Wednesday, 19 September 2018

आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2

     आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2

Reservation in india
आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 2
देश आजाद होने के बाद देश का नया संविधान लिखते समय भारत के संविधान निर्माताओं ने अपनी मानवतावादी और समानतावादी सोच के कारण लोगों को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता का अधिकार दिया और अनुच्छेद 19 के तहत स्वतंत्रता का अधिकार दिया लेकिन प्राचीन काल में हुए धार्मिक अन्याय के कारण दलित वर्ग पिछड़ा वर्ग, आदिवासी वर्ग ,तथा सभी वर्ग की महिलाएं हर दृष्टि से पिछड़े हुए थे । शोषित वर्ग संपन्न वर्ग की बराबरी नहीं कर पा रहे थे ।
इसीलिए संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण और संरक्षण की व्यवस्था की । जिस तरह माता-पिता अपने सबसे कमजोर बच्चे का ज्यादा ध्यान रखते हैं । ज्यादा अच्छा खाने को देते हैं । ताकि दूसरे मजबूत और हस्ट पुष्ट बच्चे की तरह कमजोर बच्चा हष्ट पुष्ट हो  जाये । इसी सोच के तहत बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों में उनकी संख्या के अनुपात में आरक्षण प्रदान किया ।
संविधान सभा में कई सदस्यों ने अन्य पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण की मांग की  थी । और बाबा साहब भी चाहते थे कि पिछड़ा वर्ग को भी आरक्षण की सुविIधा प्रदान की जाय लेकिन घोर विरोध के कारण बाबा साहब इस मांग को तुरंत पूरा नहीं कर सके । लेकिन संविधान में अनुच्छेद 340 बनाकर पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने की व्यवस्था की ताकि आयोग सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं और जिन कठनाइयों को वे झेल रहे है उनका पता लगाकर ,पिछड़े वर्ग की दशा को सुधारने के लिये सरकार से सिफारिश कर सके ।
बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के अनुच्छेद 330 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए लोकसभा में उनकी संख्या के अनुपात में स्थान आरक्षित किये तथा अनुच्छेद 332 में राज्य विधान सभाओ में इनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थान सुरक्षित किये राजनैतिक आरक्षण की समय सीमा 10 वर्ष रखी गई थी । यह राजनीतिक आरक्षण 10 वर्ष में अनुच्छेद 334 में संशोधन करके बढ़ा दिया जाता है ।
प्राचीन काल कि भेदभाव तथा अन्याय पूर्ण धार्मिक व्यवस्था के कारण पिछड़ा वर्ग हर क्षेत्र में इतना पिछड़ गया था कि स्वतंत्रता  के बाद तथा संविधान में समानता का अधिकार मिलने के बाद भी पिछड़ा वर्ग सामान्य वर्ग की तुलना में बहुत अधिक पिछड़ा हुआ था । इसी  पिछलेपन को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 340 के अनुसार एक आयोग का गठन किया गया जिसे मंडल आयोग कहा जाता था । इस आयोग की सिफारिशों को 1989 में बनी जनता दल की सरकार ने लागू किया और और अन्य पिछड़े वर्ग में आने वाली जातियों को सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण की सुविधा प्रदान की यही से अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिलने की शुरुआत हुई मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़े वर्गों को 14% आरक्षण दिया गया है और कई  राज्यों में प्रदान आरक्षण 27 प्रतिशत से कम है ।1993 से पहले ग्राम पंचायतों में अक्सर बड़े किसान ही सरपंच बना करते थे । यही हाल शहरी निकायों में था । क्योंकि पंचायतों व शहरी निकायों में पिछड़े हुये नागरिकों के किसी वर्ग को आरक्षण प्राप्त नहीं था । लेकिन 1993 में संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन करके अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग को विभिन्न पदों में आरक्षण प्रदान किया गया तथा सामान्य वर्ग सहित सभी वर्ग की महिलाओं को प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थान आरक्षित किये गये ।
संविधान के अनुच्छेद 243 में तीन स्तरों की पंचायतों के सदस्यों प्रधानों तथा अध्यक्षों के कम से कम एक तिहाई स्थान सामान्य वर्ग की महिलाओं सहित सभी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए ।  ये पद पंचायतों में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आवंटित किए गए इसी तरह चक्रानुक्रम से प्रत्येक नगर पालिका में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की संख्या के  कम से कम एक तिहाई स्थान सामान्य वर्ग की महिलाओं सहित सभी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए इस तरह स्थानीय निकायों में आरक्षण की शुरुआत हुई ।
लेकिन अभी तक 72 साल की आज़ादी के बाद भी कमजोर वर्ग इतना मजबूत और संपन्न नहीं हुआ है कि संपन्न वर्ग की हर स्तर पर बराबरी कर सकें ।
इसका एक कारण यह भी है, कि केंद्र और विभिन्न राज्यों में शासन करने वाली अधिकतर पार्टियां कमजोर वर्ग को संपन्न करना नहीं चाहती यही एक  कारण हैं कि आरक्षित पद अक्सर खाली रह जाते हैं । जबकि आरक्षण वर्ग के लाखों नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं यदि सरकारों की नियत सही होती तो सरकार ऐसे उपाय करती जिससे आरक्षित कोटे का कोई पद खाली नहीं रह पाता ।
लेकिन सरकार ने ऐसे प्रयास नहीं किए जिससे आरक्षित वर्ग का सामाजिक शैक्षणिक एवं आर्थिक पिछड़ापन खत्म हो सके । यही एक कारण है कि आरक्षित वर्ग जिसकी जनसंख्या करीब 65% है लेकिन सरकारी नौकरियों में आरक्षित वर्ग की भागीदारी 13% हो पाई है इसलिए मेरे हिसाब से जब तक कमजोर वर्ग सामान्य वर्ग की तरह हर स्तर पर बराबरी न कर ले तब तक आरक्षण और संरक्षण लागू रहना चाहिए ।
मेरा तो यह भी मानना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार 50% तक आरक्षण की सीमा को हटाने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन करके सामान्य वर्ग के गरीबी के नीचे रहने वाले व्यक्तियों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए तथा संसद और विधानसभाओं में स्थानों के लिए महिला आरक्षण बिल जो संसद में लंबित है जल्दी पास होना चाहिए तथा पदोन्नति में आरक्षण बिल जो संसद में लंबित है उसे भी जल्दी पास करना चाहिए तथा ऐसा कानून .बने जिससे आरक्षण का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को दंडित किया जा सके ।
अमेरिका में भी काले रंग के प्रजाति के अमेरिकी नागरिकों को समानता और बराबरी पर लाने के लिए आरक्षण दिया गया है ।
आरक्षण प्राचीन समय से धार्मिक ग्रंथों द्वारा मिली सामाजिक और धार्मिक असमानता की बीमारी को समाप्त करने का संवैधानिक उपचार हैं । यह आरक्षण रूपी दवा कड़वी जरूर है लेकिन यही एक रास्ता है जिस से देश में से सामाजिक असमानता की बीमारी को समाप्त किया जा सकता है । इसलिए इस देश के सामान्य नागरिकों को दवाई के गुणों को और अच्छाइयों को देखना चाहिए ना कि दवाई के कड़वेपन को। ब्राह्मण सहित सभी वर्ग की  महिलाये ने पिछड़ा वर्ग आदिवासी और दलितों ने हजारों बरसों से गुलामी अपमान और अभाव का जहर पिया है इसलिए सामान्य वर्ग को आरक्षण रूपी लेकिन समाज के लिए लाभदायक इस कड़वी दवा को जरूर स्वीकार करना चाहिए ।
   जय भीम , जय भारत
लेखक :- भोलाराम अहिरवार

