Friday, 29 June 2018

बहुजन समाज के लोगों को सावधान रहने की क्यो है जरूरत....

बहुजन समाज के लोगों को सावधान रहने की क्यो है जरूरत....

मनुवादी पार्टियां
मनुवादी पार्टिया

जय भीम
   2019 का  लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है  जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहा है ,BJP ,RSS के नेताओं की जुबान मीठी होती जा रही है,प्रधानमंत्री जी संत कबीर जयंती मना रहे है,जिन संत कबीर की विचारधारा से कोई मतलब नहीं रहा वो संत कबीर जयंती मना रहे है ।  असल में यह लोग SC, ST, OBC, तथा धार्मिक अल्पसंख्यक ,मुसलमान, सिक्खों ,ईसाई, बौद्धों को खुश करना चाह रही हैं ,ताकि जिससे Bahujan Samaj के लोग 2019 के लोकसभा Election में वोट डाल दें ।
अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह जी का बयान आया है कि “ अगर कोई आरक्षण आपसे छीने, तो थप्पड़ मार कर वापस ले लो “   ऐसे बयान क्यों आया क्योंकि SC ST तथा OBC बहुजन समाज के लोग हैं ऐसे बयान सुनकर गदगद हो जाये ।
 यह समय चुनावी समय है इसलिए BJP RSS के नेताओं के बहुजन समाज को खुश करने के लिए कई ऐसे बयान आएंगे, और आप कहेंगे कि वाह !क्या बात है हमें आंख कान खोलकर ऐसे Statements से बच के रहना होगा क्योंकि यह BJP RSS के इशारे पर ऐसे बयानबाजी की जाएंगी , ऐसे कई बयान मुद्दे सामने लाकर भड़काने,बहकाने की कोशिश की जाएगी ताकि हम लोग बहक जाएं और BJP तथा मनुवादी पार्टियों को Vote कर दें ।

हिन्दू मुस्लिम के चक्कर में न फसे :-

हमें हिंदू मुस्लिम के नाम पर भड़काया, बहकाया जाएगा ,इससे सावधान रहने की जरूरत है,  आप कभी हिंदू मुस्लिम के चक्कर में न रहे क्योंकि चुनाव आने पर आपको हिन्दू बना दिया जाता है ,और जब चुनाव खत्म होता है तो हमें चमार,भंगी ,बसोर,अहीर,गड़रिया नाई, धोबी,तेली ,तमोली,आदि आदि जातियों में बांट दिए जाते है ।
हमें हमेशा ध्यान रहे की मुसलमान हमारे कभी दुश्मन नहीं रहे, उन्होंने समय-समय पर हमारे महापुरुषों की मदद की है कभी भी किसी मुस्लिम ने हमारे Reservation का विरोध नहीं किया कभी भी किसी मुस्लिम ने हमारे ऊपर अन्याय अत्याचार नहीं किए , असल में मुसलमान इस देश का मूल निवासी है हमारा और मुसलमानों का खून एक ही है ।
 ये अन्याय अत्याचार BJP RSS के इशारे पर सवर्ण समाज के लोग करते हैं , मुस्लिम ने कभी भी हमारा शोषण नहीं किया , मुसलमान हमारे कभी दुश्मन नहीं रहे  हमें कभी भी हिंदू मुस्लिम या किसी प्रकार से जो हमें और मुसलमानों को अलग रखता है कभी भी SC ST तथा OBC को शामिल नहीं होना चाहिए ।

