हूं ।
Kanshiram ji
Kanshiram ji
कांशीराम जी जिस विचारधारा को लेकर चल रहे थे तथा भारतीय राजनीति में स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे, तथा बहुजन समाज को एक करने का प्रयास कर रहे थे, तब काम आसान नहीं था ,इसलिए मान्यवर कांशीराम जी ने बहुजन समाज को, एक करने के लिए विचारधारा के आधार पर संगठित करने की कोशिश की, कांशीराम जी ने SC,ST,OBC समाज में जो महापुरुष पैदा हुए थे, जिन्होंने ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन चलाया तथा ब्राह्मणवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए ,जिन्होंने अपने जीवन का त्याग बलिदान करके बहुजन समाज को हक अधिकार दिलाने के लिए ,तथा महिलाओं को गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए, जिन महापुरुषों ने मोमबत्ती की तरह अपने को जलाकर बहुजन समाज के लिए लड़ाई लड़ी उन महापुरुषों को कांशीराम जी ने अपने अपने प्रांतों से उठाकर के राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाकर करके बहुजन समाज के एक समूह में स्थापित करने की एक ऐतिहासिक कोशिश की थी।
Bahujan Mahapurush
Bahujan Mahapurush
कांशीराम साहब ने भारत के बहुजन महापुरुषों को किन किन राज्यों से एक समूह में जोड़ने की कोशिश की आइए देखते हैं
महाराष्ट्र :- महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले ,छत्रपति शाहूजी महाराज ,डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर संत चोखामेला
केरल :- नारायण गुरु
तमिलनाडु:- पेरियार रामास्वामी नायकर
बिहार ,झारखंड:- बिरसा मुंडा
उत्तरप्रदेश:- संत कबीर ,संत रविदास
बहुजन समाज के महापुरुष दिन को छोटे-छोटे प्रांतों राज्यों से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर जगह दी तथा सम्मान दिया तथा इनकी विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया, कांशीराम जी ने इसी फार्मूले के साथ बहुजन समाज के एससी एसटी ओबीसी को विचारधारा के आधार पर एक करने की कामयाब कोशिश की ।
कांशीराम जी का ऐसा प्रयास था कि ,जो मनु द्वारा निर्मित अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की 6743 जातियां है , टुकड़ो के भी टुकड़ों में बंटी हुई जातियां हैं ,उन जातियों को विचारधारा के आधार पर लोगों को अल्पजन से बहुजन बनाकर देश का हुक्मरान बनाये ।
कांशीराम जी किसी ऐतिहासिक नीति के कारण बहुजन समाज के महापुरुषों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली तथा इसी प्रयास के कारण SC,ST,OBC समाज बहुजन समाज के महापुरुषों की विचारधारा जाने का मौका मिला, तथा इसी प्रयास के कारण बहुजन समाज पार्टी देश की तीसरे नंबर की पार्टी तथा राष्ट्रीय पार्टी बनी , तथा sc.st.obc एक हो जाने के कारण देश की जनसंख्या वाला सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज की बेटी मायावती जी चार बार मुख्यमंत्री बनी ।
इसी प्रयास के कारण देश का 85% बहुजन समाज अपने बाप दादाओं का सच्चा इतिहास जानकर सत्ता के मंदिर पर कायम होगा तथा बहुजन समाज के सामाजिक आर्थिक राजनीतिक मुक्ति के आंदोलन को अपनी मंजिल तक पहुंचायेगा ।
कांशीराम जी ने इस अनुसूचित जाति, जनजाति  पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक बहुजन समाज के आंदोलन को उस समय रीड की हड्डी बन कर कांशीराम जी ने इस आंदोलन को संभाला और आगे बढ़ाया, जब आंदोलन खत्म होने की स्थिति में हो गया था ।
Read more:- बहुजन समाज का क्या मतलब है ?

Friday, 5 October 2018

बहुजन समाज का क्या मतलब है ...

       बहुजन समाज का क्या मतलब है

Bahujan Samaj
Bahujan Samaj
अक्सर लोग यह सोचते रहते हैं कि अंबेडकरवादी लोग ज्यादातर बहुजन शब्द का प्रयोग क्यों करते हैं आखिर बहुजन का मतलब क्या है या बहुजन केवल अनुसूचित जाति जनजाति के लिए या सीधे शब्दों में बोले तो चमार भंगी बसोर लोगों को बहुजन बोलते होंगे अक्सर मैंने लोगों को बोलते देखा है .

