Saturday, 28 July 2018

मायावती जी की PM की दावेदारी पक्की

       मायावती जी की PM की दावेदारी पक्की

Mayawati ji Next PM
Mayawati ji

2019 Election जैसे-जैसे करीब आ रहा है बीजेपी के खिलाफ 2019 में सत्ता से बाहर निकालने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना Start हो गया है ऐसे में बीजेपी के खिलाफ सबसे मजबूत पक्ष और PM की उम्मीदवार के रूप में Bahujan Samaj Party राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी सबसे पहले नाम हैं , ऐसा इसलिए है क्योंकि BJP का तंबू अगर कोई उखाड़ने में सक्षम है तो वो बहनजी ही हैं , और PM पद के लिए बहन की सबसे बड़ी उम्मीदवार है उनके अलावा देश में Modi Ji की टक्कर में कोई भी नेता नहीं है और BJP की शासन व्यवस्था से पूरा देश परेशान है ।
और बहन जी की शासन व्यवस्था की बात करें तो भारत के सबसे बड़े राज्य Uttarpradesh में 4 बार शासन करने का उनके पास बहुत अच्छा अनुभव है और उनकी सरकारों में कानून व्यवस्था का कायम होना मजबूत होना किसी से छुपा नहीं है , ऐसे में बहन जी की PM पद की दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत हो जाती है, Congress तथा अन्य विपक्षी दलों जो BJP को सत्ता से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं वो बिना बहन जी के संभव नहीं है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी का देश में लोकसभा में एक भी सांसद न होते हुए भी लगभग 15% वोट तथा उत्तर प्रदेश में 19% वोट है , तथा BSP के समर्थन के बिना केंद्र Central में किसी की सरकार बनना Possible नहीं हैं ।
हाल ही में हुए SP BSP के Allince इस बात को साबित करता है कि बहुजन समाज पार्टी का जिस भी पार्टी से गठबंधन हुआ पार्टी की जीत निश्चित है ।
EX:- 1 अभी उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा के उपचुनाव By-election में BSP ने SP का चुनाव में समर्थन किया उसमें उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र में तथा Dupty CM केशव प्रसाद मौर्य के लोकसभा क्षेत्र में BJP को करारी हार का सामना करना पड़ा तथा बाद में एक और उपचुनाव में BJP की हार हुई ।
EX:- 2. अप्रैल मई में हुए कर्नाटक के Election में BSP और JDS का गठबंधन हुआ जो पार्टी JDS खत्म होने के कगार पर थी उस पार्टी को BSP ने 38 सीट जितायी तथा किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण कांग्रेस को घुटनों पर आकर JDS को समर्थन दे दिया तथा JDS का CM कुमार स्वामी को बनाया तथा वहां BSP का एक MLA Minister  बना ।

हाल ही में ताजा Example से यह बात साबित होती है कि बिना BSP की किसी भी पार्टी को सत्ता हासिल नहीं हो सकती है और बहन कुमारी मायावती जी प्रधानमंत्री पद की सबसे बड़ी दावेदार है , कुछ दिन पहले में National Dastak कि एक Video Clip देख रहा था उस वीडियो क्लिप में नेशनल दस्तक के संपादक पत्रकार शंभू कुमार सिंह जी वीडियो में उनका बयान सुना उन्होंने BSP के बारे में कहा कि “ अगर BSP उत्तर प्रदेश को छोड़कर 28 राज्यों में 5-5 सीटों पर गठबंधन Allince करते हैं तो बहन जी आसानी से PM बन सकती हैं ।
यह बयान मुझे अच्छा लगा इसलिए मैं Article में लिखा ऐसे में अगर कोई BJP को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने में सक्षम है तो वह बहन कुमारी मायावती जी हैं ।