Friday, 14 September 2018

चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन

     चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन

चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन
चंद्रशेखर रावण का महागठबंधन को समर्थन 

जय भीम कल  भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को  रात 2:30 बजे रहा कर दिया गया रिहा होने के बाद चंद्रशेखर आजाद रावण में मुख्य बातें की यह 10 मुख्य बातें आपसे शेयर कर रहा हूं , उम्मीद है आप पढ़ेंगे और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करेंगे .
1.चंद्रशेखर आजाद रावण ने महागठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया ।
2.  उन्होंने कहा कि अपने लोगों से कहूंगा कि बीजेपी को 2019 में सत्ता से उखाड़ फेंके ।
3. भाजपा दलित विरोधी है एक हाथ से प्रेम करती है दूसरे हाथ से बाहर करती है ।
4. भाजपा को सबक सिखाने का काम SC ST OBC और मुस्लिम समुदाय करेगा क्योंकि अभी ये सभी प्रताड़ित हैं ।
5. उन्होंने कहा कि, भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी को एक भी वोट मत देना ।
6. भाजपा को वोट देने का मतलब है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के गले पर चाकू रख देना ।
7. सामाजिक आंदोलन को बढ़ाकर जागरूकता पैदा करेंगे ताकि असली नकली का फर्क पहचान सके ।
8. चंद्रशेखर आजाद रावण चुनाव नहीं लड़ेगा ।
9. जेल में इलाज नहीं दिया गया, मुलाकाते बंद कर दी, सताया गया और सूखी रोटियां दी गई ।
10. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रसूल काम में फंसा सकती है , तथा उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित था ,जिसकी सुनवाई होने ही वाली थी और वहां से रिलीफ मिल जाती क्योंकि मामले में दम नहीं था और ऐसे में सरकार की किरकिरी हो जाती ऐसे में सरकार Backfoot पर आ जाती इसलिए उन्होंने पहले ही रिहा कर दिया ।
In English
Key points after the release of Chandrasekhar Ravan