मनुवादी पार्टियों के बहकाबे न आये:-

इस बार किसी भी तरह BJP RSS तथा मनुवादी पार्टियों को सत्ता से बाहर करना होगा और बहुजन समाज के युवाओं को यह जिम्मा अपने ऊपर लेना होगा क्योंकि इस देश का नौजवान ही इस देश में परिवर्तन ला सकता है , हमें किसी भी हालत में BJP , Congress तथा Communist तथा और जो पार्टियां जिनकी Leadership सवर्णों के हाथ में है , तथा तमाम जो ब्राह्मणवादी Political Party हैं उनके बहकावे में नहीं आना है ।
  अगर हम कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जिसने मनुवाद ब्राह्मणवाद को इस देश में कायम कर रखा है,  मान्यवर कांशीराम साहब कांग्रेस को नागनाथ तथा बीजेपी को सांपनाथ कहा करते थे,ये एक A Team है दूसरी B Team है इसलिए बीजेपी कांग्रेस के खेल को हमें समझना चाहिये,और अगर हम कम्युनिस्ट पार्टियों की बात करें तो यह भी मनुवादी विचारधारा की पार्टियां हैं, कम्युनिस्ट धर्म को अफीम कहते हैं लेकिन इनके दिमाग में जनेऊ  छिपा रहता है , इनकी Leadership केवल सवर्णो के हाथ में है और ऐसी विचारधारा वाले लोग बहुजन समाज का कभी भला नहीं कर सकते ,हमें इनके इस खेल को भी अच्छी तरह से अपनी बुद्धि विवेक तथा तर्क से इनके इस System को समझना पड़ेगा ।
बहुजन समाज की पार्टियों को एक होना पड़ेगा :-
बहुजन पार्टिया
Bahujan Samaj Political Party

देश की बहुजन समाज की जितनी भी पार्टियां हैं उन्हें एक होना होगा देश में BJP को केंद्र तथा राज्य  से बाहर करने के लिए बहुजन समाज की जितनी भी पार्टियां हैं इनको एक होना पड़ेगा तथा तीसरा मोर्चा बनाकर इनको चुनावी मैदान में उतरना होगा ,अगर ऐसा करने में असफल हुए तो आने वाले समय में बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न होगी,  अगर 2019 के Election में BJP ने पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली तो बहुजन समाज का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा इसलिए अपने अस्तित्व को बचाने के लिए हमें एक होने की जरूरत है, हमें अपने आपस के मतभेदों से ऊपर उठकर बहुजन समाज के बारे में सोचना होगा ,तभी हम इस देश में अपनी सत्ता कायम कर सकते हैं तथा Bahujan Society तथा सर्व समाज का उद्धार हम कर सकते हैं ।
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Monday, 11 June 2018

मानवता के लिए आखिर बुद्ध धम्म ही क्यों ?

         मानवता के लिए आखिर बुद्ध धम्म ही क्यों ?

साथियों को जय भीम
उजाले की ओर का Part--5 लिख रहा हूं पिछला जो Part -5 था आप लोगों ने 1200 से ज्यादा बार और शेयर किया इसके लिए सभी साथियों को बहुत-बहुत धन्यवाद , आप उजाले की ओर का Part 5  है जिसका topic है मानवता के लिए आखिर बुद्ध धम्म ही क्यों ?
आप सभी Reads से Request है कि यह लेख अच्छा लगे तो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करके इस लेख को  पहुंचाए
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महात्मा बुद्ध
तथागत गौतम बुद्ध 

भगवान गौतम बुद्ध :-

बौद्ध धर्म के संस्थापक (Founder) भगवान गौतम बुद्ध थे, इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था ,गौतम बुद्ध को एशिया का ज्योति पुंज Light of Asia कहा जाता है । गौतम बुद्ध का जन्म 544 ईशा पूर्व में  कपिलवस्तु के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था । इनके पिता शुद्धोधन शाक्य  गणराज्य के मुखिया थे । इनकी माता का नाम महामाया था । सिद्धार्थ के जन्म के 7वें दिन महामाया की मृत्यु (Death) हो गई थी ,उनका लालन-पालन उनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया  जिनके साथ शुद्धोधन ने दूसरा विवाह कर लिया था ,गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की आयु में यशोधरा के साथ हुआ इनके पुत्र का नाम राहुल था । सांसारिक समस्याओं से दुखी होकर सिद्धार्थ में 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग कर सन्यास धारण किया और 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात को पीपल के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गये और जिस स्थान पर ज्ञान प्राप्त हुआ था वह स्थान बोधगया कहलाया ।