आपको यह Article कैसा लगा comment Box में जरूर बताये तथा Shere करें ।


Sunday, 22 July 2018

70 years of Independence and our Constitution


70 years of Independence and our Constitution
Independent
70 years of Independence and our Constitution
We left the the British on 15th August 1947 from our country. Often, we have told this only that when the British left India, we got independence but we could not call it true independence, if we got independence in the right way, then Independence came when Dr. Babasaheb Ambedkar wrote a constitution based on the country's equality, independence and brotherhood, giving equal rights to all the citizens of the country and on January 26, 1950, the Constitution of the country The applicable was applicable, but this constitution has remained on the page only.
When Dr. Ambedkar was prepared by the constitution of this country on 26th November 1949 and appeared in the Constituent Assembly on that day, then Baba Saheb gave a speech in the Constituent Assembly that "I will not be able to count the goodness of the Constitution because I think that If the Constitution of India is not good, but the determination of those who run it will not be clean, then this Constitution will eventually prove to be bad, but the Constitution of the country is so bad”.


Today even after 68 years of leaving the country for 70 years of British rule, and even after 68 years of declaration of the Constitution, there is a system of Social economically ,Politically irresponsible in this country, today in today 21st century India, oppression of oppression in the name of casteism And people's land is grabbed. The reservation system which is in the Constitution of the country is being weakened, today is the day when there are incidents of rape with sisters and daughters of Bahujan Samaj, poverty rises in the name of religion and religiousness in poverty in the country.

More than 40 million youths of the country are victims of unemployment and escapism; incidents like suicide of farmers in the coming days; Today the situation of farmers, laborers, job seekers, and small businessmen in this country Has become bad to worse.

In such a country which has ruled for 70 years and is doing it, he never made the Constitution in the right mind, and the Brahmins did not apply the constitution of the country to the Constitution of India, whether it was the BJP government at the Center. Whether it was the Congress government, he never fully implemented the Constitution, but tried to weaken the Constitution.
These Brahminical people tried to eliminate the constitution but due to the Bahujan leaders like Kanshiram Sahab did not do so, but now in the 21st Century, because of the BJP's RSS in the Central and the States, once again the danger of constitution increases and if the BJP returns to power in 2019 then it will change the constitution and make this country a Hindu nation.
We are not writing this like this. I want to remind all the people through this article that the statement of the Union Minister Ananth Kumar Hegde of the Bharatiya Janata Party was exposed on December 25, 2017. He said that in the year 2019, Will return again.
This statement of BJP central minister proves that Brahminic governments want to end the constitution in the country and Brahmanical people are going towards ending the constitution of this country and going towards making a Hindu nation, means Hindu nation. According to the Hindu religion in the Hindu nation in this country, the manuvan system once again came back, this country is divided into Brahmin Kshatriya Vaishya and Shudra four characters. (Divided), the Brahmanical system means high and low caste casteism, superstition, system of blind faith, if this system is implemented in this country, then in the lowest order in the Varna system, 52% OBC, SC ST and women of all classes Women will not be given any rights and their condition will be very bad.
If this Brahminic government has to be stopped, then 85% of the country's Bahujan Samaj will have to be united and in the elections of 2019, Brahminical governments will have to show their way out of power. Only then can we save this system and the Constitution.

Wednesday, 18 July 2018

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 1

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 1

Cast in India
सबसे बड़ा आतंकवाद जातिवाद या ISIS
जय भीम

जातिवाद और ISIS में सबसे बड़ा संगठन कौन ?