Jai Bhim, the founder of Bhim Army, Chandrasekhar Ravana has been kept at 2:30 pm after being released, Chandrasekhar Azad has shared this 10 main points of interest in Ravan, hopefully you will read and share it as much as possible. will do .

1. Chandrashekhar Azad Ravan announced to give support to the Maha coalition

2. He said that I would like my people to overthrow BJP in 2019.

3. The BJP is anti-Dalit, loves one hand and does it out of the other hand.

4. The task of teaching the BJP a lesson will be done by SC-ST OBC and Muslim community as they are all oppressed now.

5. He said, do not vote for a communal party like BJP, do not vote for one vote.

6. Voting for the BJP means that keeping a knife on your throats of next generation.

7. Increase the social movement and create awareness so that the real counterfeit can recognize the difference.

8. Chandrasekhar Azad Ravan will not contest elections.

9. Not treated in jail, stopped meeting, persecuted and dry roti.

10. He said that the Rasool can be implicated in the work by the government, and he said that the case was pending in the Supreme Court, which was supposed to be heard and relief from there because the case was not in vain and in such a case the government is weak In such a way the government would come back to Backfoot, so he already released.


Source By:- Dalit News Network

  1. Also Read this:- आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

Wednesday, 12 September 2018

आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

Reservation Policy
आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

  आरक्षण एक सोच तथा गलतफहमी PART 1

आरक्षण एक ऐसा विषय है जिस विषय पर सबसे ज्यादा चर्चा और राजनीति होती है । आरक्षण लगभग हर चुनाव में  किसी ना किसी रूप में चुनावी मुद्दा रहता है आरक्षण के
मुद्दे पर राजनैतिक दल चुनाव हारते और जीतते रहते हैं। आरक्षण का मूल उद्देश्य विभिन्न वर्गों के बीच में व्याप्त असमानता को दूर कर समानतावादी समाज की स्थापना करना है। हमारे भारत देश में प्राचीन काल (पुराने समय) से ही भेदभाव पूर्ण और अन्याय पूर्ण वर्ण व्यवस्था बना दी गई थी। समाज को अवैज्ञानिक (बेतुका) तौर पर चार भागों या वर्णों में बांट दिया गया था। यह वर्ण थे (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य,और शुद्र) वेदों में और धार्मिक पुस्तकों में शूद्रों को केवल एक ही अधिकार दिया गया था। वह अधिकार है तीन वर्णों की बगैर स्वार्थ के सेवा करना। धार्मिक पुस्तकों में शूद्र वर्ण को नीच वर्ण कहकर कई जगह उसका घोर अपमान किया गया है। जैसे कि तुलसीदास ने रामचरित-मानस के पेज क्रमांक 986 में चौपाई नंबर 3 में लिखा है।
जे वरनाधम तेली कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।।
नारि  मुई गृह सम्पति नासी । मूड़ मुड़ाइ होहिं सन्यासी।।
ते विप्रन्ह सन आपु पूजवाहि। अभय लोक निज हाथ नासवहिं ।।”
अर्थात:-  तेली ,कुम्हार चांडाल, भील ,कोल,और कलवार आदि जो वर्ण में नीचे है, स्त्री के मरने पर अथवा घर की संपत्ति नष्ट हो जाने पर सिर मुंडवाकर संयासी हो जाते हैं। वे अपने को ब्राह्मणों से पुजवाते है। और अपने ही हाथों दोनों लोक नष्ट करते हैं।

पुराने समय में वेदों और धार्मिक पुस्तकों को संविधान का दर्जा प्राप्त था । इन्हीं धार्मिक पुस्तकों में लिखे अनुसार राजा राज्य करते थे आरक्षण की शुरुआत इसी काल  से मानी जाती है ।
मनुस्मृति के अनुसार पुरोहित के पद, राजा के प्रमुख सलाहकार, दंडाधीश के पद, तथा मंत्रियों के पद, ब्राह्मणों के लिए आरक्षित थे सभी महत्वपूर्ण पद ब्राह्मणों के लिए सुरक्षित थे सारे मंत्री ब्राह्मण ही होते थे। गैर ब्राह्मण जातियां बड़े पदों पर नहीं पहुंच सके इसलिए शिक्षा पर एकाधिकार जमाये रखने के लिए विधान बनाया गया । हिंदू समाज के निम्न वर्गों के लोगों तथा ब्राह्मण सहित सभी वर्गों की  महिलाओं के लिए पढ़ाई लिखाई अपराध घोषित कर दिया जिसका उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान था ।
मनुस्मृति के भाग 2 के श्लोके नंबर 67 में लिखा है:-
श्लोक:-
वैवाहिको स्त्रींणा: संस्कारो वैदित स्मृत।
पति सेवा गुरौ वासो गृहार्थी अग्नि परिक्रिया।।