तथागत गौतम बुद्ध का उपदेश :-

 भगवान गौतम बुद्ध ने उपदेश दिया है कि हमें किसी भी पवित्र बात को इसलिए नहीं माननी चाहिए कि वह वेदों में लिखी है, हमें कोई बात को इसलिए भी नहीं माननी चाहिए कि वह बात तुम्हें तुम्हारे गुरु ने बताई है, क्योंकि लोगों की गुरु  के प्रति श्रद्धा (Reverence) होती है , किसी बात को इसलिए भी नहीं माननी चाहिए कि वह बात पुराने समय से चली आ रही है, और लोग उसे सही मानते हैं भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों से यह भी कहा कि किसी भी बात को इसलिए नहीं माननी चाहिए कि  मैं कह रहा हूं , क्योंकि मेरे प्रति भी तुम्हारे मन में आदर और श्रद्धा (Reverence) है, किसी बात और विचार (Thought) को मानने से पहले उसे अपनी बुद्धि और विवेक से अच्छी तरह से जांच और परख लेनी चाहिए । जब लगे की कोई विचार सबके हित का है तब ही उस विचार को मानना चाहिए।
 भगवान गौतम बुद्ध ने लोगों को मध्य मार्ग की शिक्षा दी व्यक्ति को न तो अपने शरीर को बहुत ज्यादा यातना (Torture) देनी चाहिए और न ही उसे विलासिता पूर्ण (Full of luxury) जीवन में डूबना  चाहिए । यह मध्य मार्ग अष्टांगिक मार्ग कहलाता है, भगवान बुद्ध इस सिद्धांत को नहीं मानते थे ,कि किसी ईश्वर ने आदमी का निर्माण किया है अथवा वह ब्रह्मा के शरीर का अंश है भगवान बुद्ध वेदों द्वारा निर्मित चातुर्वर्ण्य व्यवस्था (Intricate system) को नहीं मानते थे।

भगवान बुद्ध ने बिना किसी भेदभाव की दी दीक्षा :-

 भगवान बुद्ध के उपदेशों का उस समय के जनमानस पर बहुत तेजी से Effect पड़ा, भगवान बुद्ध ने अपने धम्म में जहां एक तरफ उस समय के राजाओं शासकों को जगह दी दूसरी तरफ नाई भंगी चांडालों अछूतों और स्त्रियों को भी जगह दी ।
भगवान गौतम बुद्ध के धम्म से प्रभावित होकर मगध नरेश विम्बिसार गौतम बुद्ध की शरण में गये तथा बौद्ध धम्म के उपासक बन गए तथा कौशल नरेश प्रसन्नजीत भी भगवान बुद्ध से प्रभावित होकर बुद्ध धम्म के उपासक बन गये । उस समय के कई राज्यों के शासक बुद्ध धम्म से प्रभावित  होकर बौद्ध धम्म के उपासक बन गये । उस समय के कई राज्यों के शासकों ने बौद्ध धम्म ग्रहण किया । राजाओं और शासकों ने ही नहीं आम जनता (General public) को भी भगवान बुद्ध ने अपने धम्म में दीक्षित किया । भगवान तथागत गौतम बुद्ध स्त्रियों और पुरुषों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं मानते थे । भगवान तथागत का मानना था कि पुरुषों की तरह स्त्रिया भी निर्वाण (Nirvana) प्राप्त कर सकती हैं । महाप्रजापति गौतमी पहली महिला थी , जिन्हें तथागत भगवान बुद्ध ने सबसे पहले धम्म में दीक्षा दी ।
  भगवान तथागत बुद्ध ने किसी भी जाति या वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया, नाई जाति के उपाली को तथागत ने भिक्षु संघ में दीक्षित किया इसके अलावा भंगी समाज के भंगी सुणीत को भी तथागत ने भिक्षु संघ में दीक्षित किया । सोपाक तथा सुपित्य नाम की अछूतों (Untouchables) को तथागत ने बिना किसी भेदभाव के भिक्षु बनाकर भिक्षु संघ में जगह दी ब्राह्मणों को भी भगवान बुद्ध ने बिना भेदभाव की भिक्षु संघ में दीक्षित किया ।

