Tuesday, 6 March 2018

भारत में दोहरी शिक्षा नीति से गुलाम बनाने की साजिश

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जय भीम

शिक्षा के लिए संघर्ष
 दोहरी शिक्षा नीति
भारत में दोहरी शिक्षा नीति से गुलाम बनाने की साजिश 

हमारे भारत देश में बहुजन समाज (SC ST OBC) के लोगों को मनुस्मृति काल के समय में पढ़ने लिखने का अधिकार नहीं था और न ही इंसान होने के अधिकार थे, लेकिन हमारे बहुजन महापुरुषों ने समय-समय पर तमाम बहुजन समाज के संतों गुरु महापुरुषों ने संघर्ष किया विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता माता सावित्री फुले के त्याग और बलिदानों की वजह पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए पढ़ने लिखने के दरबाजे खुले इसी वजह से सरदार पटेल और डॉ अम्बेडकर जैसे पिछड़े वर्ग के व्यक्ति शिक्षित हो सके ।

  राष्ट्रपिता महात्मा  फुले ने कहा था:-

          “ विद्या बिन मति गई
             मति बिन निति गई
             निति बिन गति गई
              गति बिन धन गया
            धन बिन शुद्र पतित हुए
     यह  अनर्थ अविद्या के कारण हुआ ”  
जुलाई 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ
हमारे देश से 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज भारत छोड़कर चले गये इसके बाद ,इस देश के दलित शोषित पीड़ित समाज आर्थिक रूप से कमजोरों की किस्मत लिखने का मौका संविधान के रूप में डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर को मिला।
बाबा साहब ने संविधान के अनुच्छेद Article 14 के अंतर्गत भारत के सभी नागरिकों को  समानता का अधिकार दिया तथा अनुच्छेद Article 19 में स्वतंत्रता का अधिकार मिला था ।


बहुजनों को शिक्षा से दूर करने का षड्यंत्र:-

 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद बहुजन समाज को विशेषरूप से पढ़ने लिखने का मौका मिला ,बहुजन समाज के खासकर SC ST OBC शिक्षा के क्षेत्र में आगे निकलने लगे तथा नौकरी पेशा करने लगे।
लेकिन इस देश के जो 15 % मनुवादी ब्राह्मण बनिया ठाकुर के लोगों को बहुजन समाज के SC ST OBC को पढ़ना लिखना आगे बढ़ना अच्छा नहीं लगा क्योंकि उन्हें डर था ,कि अगर ये लोग इसी तरह पढ़ लिख कर आगे बढ़ने लगे तो ,वह दिन दूर नहीं जब ये लोग हमारी बराबरी कर लेंगे।
इन मनुवादियों की इसी असमानता वाली सोच के कारण इन 15 % मुट्ठीभर लोगों ने बहुजन समाज को शिक्षा से दूर करने के लिए दोहरीकरण की शिक्षा नीति अपनाई और शिक्षा को दो भागों में बांट दिया गया ।
1.निजी स्कूल (Private School)
2.सरकारी स्कूल (Goverment School)

1.निजी स्कूल (Private School):-


Private Schools
Private School

निजी स्कूल Private School एक ऐसी शिक्षा जिसमें बेहतर से बेहतर शिक्षा सुविधाएं तैयार की गई, जिसका केंद्रीय बोर्ड (Central Board CBSC)  होता है इन स्कूलों की फीस 25-50  हजार से ज्यादा फीस लगती है जिन लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है वही इन स्कूलों में शिक्षा के लिए भेजते है और इन स्कूलों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाता है इन स्कूलों में बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी जाती ,ताकि वह भविष्य में कुछ कर सकें ज्यादातर स्कूलों में 15% मनुवादी मुट्ठीभर  लोगों के बच्चे इन निजी स्कूलों में पढ़ पाते हैं इन निजी स्कूलों  Private School में IAS IPS से लेकर  बड़े से बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते तथा उनका भविष्य सुरक्षित रहता है ।
2.सरकारी स्कूल (Goverment School)
Government School
सरकारी स्कूल