अर्थात:- जैसे शूद्रों के लिए गुरु की दीक्षा (जनेऊ संस्कार) करना मना है । उसी प्रकार स्त्रियों के लिए भी पढ़ना-पढ़ाना गुरु दीक्षा लेना मना है ।

प्राचीन काल में ऐसी भेदभाव पूर्ण शासन  व्यवस्था तथा शिक्षा के अभाव के कारण महिलाएं (सभी वर्णों की) आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और दलित इन सभी की हालत इतनी दयनीय और सोचनीय हो गई थी कि इसकी मिसाल संसार में कहीं दूसरी जगह नहीं मिल सकती थी । दलित वर्ग के लिए जिंदा रहना भी मुश्किल हो गया था । दलित वर्ग के लोग न तो अच्छे काम कर पाते थे और न दलित वर्ग मंदिरों में पूजा कर सकते थे, और न तो तालाबों में पानी पी सकते थे और न तो कई सार्वजनिक सड़कों पर पैर रख सकते थे । जबकि कुत्ता बिल्ली और अन्य जानवर के साथ ऐसा सलूक नहीं किया जाता था ।
हजारों वर्ष तक महिलायें (सभी वर्ग की) आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग, इस धार्मिक अन्याय की चक्की में पिसते रहे। देश में कई राजे-महाराजे और शासक हुए लेकिन किसी ने इस धार्मिक अन्याय को दूर करने के लिए कुछ भी प्रयास नहीं किया। क्योंकि सभी राजे महाराजे वेदों,पुराणों और धार्मिक साहित्य का बहुत आदर करते थे । इसीलिए वेदों पुराणों के खिलाफ कुछ भी कदम उठाने की साहस नहीं जुटा पाते थे, और राजाओं को यह भी बताया जाता था, कि वेद ब्रह्मा के मुख से निकले है,इसीलिए  वेदों और पुराणों की लिखी बातों को न मानने का मतलब है। ईश्वर के दिए गए आदेश को न मानना । इसीलिए इस धार्मिक और सामाजिक अन्याय को दूर करने का साहस कोई राजा या शासक नहीं कर सका ।
छत्रपति शाहू जी महाराज
छत्रपति शाहू जी महाराज
लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत में कोल्हापुर रियासत के राजा शाहूजी महाराज ने वेदों और पुराणों के खिलाफ जाने का साहस किया तथा कोल्हापुर रियायत के प्रशासन को बगैर भेदभाव के संपूर्ण प्रजा के कल्याण के लिए समर्पित किया ।
छत्रपति शाहूजी महाराज ने 26 जुलाई 1902 में एक आदेश दिया,जिसके तहत पिछड़े वर्ग तथा निर्बल वर्ग को रियासत के सरकारी दफ्तरों में नौकरियों में 50%  आरक्षण देने का प्रावधान किया था । इस तरह भारत के निर्वल वर्ग को आरक्षण मिलने की शुरुआत हुई ।
शाहू जी महाराज चाहते थे  कि बहु
जन वर्ग के लिए शिक्षा मिले इसीलिए प्रत्येक देहात में स्कूल भी खुलवाई । शाहूजी महाराज ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपनी अधूरी शिक्षा पूरी करने के लिए आर्थिक मदद देकर इंग्लैंड भेजा ताकि बाबा साहब ज्ञान अर्जित कर के देश में पिछड़े वर्ग तथा निर्बल वर्ग को सामाजिक तथा आर्थिक समानता दिला कर देश का भला कर सके ।
छत्रपति साहू जी महाराज द्वारा दिया गया आरक्षण कोल्हापुर रियायत तक ही सीमित था ।
लेकिन बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर पूरे देश में सामाजिक और आर्थिक अन्याय समाप्त कर समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहते थे ।
Puna Pact
डॉ. अम्बेडकर तथा गांधी जी