वैसे अगर कोई मुझसे पूछे भारत में सबसे बड़ा आतंकवाद क्या है तो मैं जातिवाद को ही सबसे बड़ा आतंकवाद Casteism कहूंगा और अगर कोई मुझसे यह पूछे कि सबसे बड़ा देशद्रोही कौन है तो मैं सबसे बड़ा देशद्रोही उसे कहूंगा जो जातिवाद का समर्थन करता है तथा अगर कोई मुझसे पूछे कि जातिवाद Casteism और ISIS में से सबसे बड़ा आतंकी संगठन कौन है ,तो जातिवाद को ही सबसे बड़ा संगठन कहूंगा जातिवाद से बड़ा आतंकी संगठन दुनिया में आज तक पैदा नहीं हुआ है ISIS का मैं समर्थन नहीं कर रहा लेकिन जातिवाद आतंकी संगठन की बात करें तो ISIS जातिवाद के सामने बहुत छोटा संगठन है , ISIS संगठन मैं इंसान की सीधे गर्दन पर दी जाती है लेकिन जातिवाद आतंकी संगठन में जो जिस जाति Cast में पैदा होगा वह उसी जाति को लेकर मरना पड़ता है, जातिवाद के कारण इंसान को तिल, तिल के दिन प्रतिदिन मरना पड़ता है , ISIS का इतिहास History तो कुछ ही साल पुराना है लेकिन जातिवाद का इतिहास हजारों साल पुराना है जातिवाद के खिलाफ हजारों सालों से संघर्ष Straggle चला आ रहा है लेकिन आज भी देश में जातिवाद कायम है , ISIS संगठन  में कुछ सही लोग होंगे लेकिन जातिवाद संगठन में हजारों जातियां Castes हैं और उन जातियों की हजारों उपजातियां हैं जातिवाद में एक जाति दूसरी जाति के बीच ऊंच-नीच की व्यवस्था कायम है । इस जातिवाद में बहुजन समाज को 6743 तथा 49000 के करीब उपजातियों में बांट कर रख दिया और इनके बीच रोटी बेटी का संबंध हमेशा के लिए बंद कर दिया गया ।

जातिवाद आतंकवादी संगठन क्यो है ?

जातिवाद आतंकी संगठन क्यों है अब यह सवाल सामने आता है इसका कारण सदियों से ब्राह्मणवादी व्यवस्था Brahminical system का कायम होना है और यही ब्राह्मणवादी व्यवस्था इस देश में हजारों सालों से कायम है तथा इस देश के सदियों से 85% Bahujan Samaj को गुलाम बनाकर रखना इस आतंकी संगठन का सबसे बड़ा मकसद है, बहुजन समाज को सदियों से गुलाम बनाकर रखा गया तथा इन्हें शिक्षा, बेरोजगार, सामाजिक, अन्याय, अत्याचार, असमानता छुआछूत का सदियों (Centuries) से शिकार होना पड़ रहा है, तथा पशुओं को माता का दर्जा दिया जा रहा है लेकिन बहुजन समाज के लोगों को कभी इंसान नहीं समझा जा रहा है बल्कि इनकी जिंदगी बद से बदतर हो गई है ISIS आतंकवादी संगठन में इंसान को एक झटके में खत्म कर दिया जाता है लेकिन जातिवादी संगठन (Racist organization) में इंसान को मरने  तक नहीं छोड़ा जाता है जातिवाद में इंसान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी (Generation by Generation) गुलाम बनाकर रखा जाता है इसमें इंसान चाहकर भी जाति Cast से बाहर Out नहीं निकल सकता, इंसान भारत में जहां जहां जाएगा जाति उसके पीछे परछाई की तरह साथ रहेगी इंसान कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए लेकिन Cast उसका पीछा मरते दम तक नहीं छोड़ती है , जातिवाद Casteism हजारों सालों से चली आ रही हैं लेकिन यह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है जातिवाद का जहर Poison इंसान के नस नस में भरा हुआ है तथा यह भारत की हवाओं में घुला हुआ है ।