बहुजन शब्द का इतिहास :-

बहुजन शब्द का प्रयोग सबसे पहले महामानव तथागत गौतम बुद्ध ने किया था बहुजन शब्द ( त्रिपिटक )से लिया गया है , भगवान बुद्ध ने कहा है बहुजन हिताय बहुजन सुखाय जो कि बहुजन समाज पार्टी का 2007 से पहले यह नारा रहा है । भगवान बुद्ध के समय में बहुजन शब्द का मतलब बहुसंख्यक (Majority) होता है, बहुजन अर्थात अधिक से अधिक संख्या वाले लोग होता है , भगवान बुद्ध ने कहा बहुजन हिताय बहुजन सुखाय मतलब अधिक से अधिक लोगों का हित तथा सुख हो ।

भारतीय राजनीति में बहुजन शब्द :-

भारतीय राजनीति में बहुजन शब्द का प्रयोग बामसेफ DS4 तथा बीएसपी के संस्थापक कांशीराम जी ने बहुजन शब्द का प्रयोग किया, उन्होंने बहुजन शब्द को इतना ज्यादा प्रचारित,प्रसारित किया कि लोगों की जुबान पर बहुजन शब्द का नाम आ गया, बहुजन शब्द का मतलब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा धार्मिक अल्पसंख्यक जैसे मुस्लिम,सिख,ईसाई जैन,बौद्ध,पारसी को कहा गया है जिनकी संख्या से देश में 85% है, इन वर्गों को एक करके बहुजन समाज कहा गया है ।
कांशीराम जी ने मनु द्वारा निर्मित चतुर्वर्णीय व्यवस्था में जिसमें ब्राह्मण,क्षत्रिय वैश्य तथा शुद्र वर्ण इन चार भागों में बांटा गया । तथा तथा शुद्र वर्ण को मनु ने 6743 जातियों के टुकड़ों के टुकड़ों में बांट दिया तथा उन 6743 टूटी हुई जातियों को एक करके अल्पजन से बहुजन बनाने की कोशिश कांशीराम जी ने की, जिसे बहुजन समाज कहा गया , तथा बहुजन समाज के महापुरुषों को प्रांतीय स्तर से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर बहुजन महापुरुषों को एक करके, नई पहचान दिलाई । बहुजन समाज का मतलब है इस देश का 85% बहुसंख्यक आबादी वाला बहुजन समाज जिनको जाति तथा उपजातियों में बांटा गया । बहुजन शब्द के माध्यम से इस देश की 85% SC,ST,OBC तथा माइनॉरिटी को एक सूत्र में बांधने की कोशिश कांशीराम जी ने की ।
बहुजन समाज का नाम देने की जरूरत है, इसलिए हुई क्योकि इस 85% आबादी वाला (बहुसंख्यक) बहुजन समाज सामाजिक,आर्थिक, राजनीतिक रूप से शोषण होता रहा है।
26 जनवरी 1950 संविधान लागू होने के बाद इस 85% बहुजन समाज का शोषण होना बंद नहीं हुआ तथा संविधान लागू होने से पहले 85% समाज पर 15% वाले मनुवादियों का राज कायम था ,और संविधान लागू होने के बाद भी 15% वालों का देश में राज रहा तथा तथा बहुजन समाज की वोटों की लूट हुई, इस 85% बहुजन समाज को एक करके ,15% वालों का राज हटाकर 85% वाली बहुसंख्यक बहुजन समाज का सत्ता पर कायम करने की कोशिश कांशीराम जी ने की तथा भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सफलता भी मिली ।
हमारी 85% जनसंख्या वाले बहुजन समाज को जातियों के आधार पर तोड़े हुए लोगों को एक करके बहुजन समाज को देश का शासक बना कर 85% गरीब शोषित पीड़ित लोगों का उद्धार करना होगा ।

Must Read:- Occupation Of Hindu Religion In Government Institutions

Monday, 1 October 2018

Occupation of Hindu religion in government institutions

Occupation of Hindu religion in government institutions

Manu Rajasthan High Court
Jai Bheem
In the Constitution of our country, it has been said of secularism, means not in favor of any religion, it is said that 68 years from January 26, 1950 to 2018, Hindu religion is being occupied in government institutions, The constitution says the Constitution speaks of absoluteness, and those who say that the country runs through the constitution, then why is the occupation of Hindu religion in the government institutions, on this issue we think The forces on the area, and comes Question in mind: -

Question:- Is there a Hindu population only in India?
Answer: - No
Question:- If India does not have a population of Hindus, then is the whole country favored by Hindu religion?
Answer: - No

If India does not have only a Hindu population, nor does it consider Hindu religion as a whole country, then why is the possession of Hindu religion in government institutions, we need to understand this point of thinking.