देश में अंग्रेजों के राज को करीब 150 वर्ष  बीत चुके थे भारतीय लंबे समय से स्वराज की मांग कर रहे मैं थे जिसे पूरा करने के लिए अँग्रेज़ सरकार ने सन 1930-1931 में लंदन में गोलमेज सम्मेलन बुलाया । बाबा साहेब ने गोलमेज सम्मेलन में दलितों की तरफ से भाग लिया
गोलमेज सम्मलेन में बाबा साहब  ने अपने भाषण में कहा था:- “भारत में अंग्रेजी नौकरशाही सरकार के स्थान पर लोगों द्वारा ,लोगों के लिए, लोगों की सरकार कायम की जाये “
बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने अँग्रेज़ सरकार से भारतीय के लिए  स्वराज देने की मांग रखी तथा दलितों के लिए विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्र देने की मांग रखी ।
बाबा साहब का मानना था कि भारत में लोग योग्यता और शिक्षा से ज्यादा जाति देखते हैं इसलिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में दलित वर्ग के उम्मीदवारों को सवर्ण और जातिवादी व्यक्ति वोट नहीं देंगे इसलिए दलित वर्ग के प्रतिनिधि विधानमंडलों में चुनकर नहीं जा पाएंगे जबकि दलित और पिछड़े वर्ग के लोग ब्राह्मण और सवर्णों को वोट देना पुण्य का काम समझेंगे इसलिए ब्राह्मण और सवर्ण जीत जाएंगे और सत्ता में आने पर स्वर्ण और दलितों पिछड़े वर्ग पर और भी ज्यादा अन्याय और अत्याचार करेंगे इसीलिए बाबा साहब ने चुनाव में दलितों के लिए ऐसे अलग चुनाव क्षेत्र की मांग रखी जिन क्षेत्रों में केवल दलित वर्ग के व्यक्ति ही चुनाव लड़ सके और केवल दलित वर्ग के व्यक्ति ही वोट डाल सकें।
बाबा साहेब अंग्रेज सरकार से ऐसा प्रावधान करने की मांग की जिससे किसी आदमी के सामने देश की सरकारी नौकरी में प्रवेश होने के संबंध में कोई बाधा न रहे । गोलमेज सम्मेलन में भाषण देते हुए बाबा साहब ने कहा था । महोदय, मेरा मत है की किसी भी एक  वर्ग को किसी देश की सारी सरकारी नौकरियों पर एकाधिकार कर लेने देना एक बड़े भारी सार्वजनिक खतरे को मोल लेने देना  है । मैं इसे सार्वजनिक खतरा कहता हूं, क्योंकि इससे जो जातियां फायदे में रहती हैं, उनके अंदर अहंकार का भाव पैदा हो जाता है। बाबा साहब ने यह भी कहा था । कि हम भारत के लिए एक नया विधान बनाने जा रहे हैं। हमें उस का आरंभ ऐसी पद्धति से करना चाहिए जिसमें महामहिम की प्रजा के हर आदमी को इस बात का अवसर हो कि वह सरकारी नौकरियों में अपनी अपनी योग्यता का परिचय दे सकें ।

सवर्णों का सरकारी नौकरियों में एकाधिकार है  जिसके चलते अन्य वर्गों की भारी उपेक्षा हो रही है। सवर्ण लोगों ने न्याय और समानता को दरकिनार कर अपने वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए अपने अधिकारों का दुरूपयोग किया है । सरकारी नौकरियों में सवर्णों को एकाधिकार को समाप्त करने के लिए इस प्रकार के नियम बनाया जाए जिससे की नौकरियों में भर्ती सभी संप्रदायों को उसका उचित भाग मिल सकें ।
प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस और गांधी ने भाग नहीं लिया लेकिन दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गांधी ने भाग लिया और अपनी गलत और अमानवीय सोच का परिचय देते हुए दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र और राजनीतिक अधिकार देने का डटकर विरोध किया । गांधी जी का कहना था कि दलित वर्ग हिंदू धर्म का ही एक हिस्सा है, इसलिए दलित वर्ग को हिंदू वर्ग से अलग नहीं किया जा सकता गांधी जी का कहना था कि मैं प्राणों की बाजी लगाकर इस तरह के राजनीतिक बंटवारे का मैं विरोध करूंगा।