सम्राट अशोक ने World में फैलाया Unleashed बुद्ध का संदेश :-

सम्राट अशोक के शासनकाल में बुद्ध धम्म विदेशों में फैल गया, सम्राट अशोक ने अपने दूतों और धर्मप्रचारकों को सीरिया, मिश्र, मैसिडोनिया, साइरीन, आदि देशो में भेजा, जो तथागत बुद्ध के संदेश (Massage) और सम्राट की शुभकामनाओं को लेकर पहुंचे। सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र तथा बेटी संघमित्रा को मध्य एशिया तथा श्रीलंका में बुद्ध का संदेश लेकर भेजा और श्रीलंका वासियों ने बुद्ध धर्म को अपनाया । लगभग पूरे भारत में बौद्ध धम्म तेजी से फैल चुका था , इसका नतीजा यह हुआ कि लोग शाकाहारी बन गए शराब पीने से लोग बचने लगे यज्ञों में पशुओं का बलिदान रोक दिया गया । अक्सर ब्राह्मण लोग ही वैदिक धर्म (Vedic religion) का पालन करते थे, इसलिए वैदिक धर्म को ब्राह्मण धर्म कहा जाने लगा ।

ब्राह्मणों ने बुद्ध धम्म को बांटा :-

   लगभग पूरे देश की जनता बुद्ध धम्म को स्वीकार कर चुके थी यहां तक कि ब्राह्मण भी बौद्ध  धम्म के अनुयाई बन गये थे , कुछ ब्राह्मणों ने पूरे मन से बुद्ध धम्म अपनाया लेकिन कुछ ब्राह्मणों ने प्रथम सतावदी (First ever) में हुई चौथी बौद्ध संगति में महायान संप्रदाय बनाकर ,भगवान बुद्ध को विष्णु का अवतार घोषित कर भ्रामक कर बौद्ध धम्म को भारी नुकसान पहुँचाया । जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया के पेज क्रमांक 220 में लिखा है कि “ आदि शंकराचार्य ने भारत में व्यापक धर्म (Broad religion) के रूप में बुद्ध मत का अंत करने में मदद Help की, और इसके बाद ब्राह्मण धर्म ने बौद्ध मत को भाई की तरह गले लगा कर अपने में मिला लिया यही बुद्ध धम्म के पतन का मुख्य कारण है “

बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि बुद्ध का धम्म भारत में ही उत्पन्न (Generate) हुआ है, कई शताब्दियों तक बुद्ध धम्म भारत के लोगों का धर्म रह चुका है, बुद्ध धम्म संसार में एक ऐसा धर्म है, जो मनुष्य को बुद्धि की किसी धर्म ग्रंथ, मसीहा या धर्म गुरुओ के उपदेशों की खूंटी से नहीं बांधता बुद्ध धम्म मनुष्य को अपनी बुद्धि और विवेक (Intelligence and discretion) से सोचने समझने की स्वतंत्रता और शक्ति देता है । बुद्ध धम्म की सबसे बड़ी विशेषता उसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण है, बुद्ध धम्म परलोकवाद , ईश्वरवाद और आत्मा की सत्यता में यकीन नहीं करता । संसार में फैले अनगिनत धर्मों में से बुद्ध धम्म अपनी अलग छवि रखता है और यह छवि बुद्ध के वैज्ञानिक दृष्टिकोण (scientific approach) में हैं ।