जातिवाद खत्म करने के लिए संघर्ष :-

जब से जातियां बनी है तब से इसके खिलाफ Bahujan Samaj के संतो गुरु महापुरुषों ने अपने अपने समय पर संघर्ष किया है जिसमें सबसे पहले महात्मा गौतम बुद्ध, संत कबीर, संत रविदास, संत चोखामल, महात्मा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, बिरसा मुंडा, पेरियार रामास्वामी नायकर ,नारायण गुरु, तथा डॉक्टर अंबेडकर आदि तमाम प्रकार के संत गुरु महापुरुषों ने संघर्ष किया ।
महात्मा बुद्ध ने सबसे पहले जातिवाद के खिलाफ संघर्ष Struggle जारी  किया तथा उन्होंने अपने धर्म के माध्यम से जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई महात्मा बुद्ध ने अपने धम्म में सभी जातियों को शरण दी तथा महिलाओं Ladies को शरण दी
Mahatma Buddha में कहा कि “ जिस तरह सारी नदियां एक होकर समुद्र में मिल जाती हैं उनका कोई पिछला अस्तित्व नहीं रहता उसी तरह सारी जातियां मेरे धम्म में आकर एक हो जाती हैं उनका कोई जाति Cast नहीं रहती है




इसके बाद सम्राट अशोक Emperor Ashok के शासन में जातिवाद को खत्म कर दिया गया था और बुद्ध धम्म स्थापित हो गया था और 50 साल तक सम्राट अशोक का शासन रहा लेकिन  मौर्य वंश के अंतिम शासक की बृहद्रथ की धोखे हत्या करके ब्राह्मण धर्म Brahman Religion फिर से स्थापित हो गया था ।
इसके बाद महात्मा फुले माता सावित्रीबाई फुले छत्रपति शाहूजी महाराज तथा डॉ बाबासाहेब अंबेडकर 19वीं 20 वीं सदी में आंदोलन चलाया तथा जब डॉक्टर बाबा अंबेडकर को संविधान Constitution लिखने का मौका मिला तो उन्होंने छुआ-छूत (Touched-fingered) जातिवाद  को संविधान Constitution में खत्म कर दिया ।
जातिवादी सबसे बड़ा आतंकवाद के Part 2 में जातिवाद होने का कारण बताये तथा इसका जातिवाद से मुक्ति के बारे में लिखेंगे ।
आपको यह आर्टिकल  कैसा लगा Comment Box में जरुर बताएं तथा इसे Social Media के माध्यम से Share जरूर करें आपका Response ही  हमारी ताकत है ।

Thursday, 12 July 2018

Dr.Amebedkar का बुद्धिज़्म से परिचय कब से और कैसे

Dr.Amebedkar का बुद्धिज़्म से परिचय कब से और कैसे

Buddhism and ambedkar
Dr.Amebedkar and Buddhism
डॉ भीमराव अंबेडकर के बौद्ध धर्म अपनाने का एक मुख्य कारण यह भी था कि वे बचपन से ही बौद्ध धर्म से प्रभावित थे ,इसके बारे में बाबा साहब ने “बुद्ध और उनका धम्म “पुस्तक की भूमिका में लिखा है कि ,जिस वर्ष उन्होंने 4th Class परीक्षा उत्तीर्ण की थी तो उनकी जाति के लोगों ने उन्हें बधाई देने के लिए सार्वजनिक सभा Public meeting का आयोजन किया था, सभा के सभापति साहित्यकार और विद्वान दादा केलुस्कर थे सभा के अंत में दादा केलुस्कर ने बालक भीम को बुद्ध के जीवन पर अपनी स्वयं की लिखी पुस्तक भेंट की थी, बालक भीम ने वह पुस्तक बड़े ही चाव से पड़ डाली और पढ़कर अत्यंत प्रभावित influenced एवं द्रवित हुये, बालक भीम ने अपने पिताजी से पूछना शुरु कर दिया कि आप हम सबको बौद्ध साहित्य Buddhist literature से परिचित क्यों नहीं कराते आप हमें महाभारत और रामायण पढ़ने पर इतना जोर क्यों देते हैं ,जो ब्राह्मणों तथा क्षत्रियों की महानता और शूद्रों एवं अछूतों की नीचता को दर्शाने वाले वृतान्तों Annotations से भरे पड़े हैं, बालक भीम पिताजी द्वारा दी गई रामायण,महाभारत की पुस्तकों को पहले भी पढ़ चुके थे, फिर दादा केलुस्कर द्वारा दी गई भगवान बुद्ध की जीवनी (Biography of Lord Buddha) पढ़ने के बाद बुद्ध की ओर मुड़े ,तथा उस अल्प आयु में भी बालक भीम रामायण महाभारत के पात्रों तथा भगवान बुद्ध के चरित्र और ज्ञान की तुलना कर पाते थे, इसी तुलनायक अध्ययन Comparative Study के कारण बालक भीम के मन में Buddha के प्रति में रुचि उत्पन्न हुई तथा हिंदू (ब्राह्मण) धर्म के प्रति विद्रोह भड़का । हिंदू धर्म में व्याप्त वर्ण व्यवस्था और ऊंच-नीच की व्यवस्था, बाबा साहब को कभी रास नहीं आई, बाबा साहब का मानना था, कि जिस तरह भारत देश के लिए स्वराज्य जरूरी है वैसे ही दलित वर्ग के लिए धर्म परिवर्तन जरूरी है क्योंकि दोनों का उद्देश्य Objective आजादी की चाह है । ऐसे अनगिनत कारणों और विशेषताओं के कारण बाबा साहब ने महाराष्ट्र के नागपुर शहर में 14 अक्टूबर सन 1956 को अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी यह एक अद्भुत संयोग है कि मैं यह लाइनें आज 14 अक्टूबर सन 2016 को लिख रहा हूं बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने उपस्थित जनसमूह Crowd को 22 प्रतिज्ञा दिलावायी थी वे प्रतिज्ञाएं है :-
22 प्रतिज्ञाएँ
डॉ.  अम्बेडकर द्वारा दिलायी गई 22 प्रतिज्ञाएँ
बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने नागपुर में विशाल जनसमूह के सामने एक महान भाषण में जनता से बौद्ध धम्म में दीक्षित होने का आवाहन किया तथा दलित वर्ग को गंदे कामों को छोड़ने का आह्वान किया तथा खासतौर से महारों को मृत पशुओं का सड़ा गला मांस (Rotten Meat) न खाने की सलाह दी |
15 अक्टूबर सन 1956 को दीक्षाभूमि बाबा साहब ने नव दीक्षित बौद्धों को संबोधित करते हुए कहा कि "आप लोग ऐसे काम करने चाहिए जिन कामों से आप लोगों का अन्य लोगों के मन में आपका आदर बड़े, यह धम्म अपनाकर गले में बोझ लटका लिया है, ऐसा मत समझिए बौद्ध धम्म की दृष्टि से भारत अब शून्यवत है ,इसलिए हमें अच्छी तरह से धम्म का पालन करने का संकल्प Oath लेना चाहिए, यदि हमने यह कर लिया तो हमारे साथ-साथ देश का उद्धार करोगे ,बाबा साहब ने यही कहा था तथागत बुद्ध ने उस समय की परिस्थितियों के अनुसार अपने धम्म को प्रचार का मार्ग तैयार किया था, अब हमें भी योजना बनानी चाहिए इसीलिए हर किसी को हर एक व्यक्ति को दीक्षा देनी चाहिए हर एक बौद्ध व्यक्ति को दीक्षा देने का अधिकार है मैं ऐसा ऐलान Announcement करता हूँ "

Sunday, 8 July 2018

सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा

सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा

Government in hinduism
सरकारी संस्थाओं में ब्राह्मण धर्म का कब्जा
जय भीम
हमारे देश के संविधान में धर्मनिरपेक्षता की बात कही गई है,धर्मनिरपेक्षता का मतलब है किसी धर्म के पक्ष में नहीं ,26 जनवरी 1950 से 2018 तक के 68 सालो की बात करे तो सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा रहा है,जबकि जब देश का संविधान Constitution धर्म निरपेक्षता की बात कहता है,तथा जो लोग ये कहते है कि देश संविधान से चलता है,तो फिर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा क्यों है ,इस मुद्दे पर हमें सोचने पर मजबूर करता है ,और दिमाग मे Question आता है कि :-
  • Question:- क्या भारत मे केवल हिंदुओं की आबादी है ?
  • Answer:- नहीं
  • Question:- अगर भारत मे केवल हिंदुओं की आबादी नहीं है तो फिर पूरा देश क्या हिन्दू धर्म का पक्षधर है ?
  • Answer:- नहीं

अगर भारत मे केवल हिन्दू आबादी नहीं है ,और न ही हिन्दू धर्म को पूरा देश मानता नहीं है ,फिर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा क्यों है इस बात को हमें सोचने समझने  की आवश्यकता (requirement)है ।
Rajasthan high Cort
राजस्थान हाईकोर्ट के सामने मनु की मूर्ति

हिन्दू धर्म का कब्जा कहाँ कहाँ :-

आज देश के हर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म के देवी देवताओं की Image या मूर्ति कहीं न कहीं आपको देखने को मिली होगी और शायद आपके मन मे ये Question भी आया होगा कि सरकारी विभाग ,संस्थानों में केवल देवी देवताओं की image या मूर्ति क्यो होती है, तथा अन्य धर्म  मुस्लिम , ईसाई ,जैन सिक्ख धर्म की क्यों नहीं होती है , यह सवाल आपके मन में जरूर आया होगा, आपने हमेशा देखा होगा कि सरकारी, स्कूल कॉलेज सरकारी विभाग, Hospital, पुलिस स्टेशन आदि के पास हिंदू धर्म का मंदिर अवश्य होगा या इन विभागों में देवी देवताओं की मूर्ति या फोटो आपको जरूर देखने मिलेगी और इसका सबसे बड़ा exmaple राजस्थान हाईकोर्ट के बाहर मनु की मूर्ति स्थापित है ।

Government school or colleges में हिन्दू धर्म :-

जब भी हम Government school or colleges में  study  करने जाते हैं तो वहां  देवी देवताओं की मूर्ति या images जरूर देखते है , स्कूल कॉलेज में कोई Program शुरू होने से पहले देवी देवताओं की पूजा अर्चना जरूर होती है, और फिर कार्यक्रम Start होता है जबकि स्कूल कॉलेज में अकेले हिंदू धर्म की Teachers और Students नहीं होते वहां तो सभी धर्म के मानने वाले लोग होते हैं फिर भी वहां Specially  हिंदू धर्म को महत्व दिया जाता है ।
यहां तक की बात करें तो सरकारी स्कूल में पहली से दसवीं तक के Syllabus में Special हिंदू धर्म को महत्व दिया गया है तथा हिंदू धर्म से संबंधित परीक्षा में Question आते है ।

सरकारी विभागों में हिंदू धर्म का कब्जा :-

सरकारी विभागों की अगर हम बात करें तो Government Department जैसे पुलिस स्टेशन, कलेक्ट्रेट, रेलवे स्टेशन, तहसील ,सरकारी बैंक तथा तमाम प्रकार के सरकारी विभागों के Office में खासतौर से देवी देवताओं की फोटो या मूर्ति वहां स्थापित रहती है, इसके अलावा आप लोगों ने देखा होगा कि सरकारी विभागों के Office के बाहर या आस-पास हिंदुओं के मंदिर ज्यादातर रहते हैं, तथा खासकर जेलों के अंदर हिन्दू धर्म के मंदिर बनें होते और वहाँ daily पूजा अर्चना होती है ,जबकि सभी सरकारी विभागों में सभी धर्मों के मानने वाले वहां काम करते है तथा सभी धर्म के लोग अपने काम से आते जाते लेकिन देखने को Only हिंदू धर्म का जबरदस्ती कब्जा जमा रहता है जबकि यह संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ है लेकिन सरकारी विभाग और Office में बिना किसी दबाव के उन्होंने यहां मंदिर तथा देवी देवताओं की मूर्ति स्थापित कर रखी हैं ।

आखिर ऐसा क्यों है ?

प्रश्न सामने आता है कि आखिर क्यों हिंदू धर्म को जबरदस्ती हिंदुत्ववादी लोग थोपना चाह रही हैं इसका कारण यह समझ सकते हैं कि यह ब्राह्मणवादी RSS तथा हिंदुत्ववादी संगठनों की ऐसी साजिश रची जा रही है कि हर Goverment, Private Department में हिंदू देवी देवताओं की फोटो तथा मंदिर स्थापित हो ताकि जैसे मैंने पिछले Article में बताया था इनका मुख्य उद्देश्य (Main Purpose) भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है ।
अभी RSS द्वारा संचालित हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी BJP के पास संविधान बदलने के लिए और हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लोकसभा में पूर्ण बहुमत है, लेकिन अभी राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं है , लेकिन जब राज्यसभा में पूर्ण बहुमत साबित हो जाएगा तथा ब्राह्मणवादी सत्ताधारी नेताओं द्वारा हिंदू राष्ट्र घोषित कर देंगे , तब इनसे सवाल पूछेंगे कि हिंदू राष्ट्र क्यों बनाया है तब BJP RSS के नेता इस सवाल के जवाब में यह बोलेंगे कि सालों से देश के सभी Government, Offices में देवी देवताओं की मूर्ति है तथा मंदिर स्थापित है तब किसी ने विरोध नहीं किया इसका मतलब है देश की Public हिंदू राष्ट्र बनाने के पक्ष में है ,तब हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे ।

हिंदू राष्ट्र में इस देश के 85% बहुजन समाज का क्या हाल होगा यह आप लोग मेरी पिछले Article 70 साल की आज़ादी और हमारा संविधान में अच्छी तरीके से पढ़ चुके हैं ।
आप सभी Reads पड़कर कुछ लोग अगर यह सोच रहे होंगे कि यह आम बात है तो मैं बता देना चाहता हूं यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है हमें सोच समझकर इससे बाहर निकलना होगा ।

आपको यह Article कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं तथा आपके सुझाव हमें अवश्य बताएं
जय भीम जय भारत

Wednesday, 4 July 2018

70 साल की आज़ादी और हमारा संविधान....

70 साल की आज़ादी और हमारा संविधान

Constitution and Flag
संविधान 


हमारा देश से 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज छोड़कर चले गये अक्सर Mostly हमे यही बताया कि जब अंग्रेज भारत छोड़कर गए तब हमें आज़ादी मिली लेकिन हम इसे अपनी सच्ची आज़ादी (True freedom) नहीं कह सकते थे ,अगर सही मायने में आज़ादी हमें मिली तो वह आज़ादी तब मिली जब डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर ने देश का  समता, स्वतंत्रता और बंधुता पर आधारित संविधान लिखा , जिसमें देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तथा 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू Applicable हुआ लेकिन यह संविधान  केवल पन्नो पर रह गया है ।
 जब डॉ अंबेडकर ने इस देश का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और उसी दिन संविधान सभा में पेश हुआ तब तब बाबा साहब ने संविधान सभा में भाषण देते हुए कहा कि “ मैं संविधान की अच्छाइयां  गिनाने नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है, कि देश संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो लेकिन उसको चलाने वालों की नियत (Devoted) साफ नहीं होगी , तो यह संविधान अंततः बुरा साबित होगा, लेकिन देश का संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो, उसके चलाने वालों की नियत अच्छी होगी तो यह संविधान अच्छा साबित Well proven होगा ।


आज देश को  अंग्रेजों के 70 साल देश छोड़ने के बाद भी तथा संविधान लागू घोषित होने के 68 साल बाद भी इस देश में सामाजिक आर्थिक राजनीतिक रूप से गैरबराबरी की व्यवस्था है,  आज 21वीं सदी से भारत देश में आज भी जातिवाद के नाम पर अन्याय अत्याचार होता है तथा लोगों की जमीन हड़प ली जाती हैं । देश के संविधान में जो आरक्षण की व्यवस्था है उसे कमजोर किया जा रहा है ,  आज आए दिन बहुजन समाज की माताओं बहनों बेटियों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं होती हैं , देश में गरीबी भुखमरी बीमारी तथा धार्मिकता Religiousness के नाम पर दंगे आदि होते हैं ।
देश का 4 करोड़ से भी ज्यादा युवा वर्ग बेरोजगारी और पलायनवाद (Unemployment and escapism) का शिकार है, आये दिन किसानों की आत्महत्या जैसी घटनाएं हो रही हैं, आज इस देश में किसान ,मजदूर ,नौकरी पेशा वाले, तथा छोटे व्यापारियो  की स्थिति बद से बदतर (bad to worse) हो गई है ।
ऐसा इस देश में जिसने 70 सालों तक राज किया है और कर रहे हैं ,इन्होंने कभी संविधान को सच्चे मन से लागू (Applicable) नहीं किया, तथा ब्राह्मणवादियों मनुवादी तत्वों ने देश के संविधान को कभी लागू नहीं किया केंद्र में चाहे बीजेपी की सरकार रही हो , चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो इन्होंने कभी संविधान को पूर्णतः लागू नहीं किया बल्कि Constitution को कमजोर करने की कोशिश की गई ।
इन ब्राह्मणवादी लोगों ने संविधान को खत्म करने की कोशिश की लेकिन कांशीराम साहब जैसे बहुजन नेताओं (Bahujan leaders) के कारण ऐसा नहीं कर पाए लेकिन अब 21वीं सदी में केंद्र व राज्यों में BJP RSS की सरकारें होने के कारण एक बार फिर संविधान पर खतरा बढ़ गया है और अगर 2019 में BJP की सत्ता में वापसी होती है तो यह संविधान बदल देंगे तथा इस देश को हिंदू राष्ट्र बना देंगे ।
बयान अनन्त कुमार हेगड़े
अनंत कुमार हेगड़े का बयान
हम यह बात ऐसे ही नहीं लिख रहे हैं इस Article के माध्यम से सभी लोगों को याद दिलाना चाहता हूं की 25 दिसंबर 2017 को  भारतीय जनता पार्टी के Central Minister अनंत कुमार हेगड़े का बयान सामने आया  उन्होंने कहा कि 2019 में संविधान बदलने के लिए सत्ता में फिर वापसी करेंगे ।
BJP के  central minister  का ऐसा बयान इस बात को साबित करता है कि ब्राह्मणवादी सरकारें देश में संविधान को खत्म करना चाहती हैं तथा ब्राह्मणवादी लोग इस देश के संविधान को खत्म (Finish) करके हिंदू राष्ट्र बनाने की ओर जा रहे हैं हिंदू राष्ट्र का मतलब है इस देश में मनुवादी व्यवस्था एक बार फिर वापस आना ,  हिंदू राष्ट्र में हिंदू धर्म के अनुसार इस देश को ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य तथा शूद्र चार वर्णों में विभाजित (Divided) किया जाएगा, ब्राह्मणवादी व्यवस्था का मतलब है ऊंच-नीच जातिवाद पाखंडवाद अंधविश्वास वाली  व्यवस्था , अगर इस देश में यह व्यवस्था लागू हो गई तो वर्ण व्यवस्था में जो सबसे निचले स्थान पर शुद्र 52% OBC ,SC ST और सभी वर्ग की महिलाओं को Women of all classes कोई भी अधिकार नहीं दिए जाएंगे और इनकी स्थिति बहुत ही खराब हो जाएगी ।
अगर इस ब्राह्मणवादी सरकारों को रोकना है तो देश के 85% बहुजन समाज को एक होना पड़ेगा तथा उन्हें 2019 के चुनाव में ब्राह्मणवादी सरकारों को सत्ता  से बाहर का रास्ता दिखाना होगा तभी यह व्यवस्था तथा संविधान (Constitution) को हम बचा सकते हैं ।