गांधीजी के कड़े विरोध के बावजूद ब्रिट्रेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के तर्क पक्ष और मांग को सही मानते हुए 16 अगस्त सन 1932 को दलित वर्ग को राजनीतिक अधिकार देते हुए उन्हें विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्ताव मंजूर  किया । दलित वर्ग को राजनीतिक अधिकार मिलना गांधीजी को सहन नहीं हुआ । दलित वर्ग के लिए विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्र मिलने के विरोध में गांधी जी ने पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरु कर दिया । गांधी की मांग थी दलित वर्ग को जो राजनीतिक अधिकार स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र मिले हैं । उन्हें समाप्त कर दिया जाए । यरवदा जेल में गांधीजी के अनशन के कारण पूरे देश में कांग्रेसियों ने अंबेडकर का विरोध करना शुरू कर दिया । दलितों के साथ मारपीट तथा हत्याएं आगजनी करना शुरु कर दिए । दलितों के घर आग के हवाले कर दिए गये । यह सब कांग्रेसी इसलिए कर रहे थे कि बाबा साहब अंबेडकर दलितों को मिले राजनीतिक अधिकारों को छोड़ देवें ।

कांग्रेसी बाबा साहब से गाँधी से बात करने का अनुरोध भी कर रहे थे । अंत में देश में शांति और दलितों की जान माल की रक्षा के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने पुणे की यरवदा जेल में जाकर गांधी से मुलाकात की । लंबी बातचीत के बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने विधानमंडलों में मिले अलग निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्ताव को छोड़ दिया । और बदले में दलित वर्ग के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र के मुआवजे के रुप में गांधी की मंशा के अनुसार राजनीतिक आरक्षण स्वीकार कर लिया । समझौते के तहत  विधानमंडलों में अलग निर्वाचन क्षेत्रों की जगह सुरक्षित क्षेत्र प्रदान किए गये । यानि जो  क्षेत्र दलित वर्ग के लिए सुरक्षित रखे गए उनमें केवल दलित वर्ग के प्रत्याशी ही खड़े हो सकेंगे लेकिन सभी वर्ग के मतदाता वोट डाल सकेगें  ।

24 सितंबर सन 1932 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और गांधी के बीच एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता या पूना पैक्ट के नाम से जाना जाता है । इस समझौते पर दलित वर्ग की तरफ से डॉक्टर अंबेडकर तथा सवर्ण हिंदुओं की तरफ से मदन मोहन मालवीय ने हस्ताक्षर किये । इसके बाद राजनीति में आरक्षण की शुरुआत हुई और गांधी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया । बाबा साहब का मानना था कि गांधी और कांग्रेस ने पूना  पैक्ट रुपी फल से प्राप्त रस को चूस लिया और छिलका दलितों के मुंह पर दे मारा ।
Related Article:- Read what is Poona Pact 1932 in English

Wednesday, 5 September 2018

दलित शब्द तथा हिंदुस्तान शब्द का भारत मे प्रयोग

Dalit and Hindustan
Dalit and Hindustan

दलित शब्द तथा हिंदुस्तान शब्द का भारत मे प्रयोग

जब भी चुनाव आता है ,सरकार ऐसा मुद्दा ढूंढ कर लाती है, जिससे लोगों में विघटन हो जाए अब सरकार एक और नया मुद्दा लेकर आई है ,जिससे एक बड़ी बहस छिड़ गई है ,अब सरकार के मंत्रालय Information and broadcasting ministry ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि दलित असंवैधानिक शब्द है, चलो मान लिया लेकिन संविधान की प्रस्तावना में भारत अर्थात इंडिया का नाम दिया हुआ है।
संविधान
संविधान में भारत तथा इंडिया का प्रयोग

संविधान के भाग 1 में लिखा है
“India that is Bharat shall be a union of States”
लेकिन भारत में एक शब्द का उपयोग होता है जिसका नाम हिंदुस्तान है , तथा 26 जनवरी या 15 अगस्त पर भारत के प्राचीन किले पर प्रधानमंत्री अपने भाषणों में 10 बार हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग होता है तथा संसद में इस शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं,और भारत के तमाम बड़े बड़े नेता इस हिंदुस्तान शब्द का  प्रयोग करते आए हैं , यहां तक की भारत में पत्रकारिता, TV चैनल, सरकार की संस्थाएं, कंपनियां में भी हिंदुस्तान शब्द का अधिक मात्रा में प्रयोग होता रहा है । जैसे , Hindustan Times, Hindustan analysis Limited, Hindustan Petroleum, Hindustan copper Limited, Hindustan salt Limited, Hindustan electronic motor जैसे तमाम प्रकार की कंपनियां संस्थानों में हिंदुस्तान शब्द का बहुत बड़ी मात्रा में प्रयोग होता रहा है , जबकि भारत के संविधान में साफ-साफ लिखा है भारत या इंडिया का उल्लेख है , लेकिन फिर भी पूरा भारत सरकार हो या इंडियन आर्मी कंपनियां हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग करते आए हैं जबकि यह असंवैधानिक शब्द है ।