  1. यह भी पड़े:- Must read-How and when to become Hindus

Monday, 4 June 2018

Must read-How and when to become Hindus

How and when to become Hindus

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Must read-How and when to become Hindus

In the ancient religious literature of India, the word Hindu is not written anywhere. Brahmin literature (Vedic literature) Buddhist literature or Jain literature, in all these ancient and religious literature, the old word which is found in relation to religion, is the word Arya.
According to Jawaharlal Nehru, the old broad word for religion or religion is found in India (Arya Dharma) that all the thoughts come within the Aryan religion, which has its origin in India. Whether they are Vedic, whether or not Buddhism, even if it is the opinion of the Jains. The word 'Aya' has also been used by the Buddhists and the Jains. Buddha always used the path of his salvation to be called Arya Marg. "
Vedic religion "or" Brahmin religion "is used for the moral teachings and practices of those who are believed to be based on the Vedas. In this way all those people who generally consider Vedas as proof books are called Vedic religion or Brahmin religion. Similarly, Lord Gautam Buddha's teachings and teachings are believed to be worshipers and Buddhist monk Buddhist sect or Buddhist dhamma. Similarly, people who believe in the teachings and teachings of Lord Mahavir Swami (Nigthanthnath's son) are called people of Jain religion. Scientific evidence to believe that the person teaching the other gurus of Sikhism are called to follow Sikhism Hindu word is a foreign word. Foreign Muslims had given this name to the residents of India.
The people of West and Central Asia used the word Hindu for the people of India but for those settling across the Shindu river. The word Hindu is apparently derived from the word Sindhu. Hindus and Hindus are formed by this word of Sindhu, Hindus do not mean people who believe in a particular religion, but those who live across the Shindhu river are living across the Sindhu river, meaning Vedic, Jain, The people of Buddhist and Sikh sects believe in it. In India, people of Western and Central Asia used to call Hindus who believe in all these Panths.
In the Indian Constitution there is a clear interpretation of Hindu words and Hinduism. Under the Explanation 2 of Article 25 of the Constitution, the person who believes in Vedic, Sikh, Jain and Buddhism is Hindu, and instructions for the religious institutions of Hindus will be imposed by the institutions of Vedic, Sikh, Jain and Buddhist religions. Article 25 of the Indian Constitution and it is clear from the historical facts that Hinduism is a Hindu family of four religions, Vedic religion, Sikh religion, Jainism and Buddhism.
Vedic religion was also called Brahmin religion even during the Buddhist and in later times. Because Brahmin religion has been given priority and Brahmin is promoted and promoted by the Brahmins. Hindu Marriage Act, Hindu Succession Act and Hindus All the laws that have been made for them (Brahmin religion, Buddhist religion, Jainism, and Sikh religion) are those who believe in these four religions and According to the Constitution, people who celebrate these four religions are Hindus. But when the country's government is making census at the time of census, only people who believe in Brahmin religion (Vedic religion) in the census of Hindus Census of Hindus who consider Buddhist, Sikh and Jain cult is not done in Hindus.
The staff involved in the census ask questions to the people, tell them that you believe that religion, Hindu, Muslim, Sikh, Christian, Buddhist or other religion, in these religions. While on the basis of Indian constitution and historical facts, people should be questioned at the time of census, if you believe in Hinduism, then which cult you consider, because Hindus are Brahmin creed, Jain sect, Sikhism, Buddhist cult People who believe in the four creed are called.But obviously the census workers do not take different information of the sects of Hindu religion, they are those who believe in Brahmin religion.
People who believe in Hinduism write census and people of Jain, Buddhist and Sikh castes do census separately from the Hindus. This is because during the census of the country, most of the Brahmins still remain in the government positions. is . Brahmin is sitting on the top of the power and so far the Brahmins sit in the country. Policy makers in the country are mostly Brahminical people. That is why these Brahminical politicians propagate Brahminism as Hinduism and Brahmin religion as Hindu religion. So that the fatal Brahminism for the country and humanity can not weaken from the country.
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