आज सरकारी स्कूलों की हालत बहुत ज्यादा खराब हुई है सरकारी स्कूलों में बहुजन समाज के बच्चों को शिक्षा के नाम पर भीख दी जा रही है यहां स्कूलों को सरकारी  ढाबा बनाकर रख दिया गया ,इन सरकारी स्कूलों में हमारे बच्चों  के हाथ में  स्लेट के बदले प्लेट और कटोरा थमा दिया जा रहा है।

इन सरकारी स्कूलों में साईकिल मिलती है,किताबें मिलती हैं ,छात्रवृत्ति मिलती है ,मिलती नहीं तो शिक्षा नहीं मिलती है  इन स्कूलों में शिक्षा के नाम पर बहुजन समाज के बच्चों को  बहुत बड़ा धोखा दिया जा रहा है,सरकारी स्कूल में शिक्षित होने की जगह सिर्फ साक्षर बना रहे हैं।
राज्य सरकारों ने नियम लागू किया कि पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को बिना पढ़े लिखे फ्री में पास कर दिया जाए ।  लेकिन जब यह बच्चे पहली से आठवीं तक बिना पढ़े लिखे पास हो गए तो बच्चें   अज्ञान और   परिणाम स्वरुप 9वीं 10वी में बच्चे फेल हो जाएंगे ।
इन सरकारों ने हमारे बहुजन समाज के बच्चों को गुलाम तथा ज्ञान बनाने की बहुत बड़ी साजिश की जा रही है यह बात हमें बहुत गंभीरता से सोचना और समझना पड़ेगा।

आज इसी नीति के कारण 90% से ज्यादा बच्चे 9वीं और 10वीं में फेल हो रहे हैं क्योंकि इनकी नींव कमजोर की जा रही है, हमारे अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग,तथा अल्पसंख्यक(मुस्लिम सिख बौद्ध) आर्थिक रूप से कमजोर के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की हैसियत नहीं है।
आज इसी नीति के कारण 9वीं तथा 10वीं फेल होने के बाद काम के लिए हमारे समाज के ज्यादातर युवा पलायन होने पर मजबूर है, पहले खेतो में बंधुआ मजदूरी करते थे, आज फ़ैक्टरियों में बंधुआ मजदूरी करते है।
आप लोग इस बात से समझ सकते हैं कि जिन सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाला मास्टर का बेटा बेटी सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ता,बल्कि निजी स्कूल Private School में पढ़ाता है आप लोग इस स्थिति से समझ सकते हैं ।
आज जो 10% बच्चे पास होते वे 12वीं के बाद उन्हें उन CBSE के बच्चों से कॉन्पिटिशन करना पड़ता,और वो पीछे रह जाते अगर बहुजन समाज के विशेष-कर SC ST OBC उच्च शिक्षा तक पहुंच भी जाएं तो उनको नौकरी नहीं मिल पाती है आज BA,MA,PHD,Engineer, Pharmacy करने वाले  युवा नौजवान बेरोज़गारी के शिकार है,अगर 5%भी आगे बढ़ गए Higher education तक पहुँच गये या job नौकरी करने तो इन 15%लोगों को आँख में चुभने लगते है और जातिवादी घिनोनी मानसिकता के कारण शासन प्रशाशन द्वारा परेशान किया जाता है ,यही कारण है कि आत्महत्या,अन्याय ,अत्याचार और जातिवादी मानसिकता के कारण शिकार होना पड़ता है
ये कांग्रेस बीजेपी की सरकार है इनकी नियत ठीक नहीं है इस देश के जो SC,ST,OBC, Majority(मुस्लिम,सिख,ईसाई,बौद्ध)तथा आर्थिक रूप से कमजोर समाज के लोगों को गुलाम बनाने की बहुत बड़ी साजिश हो रही है।

समाधान:-  अगर आप समाधान करना चाहते हो हमें बाबा साहब की बात माननी पड़ेगी ।
बाबा साहेब ने कहा था-
हे मेरे बहुजन समाज के लोगों अगर आप अपने मुक्ति के द्वार खोलना चाहते हो, दुख तकलीफों से मुक्ति चाहते हो तो उस सत्ता के मंदिर पर कब्जा करो और अपना हक अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ो “

जय भीम      जय कांशीराम       जय भारत

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