अब दलित शब्द की चर्चा करते हैं

दलित शब्द की बात करने से पहले दलित शब्द के बारे में थोड़ा जानते हैं, दलित शब्द का प्रयोग सबसे पहले महात्मा फुले जी ने किया तथा संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर ने दलित शब्द का अपने लेखों ,भाषणों, पुस्तकों में प्रयोग किया है, तथा इसके बाद बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी ने दलित शब्द का प्रयोग किया तथा उन्होंने दलित शोषित समाज संघर्ष समिति नाम के संगठन में दलित शब्द का प्रयोग किया है । दलित शब्द का प्रयोग अपमानजनक हरिजन शब्द के बजाय प्रयोग हुआ ।
दलित शब्द का अर्थ है “दबा हुआ जिसे अनैतिक रूप से दबाया गया है” लगभग 19वीं सदी से 21वी सदी अब तक दलित शब्द का प्रयोग होता रहा है , दलित शब्द का मतलब अनैतिक रूप से दवा होने के कारण इसका प्रयोग होता रहा है, और पहले लोग सर झुका कर दलित बोलते थे, लेकिन अब दलित शब्द एक क्रांतिकारी शब्द बनता जा रहा है, तथा दलित शब्द को अब वीरतापूर्वक और गर्व से आंख में आंख डालकर दलित बोलने लगे है कि हां मैं दलित हूं  खासकर 80 के दशक में हुए आंदोलनों के बाद दलित शब्द वीरतापूर्वक शब्द बनता रहा है, और हाल ही दिनों में भीम कोरेगांव में दलितों का एक होना तथा गुजरात में हुए दलित अत्याचार के कारण दलितों का गुजरात में बड़े पैमाने पर विरोध, तथा अभी 2 अप्रैल को ऐतिहासिक रूप से भारत बंद  किए जाने के कारण दलित शब्द एकता और वीरता का प्रतीक बन गया है, जिससे मनुवादी सरकार की जड़े हिलती हुई दिखाई दे रहे हैं , जिसके कारण सरकार दलित शब्द बंद कराए जाने की साजिश रच रही है, जब तक दलित शब्द का प्रयोग दबे कुचले हुए समझते रहे तब तक इनको कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन जब इसे एकता का प्रतीक और और गर्व से दलित बोलने लगे तथा उत्तरप्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री मायावती जी अपने आप को दलित की बेटी बोलती हैं तो इनको यह परेशानी होती है । दलित बहुजन समाज का महत्वपूर्ण अंग है इसे आसानी से अलग नहीं कर सकता है।


सरकार यदि दलित शब्द को संविधान का हवाला देकर अनुसूचित जाति का प्रयोग करने का बोल रही है , तो हिंदुस्तान शब्द का भी सरकार को बंद करके संविधान के अनुसार जो भारत तथा इंडिया शब्द का प्रयोग करना चाहिए ।
बहुत से लोग यह बोलते हैं कि संविधान में दलित शब्द का प्रयोग नहीं हुआ तो असंवैधानिक है, लेकिन असंवैधानिक का मतलब होता है कि जो संविधान के प्रावधानों के विपरीत हो उसे असंवैधानिक कहते हैं, आपको हम बता देना चाहते हैं कि दलित शब्द असंवैधानिक शब्द नहीं है,असंवैधानिक शब्द हिंदुस्तान हैं क्योंकि भारत का मतलब हिंदुस्तान नहीं है इसलिए हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग बंद होना चाहिए दलित शब्द का प्रयोग नहीं बंद करना चाहिए ।

  1. जो लोग हिन्दुस्तान शब्द का प्रयोग करते है वो महोम्मद अली जिन्ना की मानसिकता के अनूसार हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग करते है क्योंकि जिन्ना चाहता था कि भारत बंटवारे के बाद पाकिस्तान तथा हिंदुस्तान बनें 
Must Read:- आखिर कौन है डॉ.अम्बेडकर ?
आपकी इस मुद्दे पर क्या राय है आप हमें comment
box में अवश्य बतायें ।
जय भीम

Tuesday, 7 August 2018

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 2

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 2

Manusmriti Cast Systam Blog Post
मनुस्मृति तथा वर्ण व्यवस्था
सभी साथियों को जय भीम
जैसा की आप लोगों ने भारत जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 1 में जातिवाद क्यों है बताया दिया था तथा, जातिवाद खत्म करने के लिए संघर्ष बता दिया था अब Part 2 में जातिवाद होने का कारण तथा जातिवाद से शिकार जातिवाद से मुक्ति के बारे में बताएँगे आशा करता हूं ,आप सभी लोग इससे भी पसंद करेंगे …