Where is the possession of Hindu religion: -
Today, in every government institutions of the country, the image or idol of Goddess of Hinduism may have been seen somewhere and perhaps you have also come to have the question that why there is only an image or idol of goddesses in government departments, institutions , And why other religions are Muslims, Christians, Jain is not religion of religion, this question must have come to your mind, you must have always seen that government, school, college, government department, ho Spital, police station etc. will definitely have a temple of Hindu religion or you will definitely see the statue or photo of Goddess gods in these divisions and its largest exmaple statue of Manu outside the Rajasthan High Court is established.
Hinduism in Government school or colleges: -
Whenever we go to study in Government schools or colleges, there are idols or statues of gods and goddesses, there is definitely the worship of goddesses before the beginning of any program in the school college, and then the program starts, whereas the school starts In the college there are not only teachers and students of Hinduism, but there are people of all faiths, but there is special importance given to Hinduism.

Even so, the special Hindu religion has been given importance in Syllabus from the first to the tenth in the government school and the question about the Hindu religion is questioned.

Occupation of Hindu religion in government departments: -
If we talk about the government departments, the statue or goddess of Goddesses, especially in the offices of government departments such as police station, collectorate, railway station, tahsil, government bank and various types of government departments, It has to be seen that the temples of Hindus outside or outside of the office of government departments are mostly, and especially in the jails, the temples of Hindu religion would be built and It is a daily worship ceremony, whereas in all government departments all those who believe in religion are working there and people from all religions come from their work but only to see that the Hindu religion is forced to occupy force while it is against the constitution and democracy. But without any pressure in the government department and the office, they have set up idols of temples and deities here.

Why is that so?
The question arises that why the Hindu religion is forcibly imposing pro-Hindu activists, it can understand that such conspiracy of Brahminical RSS and Hindu organizations is being made that every Goverment, photo of Hindu deities in private department and The temple should be established so that as I mentioned in the previous article, the main purpose of this is to make India a Hindu nation.

Right now, Hindutva Bharatiya Janata Party (BJP) run by RSS has a complete majority in the Lok Sabha to change the constitution and declare as a Hindu Nation, but there is no absolute majority in the Rajya Sabha yet, but when a complete majority in the Rajya Sabha will prove to be proved and by Brahminical ruling leaders Will declare a Hindu nation, then ask those questions why the Hindu nation is created then the BJP RSS leader asks this question They will say in the answer that for many years, there is an idol of goddesses in all the government offices in the country, and the temple is established then nobody has opposed it means that the country's public is in favor of forming a Hindu nation, then we do nothing Will find
In the Hindu nation, 85% of the country's population will be in a state of turmoil. You have read this very well in my last article 70 years of independence and our constitution.

If you are thinking of all the reads, if some people are thinking that this is a common thing, then I want to tell it that this is a very serious issue. We have to think carefully and get out of it.

Please tell us how you think this article in the comment box and your suggestions must tell us

Jai Bhim Jai India

Monday, 24 September 2018

मायावती जी को प्रधानमंत्री बनना जरूरी क्यों

मायावती जी को प्रधानमंत्री बनना जरूरी  क्यों ….


मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना जरूरी क्यों है इसका सवाल जवाब लोगों को देना जरूरी है,  यह सवाल अक्सर लोग पूछा करते हैं कि मायावती जी प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसा क्या करेगी जो देश की जनता उन्हें प्रधानमंत्री बनाएं ।
सवाल का जवाब है कि मायावती जी ही देश की केवल एक मात्र ऐसे नेता है ,जो संपूर्ण मानव समाज का भला सोचती हैं क्योंकि मायावती जी खुद मानवतावादी अंबेडकरवादी है और अंबेडकरवादी कभी चींटी के साथ भी कभी नाइंसाफी नहीं कर सकता है फिर तो मानव की बात है और मायावती जी फुले,शाहू,अंबेडकर के आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली एकमात्र नेता हैं ।
आज आजादी के 72 साल होने के बाद भी देश का प्रधानमंत्री कोई दलित नहीं बन पाया है , यह पहला मौका है जब हम इस देश के दलित,शोषित,पीड़ित समाज की महिला को हम प्रधानमंत्री बनाएंगे । पिछले 72 सालों की राजनीति में बहुजन( SC, ST ,OBC and Minority) समाज के साथ अन्याय अत्याचार हुए उन्हें साज़िश के तहत  बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान में जो अधिकार दिए हैं उन अधिकारों का हनन होता रहा है उन्हें साज़िश के तहत शिक्षा से दूर किया गया ज़मीन से दूर किया गया रोज़गार से दूर किया गया, 72 साल से  मनुवादी लोग 85% बहुजन समाज पर 15 % वाले मनुवादी सोच वाले अमानवतावादी सोच वाले लोग हम पर शासन कर रहे हैं । तथा यह लोग हमारे वोटों की लूट कर रहे हैं , इन 72 सालों में कोई दलित शोषित समाज का प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है 2019 में मौका है कि हम बहन मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाये ।
आज देश में जब से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार बनी है तब से देश 20 साल पीछे हो गया है,देश में महँगाई बढ़ गई है देश में अन्याय अत्याचार हो रहे हैं बलात्कार हो रहे हैं sc.st.obc तथा मुस्लिमों के साथ आए दिन आयेे दिन घटनाएं  हो रही है शिक्षा का स्तर कम हो रहा है , सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 4 करोड़ से ज्यादा युवा बेरोजगार घूम रहे हैं ,यह सब भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में हुआ है और इस शासनकाल से बहुजन समाज के अलावा सवर्ण समाज भी परेशान हो गया है, आज देश केें किसान परेशान, मजदूर परेशान ,कर्मचारी परेशान, छोटे व्यापारी परेशान, सभी लोग बहुत ही ज्यादा परेशान और त्रस्त हो चुके हैं।


अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार अगले 5 सालों तक और रही तो यह जो डॉ बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा लिखित जो संविधान हैं उस संविधान को खत्म करके हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा संविधान खत्म करने का ट्रेलर अभी आप 9 अगस्त को देख चुके हैं अगर 2019 के बाद ही फिर सत्ता में वापसी पूरा संविधान खत्म कर देंगे,  और यह देश एक बार फिर गुलाम बन जायेगा तथा यह देश धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र न होकर, लोकतांत्रिक राष्ट्र न होकर हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, और हिंदू राष्ट्र बनने का मतलब है इस देश में वर्ण व्यवस्था के आधार पर शासन व्यवस्था बनाए रखना । हिंदू राष्ट्र घोषित होने का मतलब है यह देश 5000 साल पीछे की ओर चले जाना, अगर देश हिंदू राष्ट्र घोषित हो गया तो ब्राह्मण ,बनिया ,ठाकुर की महिलाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी क्योंकि हिंदू राष्ट्र के अनुसार महिलाएं  अपवित्र हैं शूद्रों के समान हैं तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में महिलाओं को कोई भी अधिकार नहीं दिए हैं । अतः देश को बचाने के लिए भी देश की जनता को मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना पड़ेगा ।

  देश के लिए मायावती जी का प्रधानमंत्री बनना जरुरी क्यों:-

➡️देश की सुरक्षा के लिए…..
➡️रोजगार के लिए……..
➡️जातिवाद से मुक्ति के लिए….
➡️डॉ बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान देश में पूर्णता: लागू करने के लिए
➡️देश में बढ़ती महंगाई को कम करने के लिए
➡️महिलाओं तथा SC,ST,OBC तथा मुस्लिम     समाज के साथ हो रहे अन्याय अत्याचार को    जड़ से खत्म करने के लिए
➡️देश में समान शिक्षा लागू करने के लिए
➡️सामान स्वास्थ्य सेवाएं लागू कराने के लिए
➡️सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलाने के लिए
➡️बहुजन समाज को संख्या के आधार पर धन धरती दिलाने के लिए……
➡️देश में संख्या के आधार पर उसकी भागीदारी तय करने के लिए...
➡️लोकतंत्र बचाने के लिए …..
➡️संविधान को बचाने के लिए
अगर देश की भलाई सच में बिना कोई जातिवादी मानसिकता के तथा देश की एकता और अखंडता चाहता है तो बहन कुमारी मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाना होगा क्योंकि अभी नहीं तो कभी नहीं पिछले 72 सालों में भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस ने इस देश पर शासन किया है अब वक्त आ गया है कि देश का कोई तीसरा दल देश का प्रधानमंत्री बने और इस देश के लिए जरूरी है ।


आप मायावती जी को  प्रधानमंत्री बनाने के बारे में  क्या विचार रखते हैं आप हमें कमेंट में  अवश्य बताएं तथा आप भी देश की भलाई के लिए बहन जी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं  तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ।