Friday, 30 March 2018

क्या दलित हिन्दु शुद्र हैं ?

Dalit Hindu Shudra
उजाले की ओर Part 1

क्या दलित हिन्दु शुद्र हैं ?

दलित शब्द को शूद्र शब्द का पर्यायवाची शब्द समझा जाने लगा है .संजीव जायसवाल की फिल्म Shudra the Rising में दलित वर्ग (अनुसूचित जाति )  Schedule caste को शुद्र के रूप में दिखाया गया है, जबकि ब्राह्मण साहित्य (वैदिक साहित्य) में दलित वर्ग को शूद्र वर्ग में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि दलित वर्ग चारों वर्णों और ब्राह्मण धर्म से बाहर बाबा साहिब की   लिखी पुस्तक शूद्रों की खोज (Who was shudra )के पेज नं. 20 में लिखा, कि“ सवर्ण का अर्थ है ,कि चारों वर्णों में से किसी एक का होना” अवर्ण का अर्थ है ,कि चारों वर्ण से अलग होना, ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य तथा शूद्र सवर्ण है और अछूत (Untouchables) अतिशुद्र अवर्ण है ।
वरिष्ठ धर्मसूत्र में कहा गया है ,कि कृपण ,श्रोत,होत्र,बीमार,कैदी,सोम बेचने वाला बढ़ई, धोबी ,शराब बेचने वाले, जासूस ,प्याज खाने वाले तथा मोची का दिया हुआ भोजन न शूद्र का दिया हुआ भोजन भी न खावें।


वरिष्ठ धर्मसूत्र में बढ़ई, धोबी और मोची को अलग दर्जा दिया गया और शूद्र को अलग दर्जा गया है इसका मतलब है ,कि मोची,बढ़ई ,धोबी और SC ST  की गणना शूद्र वर्ग में नहीं की जाती थी . बल्कि दलित वर्ग को अवर्ण का दर्जा प्राप्त था ,शास्त्र में अंत्यज कहा गया है, जिसका अर्थ होता हैं अंत में मतलब चारों वर्णों के अंत में ब्राह्मण धर्म (वैदिक धर्म) से बाहर महात्मा  फुले के द्वारा लिखी गई पुस्तक गुलामगिरी Gulamgiri के पेज नंबर 67 पर महार जाति को महाअरी क्षत्रिय लिखा है। मतलब महाराष्ट्र की महार जाति अछूत बनने से पहले क्षत्रिय वर्ण में आती होगी बाद में महारों को बहिष्कृत कर दिया तथा  अवर्ण (अंत्यज ) बना दिया होगा .


वर्ण व्यवस्था या जाति व्यवस्था:-


प्रारंभिक काल में भारतीय समाज में किसी भी तरह की  वर्ण व्यवस्था नहीं थी, बाद में भारतीय समाज को अप्राकृतिक तौर से 4 भागों या 4 वर्ण में  विभाजित किया गया है. और ब्राह्मणों ने अपनी उच्चता और श्रेष्ठता को स्थाई कर लिया ,यह चार वर्ण थे ( ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वैश्य ,शूद्र) अप्राकृतिक तौर से 4 वर्ण बन जाने के बाद  उस काल तक व्यक्तियों में किसी तरह की छुआछूत की प्रथा नहीं थी, न ही उस समय पर कोई बहिष्कृत या अंत्यज वर्ग था , लेकिन जैसा कि हम सभी जानते है ,कि ब्राह्मण धर्म में कई प्रकार के अंधविश्वासों (Superstiitious) और अंधश्रद्धा से भरा पड़ा है, यहाँ  जन्म, मृत्यु और रजोधर्म का अपवित्रता (Impiety) (छूतक)  के रूप में मानते . जब किसी के  कुटुंब में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी, तो उस परिवार में अपवित्रता आ जाती थी, और उस कुटुम्ब को इतने दिनों तक अछूतों की तरह रहना पड़ता था, जब तक तक वे  परिवार (Family) में अपवित्रता (Unholines) को दूर करने के लिए साफ सफाई नहीं कर लेते थे, तथा गंगा जैसी पवित्र मानने वाली नदियों में स्नान नहीं कर लेते थे एवं पंडित पुजारियों से धार्मिक कर्मकांड नहीं करवा लेते थे, इसी तरह प्रसव माता को अपवित्र समझते. परिवार (Family) के लोग Person उनका छुआ हुआ पानी तक नहीं पीते थे. जब तक उस महिला से पवित्र होने के लिए टोने-टोटके नहीं करवा लिये जाते थे ,इस घोर अंधविश्वास के कारण नवजात शिशु को भी अपनी मां का 6 दिनों तक दूध नहीं पिलाया जाता था. इसी तरह महिला जब माहवारी से होती थी ,तो उसे रसोईघर (kitchin) में जाने की अनुमति नहीं होती थी ।


कबीलों और रजवाड़ा में धन, जमीन चारागाहों के लिए आपसी संघर्ष होते थे, जिन कबीलों के लोग एक दूसरे से संघर्ष में हार  जाते , वे अपने घर बार छोड़कर बाहर चले जाते थे, और अपने दूसरे राज्यों में छिपकर रहने लगते थे,,पराजित और छितरे (Scattered) हुए लोगों को दूसरे राज्य में जिंदा रहने के लिए वे मजबूरी में अपवित्र काम और व्यवसाय करने पड़ते थे, जो वहां स्थाई रूप से बसे व्यक्ति काम करने में शर्म महसूस करते थे, छितरे  हुए लोगों को राज्य दंड प्राप्त व्यक्तियों को मृत्यु दंड देना पड़ता था ,तथा उन्हें उस मृत व्यक्ति के वस्त्र (Cloths) आभूषण लेने का अधिकार था, ऐसे व्यक्तियों को लोग चंडाल कहते थे । चांडालों को सबसे पहले वर्ण व्यवस्था से बहिष्कृत अवर्ण ( अंत्यज) अछूत (Untouchables) बना दिया था. जिन लोगों ने जन्म के समय गर्भवती माता के कपड़े धोये उन्हें भी अछूत अंत्यज घोषित कर दिया, जिन्होंने जन्म देने वाली माता का प्रसव के समय मदद की उनको भी अछूत अंत्यज (Untouchables)  बना दिया  गया .जिन-जिन लोगों को भी अपवित्रता से जुड़े काम करने पड़े उन्हें समय-समय पर हमेशा के लिए अछूत घोषित कर दिया गया ,जो व्यक्ति जन्म मृत्यु से जुड़ी, अपवित्रता दूर नहीं कर पाये उन्हें भी अछूत  अपवित्र (Unholines) घोषित कर  दिया गया।

लेखक :- भोलाराम








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Tuesday, 27 March 2018

Read what is Poona Pact 1932 in English

Poona act 1932
Poona  Pact 
Baba Saheb had put the problems of untouchables in front of the British government ... and demanded special privileges for them ....
Considering the rational arguments of Baba Saheb, the British Government accepted the request of Baba Saheb Dr. Ambedkar to give special facilities ... and in 1927 Simon Commission came to India,
Mr. Gandhi did not like to come to the Simon Commission of India,
So, he made a tremendous slogan, "Simon Commission Go Back"




Baba Saheb made it clear to the British government that the untouchables have a different existence than the Hindus, they are living like slaves, they have neither the authority to fill water from public wells nor have the right to write,
In the Hindu religion, the rights of untouchables have been abducted ... and they have no existence of their own, therefore they continue to declare them as part of Hindu religion ....
In the Round Table Conference of London in 1930, 1931, 1932, Baba Saheb Dr. Ambedkar advocated a society called untouchable .... He also did not spare the British government and said ... what is the British Empire Shahi took any step to finish touching .....
There was no shortage of oppression on the untouchables in the British State for 150 years.
Baba Saheb's argument in the Round Table Conference was so concrete and authoritative that the British government had to bow before Baba Saheb ....
In 1932, Ramsay MacDonald announced a plan for minority representation .... It was known as the Communal Award ....
In this award, the society called "untouchables" got "double right"

➡️First, they will choose differently in reserved reserved seats.

➡️and the second two votes got the right,

For one vote reserved seat and for the second seat reserved for unreserved seat ....
By giving this right, Baba Saheb Dr. Ambedkar's height became very high in the society, Dr. Ambedkar said in relation to this right ....
With the demand for the right to electoral election, we are not going to harm any Hindu religion ... ... we only want freedom from the dependence of building our destiny on those upper castes ....
Ammdar was in opposition to the Communal Award ... They did not want that the untouchables are different from the Hindus ....
They considered the untouchables as an integral part of the Hindus But when Baba Saheb Dr. Ambedkar questioned Gandhi ....

Q. If the untouchables are an integral part of the Hindus then why do they treat them like animals?


But never answer Mr. Gandhi, Baba Saheb.

Baba Saheb told Mr. Gandhi Mr. Mohan Das Karam Chand Gandhi You can be a very good nurse of untouchables ... but I am his mother ... and mother is my mother Never allow harm to happen ....
Mr. Gandhi hunger strike against the Communal Award ....
At that time he was in Yerawada Jail and this was the right that millions of untouchables of the country would get a new life and they would be free from the enslavement of centuries ... But due to the fasting of Mr Gandhi, Baba Saheb On the expectations of the water revolving,
Mr. Gandhi was stubborn on his stance, Baba Saheb did not want to lose this right at any cost ....
Due to the hunger strike, Gandhi ji reached near death, in between, Baba Saheb got many letters filled with threats ... ... in which he wrote that he should leave this right or else he would not be okay . such a letter to Baba Saheb could not be distracted a bit .... He was not afraid of his dying ....
The condition of Mr. Gandhi was worsening day by day Meanwhile, Baba Saheb got more letters that if anything happens to Gandhiji, we will destroy the untouchables' settlements. ...
Baba Saheb thought, when the untouchables are not there, then for whom I will fight, Baba Saheb's friend also explained to Baba Saheb that ....
If a Gandhi dies, the second Gandhi will be born, but you will not be there, then what will happen to your society Baba Saheb, after seriously considering his mind, Made it ....
And on September 24, 1932, Baba Saheb, who was tears in eyes, signed Poona Pact. In this context Baba Saheb's name will remain immortal because he gave life to Mr. Gandhi ...
On the third day, Dr. Ambedkar organized a Dhikkar Diwas of Poona Pact ... .. Dr. Ambedkar, who was crying from the stage said, "By signing the Poona Pact, I have made the biggest mistake of my life I was constrained to do this my children Improve my mistake ...
Baba Saheb has never considered Mr. Gandhi as a saint in his life, he considers Jyotiba Phule as the true Mahatma.

Monday, 19 March 2018

कांशीराम जी का अन्तिम उद्देश्य

Kanshiram sahab
कांशीराम जी का अन्तिम उद्देश्य 
साल1965 के समय जब कांशीराम जी बाबा साहब डॉ अंबेडकर की विचारधारा से प्रभावित होकर बाबा साहब के आंदोलन मूवमेंट को बढ़ाना चाह रहे थे ,तब उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) में साहब कांशीराम जी शामिल हुए लेकिन RPI के नेतागण बाबा साहब के Movement को छोड़ने की तैयारी कर चुके थे.

RPI के नेताओं का मानना था कि यह जो फुले शाहू आंबेडकर की विचारधारा ठीक है ,सही है मैं सहमत भी हूँ ,लेकिन इस विचारधारा से हम MLA नहीं बन सकते MP नहीं बन सकते तो कांशीराम जी सवाल पूछा करते थे कि क्या MLA MP बनना जरूरी है , तो उनके पास कोई संतोषजनक उत्तर नहीं होता था .




इस प्रकार जिन लोगों की देख-रेख में डॉ.बाबा साहब अंबेडकर ने आंदोलन को चलाया आगे बढ़ाया संघर्ष किया वही लोग इस मूवमेंट को आंदोलन को छोड़ने की तैयारी कर चुके थे और बाबा करते-करते बापू के चरणों में आ गए.

ऐसा कांशीराम जी ने महाराष्ट्र के नेताओं और RPI का हाल देखा और उन्होंने निष्कर्ष निकाला।

" जिस समाज की गैर राजनीतिक जड़ें मजबूत नहीं होती हैं ,उस समाज की राजनीति कभी कामयाब नहीं होती है "

साहब कांशीराम जी गैर राजनीतिक जड़ें मजबूत करने के लिए 15 लाख कर्मचारियों का BAMCEF नाम का संगठन बनाया और फुले शाहू आंबेडकर की विचारधारा बहुजन समाज के कर्मचारियों को फुले शाहू अम्बेडकर की विचारधारा बताकर तैयार किया, मान्यवर कांशीराम जी का कहना था ,कि बाबा साहब के संघर्षों की वजह से आरक्षण मिला तथा उसी आरक्षण की वजह नौकरी पेशा करने का मौका मिला, तो बहुजन समाज के कर्मचारियों को समाज को कुछ वापिस भी करना पड़ेगा, इस तरह 6 दिसंबर 1978 को BAMCEF (The All India Backward And Minority Communities Employees Federation) की स्थापना की .



BAMCEF के माध्यम से संगठित होने के बाद संघर्ष करने के लिए सन 1981 मे DS4 ( दलित शोषित समाज संघर्ष समिति) की स्थापना की .

उन्हीनें नारा दिया… … .

"ठाकुर बामन बनिया छोड़,बाकि सब है DS4"

DS4 के माध्यम से कांशीराम जी ने एक बड़ा आंदोलन Movement खड़ा करने की DS4 के माध्यम से खड़ा करने की कोशिश की .

इसके बाद 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की, तथा सामाजिक परिवर्तन आर्थिक मुक्ति राजनीति के माध्यम से संघर्ष आरंभ किया, और BSP बनने के 10 साल बाद 3 जून 1995 को बहुजन समाज पार्टी की पहली सरकार उत्तर प्रदेश में बनी जिसकी मुख्यमंत्री माननीय सुश्री बहन कुमारी मायावती जी बनी , और 1996 में बहुजन समाज पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी होने का दर्जा मिला, उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की 4 बार सरकार बनी , 4 ही बार बहन जी को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला ।

यह सब कांशीराम जी का 0 से राष्ट्रीय पार्टी बनाने का सफर था .

यह सफर आसान नहीं था इसके पीछे कांशीराम जी का बहुत बड़ा त्याग बलिदान रहा ,कांशीराम जी जब इस फुले शाहू अंबेडकर के आंदोलन को आगे की शुरुआत कर रहे थे तो ना तो उनके पास संगठन था ना पैसा था कांशीराम जी ने इस कारवां को आगे बढ़ाते समय उन्होंने 3-4 दिन की सूखी रोटी खाई, मुर्दों की उत्तरण पहनी तथा 5000 किलोमीटर साइकिल चलाकर 2000 किलोमीटर पैदल चलकर इस कारवां को आगे बढ़ाया .

कांशीराम जी अक्सर बोला करते थे… …

"सामाजिक क्रांति की चेतना दिल की गहराईयों से आती है, यह एक ऐसा तथ्य है,जो नौजवानों को इस बात के लिए प्रेरित करता है,कि वे सामाजिक आंदोलन में अपना योगदान दें "

अगर कांशीराम साहब नहीं होते तो शायद डॉ अंबेडकर नहीं जान पाते अगर इस भारत देश में सबसे बड़ा अंबेडकरवादी था तो वे कांशीराम थे, कांशीराम जी से बड़ा अंबेडकरवादी कभी पैदा नहीं हुआ .

कांशीराम साहब ने कहा था… ..

हमारा अंतिम लक्ष्य इस देश के बहुजन समाज को शासक बनना है।
यही मान्यवर कांशीराम साहब का अन्तिम उद्देश्य था .

Tuesday, 13 March 2018

Scientific and unscientific thinking in India

Scientific , unscientific
Scientific and unscientific


On 9th March, in the dainik Bhaskar newspaper, there was an article written by former Union Minister Shashi Tharoor. The article titled "Anti-science attitude can not make India a superpower" has been mentioned in the article, that the leader of BJP including the prime minister and the sympathizers of the BJP attack their principles in science, and the unscientific Promote The article mentions the speech given by Prime Minister Narendra Modi in the inaugural function of Mumbai's hospital in October 2014, claiming that the goddess of the elephant is Ganesha, proof of this that there was knowledge of plastic surgery in ancient India. In Rajasthan, the Minister of Education and BJP's veteran leader Vasudev Devnani also mentioned the claim in which he had said that the cow was the only one. The queen who takes oxygen, and releases oxygen only. The article also has written about the interview of Mahesh Chand Sharma, a former Judge of Rajasthan High Court, in which he said that India's national bird peafowl is cosmic throughout life and drinks his tears and makes piglets pregnant is.

By reading the article, it appears that to make a secular India a Hindu nation, BJP leader and BJP sympathize with intentionally weakening the role of science. But I believe that such leaders and individuals deliberately attack the principles of science Do not deliberately promote unscientificity. Rather they regard those principles and theories as the true and true of the unscientific theory they preach. Believe in scientific theories

In our country, children get education in two ways. The first is that the children learn from the school, according to another method, children read and learn in school. Children go to school before going to school to know why they are day and night. When the children bathed in the morning, grandparents often say that the son took a bath and now greet the sun god. Curiosity- When children ask about Lord Sun, they are told that the Sun is God and they come sitting on the chariot to illuminate the world. The sun pulls 7 horses to the chariot of God.

When children ask about Rainbows in the rainy season. Then they are told that Indra God lives in heaven. Those who are the god of rain, pours water on the earth with the grace of them, which you see in the sky rainbow, this bow belongs to the same God.

During the lunar eclipse and solar eclipse, when children want to know about the lunar eclipse and the solar eclipse from the elderly of the house, they are told that the monster named Rahu swallows the Sun God and the Moon, then the eclipse seems to be eclipse. Fasting time, donate plenty of charity Only then will the sun and moon god get rid of this monster's clutches as quickly as possible. Thousands of unscientific principles are unknowingly set in the minds of the children.

When children go to school, they are taught science, but by the first master only lies in the minds of the children, that they do not understand the truth of science. To pass the exam, children cry out in the books. And the exam passes well by good numbers but due to the lies sitting in the mind, do not believe in things written in school books.

I have met many well-educated and educated people who, even after being written, are superstitious people of unscientific thinking. I met a lawyer who was saying that there were big and curly hair since the birth of our baby. I did not want curd hairy hairy haircut but had to be done because the temples did not go to the temple with the impure hair of the time of birth until it was not shaved. I questioned the lawyer sahib that even after having written so much, even if you believe in profanity and despair, then he started saying that the words written in the Ramayana Mahabharata Ved Puranas do not go wrong.

I have also met people of BJP who are well-educated but are also superstitious people of unscientific thinking.

Mahesh Chandra Sharma, former Judge of Rajasthan High Court, has said anything about the peacock. That's the thing I've heard from thousands of people. Clearly, all those thousands of people do not want to make the country a Hindu nation. Mourni is pregnant by drinking peeps of tears, even though this thing is wrong and unscientific. But millions of people in this country consider it right and true, and will continue to believe it until they get convincing proof that pearl is pregnant with the combination of peacocks, peacocks like other animals.

Written By:- Mr.Bholaram Ahirwar

Tuesday, 6 March 2018

भारत में दोहरी शिक्षा नीति से गुलाम बनाने की साजिश

जय भीम

शिक्षा के लिए संघर्ष
 दोहरी शिक्षा नीति
भारत में दोहरी शिक्षा नीति से गुलाम बनाने की साजिश 

हमारे भारत देश में बहुजन समाज (SC ST OBC) के लोगों को मनुस्मृति काल के समय में पढ़ने लिखने का अधिकार नहीं था और न ही इंसान होने के अधिकार थे, लेकिन हमारे बहुजन महापुरुषों ने समय-समय पर तमाम बहुजन समाज के संतों गुरु महापुरुषों ने संघर्ष किया विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता माता सावित्री फुले के त्याग और बलिदानों की वजह पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए पढ़ने लिखने के दरबाजे खुले इसी वजह से सरदार पटेल और डॉ अम्बेडकर जैसे पिछड़े वर्ग के व्यक्ति शिक्षित हो सके ।

  राष्ट्रपिता महात्मा  फुले ने कहा था:-

          “ विद्या बिन मति गई
             मति बिन निति गई
             निति बिन गति गई
              गति बिन धन गया
            धन बिन शुद्र पतित हुए
     यह  अनर्थ अविद्या के कारण हुआ ”  
जुलाई 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ
हमारे देश से 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर चले गये इसके बाद ,इस देश के दलित शोषित पीड़ित समाज आर्थिक रूप से कमजोरों की किस्मत लिखने का मौका संविधान के रूप में डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर को मिला।
बाबा साहब ने संविधान के अनुच्छेद Article 14 के अंतर्गत भारत के सभी नागरिकों को  समानता का अधिकार दिया तथा अनुच्छेद Article 19 में स्वतंत्रता का अधिकार मिला था ।


बहुजनों को शिक्षा से दूर करने का षड्यंत्र:-

 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद बहुजन समाज को विशेषरूप से पढ़ने लिखने का मौका मिला ,बहुजन समाज के खासकर SC ST OBC शिक्षा के क्षेत्र में आगे निकलने लगे तथा नौकरी पेशा करने लगे।
लेकिन इस देश के जो 15 % मनुवादी ब्राह्मण बनिया ठाकुर के लोगों को बहुजन समाज के SC ST OBC को पढ़ना लिखना आगे बढ़ना अच्छा नहीं लगा क्योंकि उन्हें डर था ,कि अगर ये लोग इसी तरह पढ़ लिख कर आगे बढ़ने लगे तो ,वह दिन दूर नहीं जब ये लोग हमारी बराबरी कर लेंगे।
इन मनुवादियों की इसी असमानता वाली सोच के कारण इन 15 % मुट्ठीभर लोगों ने बहुजन समाज को शिक्षा से दूर करने के लिए दोहरीकरण की शिक्षा नीति अपनाई और शिक्षा को दो भागों में बांट दिया गया ।
1.निजी स्कूल (Private School)
2.सरकारी स्कूल (Goverment School)

1.निजी स्कूल (Private School):-


Private Schools
Private School

निजी स्कूल Private School एक ऐसी शिक्षा जिसमें बेहतर से बेहतर शिक्षा सुविधाएं तैयार की गई, जिसका केंद्रीय बोर्ड (Central Board CBSC)  होता है इन स्कूलों की फीस 25-50  हजार से ज्यादा फीस लगती है जिन लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है वही इन स्कूलों में शिक्षा के लिए भेजते है और इन स्कूलों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाता है इन स्कूलों में बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी जाती ,ताकि वह भविष्य में कुछ कर सकें ज्यादातर स्कूलों में 15% मनुवादी मुट्ठीभर  लोगों के बच्चे इन निजी स्कूलों में पढ़ पाते हैं इन निजी स्कूलों  Private School में IAS IPS से लेकर  बड़े से बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते तथा उनका भविष्य सुरक्षित रहता है ।
2.सरकारी स्कूल (Goverment School)
Government School
सरकारी स्कूल

आज सरकारी स्कूलों की हालत बहुत ज्यादा खराब हुई है सरकारी स्कूलों में बहुजन समाज के बच्चों को शिक्षा के नाम पर भीख दी जा रही है यहां स्कूलों को सरकारी  ढाबा बनाकर रख दिया गया ,इन सरकारी स्कूलों में हमारे बच्चों  के हाथ में  स्लेट के बदले प्लेट और कटोरा थमा दिया जा रहा है।

इन सरकारी स्कूलों में साईकिल मिलती है,किताबें मिलती हैं ,छात्रवृत्ति मिलती है ,मिलती नहीं तो शिक्षा नहीं मिलती है  इन स्कूलों में शिक्षा के नाम पर बहुजन समाज के बच्चों को  बहुत बड़ा धोखा दिया जा रहा है,सरकारी स्कूल में शिक्षित होने की जगह सिर्फ साक्षर बना रहे हैं।
राज्य सरकारों ने नियम लागू किया कि पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को बिना पढ़े लिखे फ्री में पास कर दिया जाए ।  लेकिन जब यह बच्चे पहली से आठवीं तक बिना पढ़े लिखे पास हो गए तो बच्चें   अज्ञान और   परिणाम स्वरुप 9वीं 10वी में बच्चे फेल हो जाएंगे ।
इन सरकारों ने हमारे बहुजन समाज के बच्चों को गुलाम तथा ज्ञान बनाने की बहुत बड़ी साजिश की जा रही है यह बात हमें बहुत गंभीरता से सोचना और समझना पड़ेगा।

आज इसी नीति के कारण 90% से ज्यादा बच्चे 9वीं और 10वीं में फेल हो रहे हैं क्योंकि इनकी नींव कमजोर की जा रही है, हमारे अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग,तथा अल्पसंख्यक(मुस्लिम सिख बौद्ध) आर्थिक रूप से कमजोर के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की हैसियत नहीं है।
आज इसी नीति के कारण 9वीं तथा 10वीं फेल होने के बाद काम के लिए हमारे समाज के ज्यादातर युवा पलायन होने पर मजबूर है, पहले खेतो में बंधुआ मजदूरी करते थे, आज फ़ैक्टरियों में बंधुआ मजदूरी करते है।
आप लोग इस बात से समझ सकते हैं कि जिन सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाला मास्टर का बेटा बेटी सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ता,बल्कि निजी स्कूल Private School में पढ़ाता है आप लोग इस स्थिति से समझ सकते हैं ।
आज जो 10% बच्चे पास होते वे 12वीं के बाद उन्हें उन CBSE के बच्चों से कॉन्पिटिशन करना पड़ता,और वो पीछे रह जाते अगर बहुजन समाज के विशेष-कर SC ST OBC उच्च शिक्षा तक पहुंच भी जाएं तो उनको नौकरी नहीं मिल पाती है आज BA,MA,PHD,Engineer, Pharmacy करने वाले  युवा नौजवान बेरोज़गारी के शिकार है,अगर 5%भी आगे बढ़ गए Higher education तक पहुँच गये या job नौकरी करने तो इन 15%लोगों को आँख में चुभने लगते है और जातिवादी घिनोनी मानसिकता के कारण शासन प्रशाशन द्वारा परेशान किया जाता है ,यही कारण है कि आत्महत्या,अन्याय ,अत्याचार और जातिवादी मानसिकता के कारण शिकार होना पड़ता है
ये कांग्रेस बीजेपी की सरकार है इनकी नियत ठीक नहीं है इस देश के जो SC,ST,OBC, Majority(मुस्लिम,सिख,ईसाई,बौद्ध)तथा आर्थिक रूप से कमजोर समाज के लोगों को गुलाम बनाने की बहुत बड़ी साजिश हो रही है।

समाधान:-  अगर आप समाधान करना चाहते हो हमें बाबा साहब की बात माननी पड़ेगी ।
बाबा साहेब ने कहा था-
हे मेरे बहुजन समाज के लोगों अगर आप अपने मुक्ति के द्वार खोलना चाहते हो, दुख तकलीफों से मुक्ति चाहते हो तो उस सत्ता के मंदिर पर कब्जा करो और अपना हक अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ो “

जय भीम      जय कांशीराम       जय भारत