जातिवाद होने का कारण:-

वैसे तो जातिवाद हजारों सालों से और इसका मुख्य कारण हिंदू धर्म ब्राह्मण धर्म व्यवस्था है जिसने इस देश के SC ST OBC समाज को टुकड़ों-टुकड़ों में बांट दिया गया ब्राह्मण धर्म के ग्रंथ उसमें रामायण, महाभारत, वेद स्मृति, मनुस्मृति, खासतौर पर मनुस्मृति में जातिवाद व्यवस्था (Racist system) है, जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शुद्र इन चार वर्ण में बांटा, चातुर्वर्ण्य व्यवस्था किस प्रकार इस देश के SC ST OBC को बांटा है यह हम आगे लिखने वाले Articles में बताएंगे ।
अगर जातिवाद को सही रूप से समझना है तो डॉक्टर बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा लिखित खासतौर पर तीन पुस्तकों का अध्ययन करना होगा जिसमें Who Was Shudra, Anhalation of Cast, Who is untouchable and how  का अध्ययन करना पड़ेगा

देश में जातिवादियों का शासन प्रशासन पर कब्जा:-

संविधान के अनुसार जातिवाद छुआछूत का अंत है लेकिन देश कि शासन-प्रशासन में धार्मिक कट्टरता रखने वाले लोगों का कब्जा जमा हुआ है अगर हम शासन सत्ता की बात करें तो देश के केंद्र तथा राज्यों में ऐसे ही धार्मिक कट्टरता जातिवादी,अमानवतावादी,हिंदुत्ववादियों की देश व प्रदेश में सरकार कायम है,तथा प्रशासन में सरकारी Private संस्थानों में इन्हीं अमनावतावादियों की भारी संख्या में कब्जा कायम है,  इन लोगों की Government,Private धन धरती Education,Bussiness,Transport आदि संसाधनों पर 96% इन्हीं धार्मिक कट्टरपंथी जातिवादी हिंदुत्ववादी मानसिकता रखने वाले लोगों के पास है, तथा हर Department, school colleges universities क्षेत्र में इन्हीं लोगों का कब्जा है और ऐसी सोच रखने वाले लोग हैं और यही लोग जाति व्यवस्था को कायम किए हुए हैं ।


21वी सदी में जाति व्यवस्था का शिकार :-

आज 21वी सदी में जातिवाद का शिकार हमारे SC ST OBC की बात करें तो हम जातिवाद के शिकार लोगों को दो भागों में बांटते हैं:-
  1. अनपढ़ गरीब SC ST OBC जातिवाद के शिकार.
  2. शिक्षित नौजवान कर्मचारी जातिवाद के शिकार.


A.अनपढ़ SC ST OBC जातिवाद के शिकार:-

आज 21वीं सदी में SC ,ST ,OBC के लोग जातिवाद के बड़ी तादाद में शिकार हैं गांव के अनपढ़ गरीब अशिक्षित खासकर SC ST के लोग छुआछूत का शिकार होना पड़ता है, आज भी गांव में अगर SC ST का व्यक्ति ब्राह्मण ,ठाकुर के घर से निकले तो सिर पर जूता रख कर निकलते हैं, तथा, गांव में ब्राह्मण बनिया ठाकुर के घर की खाट पर कुत्ता बिल्ली तो बैठ सकता है, लेकिन SC ST समाज का व्यक्ति उस खाट पर नहीं कर सकता है , गांव की अनपढ़ गरीब SC ST के लोगों को सार्वजनिक नल कुओं से पानी तक नहीं ले पाते हैं उनके साथ छुआछूत होती रहती है,आए दिन SC ST के गरीब, अनपढ़, लोगों पर अन्याय अत्याचार की घटनाएं सामने आती रहती हैं ।


B.शिक्षित नौजवान कर्मचारी जातिवाद के शिकार :-

आज जो फूले, शाहू, अंबेडकर आदि बहुजन महापुरुषों के संघर्ष के कारण जो थोड़ा बहुत पढ़ लिख गए हैं या जिन्हें नौकरी पेशा करने का तथा School Collages में Study कर करने का मौका मिल रहा है उनके साथ भी जातिवाद का शिकार होना पड़ता है , बहुजन समाज के खासकर SC ST के लोगों को  government,Private,School,collegesजातिवाद का सामना करना पड़ता है चूंकि यह लोग जातिवाद को समझते हैं इसलिए इनके साथ अलग प्रकार से भेदभाव किया जाता है, जो SC ST के कर्मचारी नौकरी पेशा करते हैं उनको परेशान किया जाता है जो SC ST कर्मचारी नौकरी करते हैं वह कहते हैं नौकरी मिलना तो आसान है लेकिन नौकरी करते रहना वह बहुत कठिन है , और जो SC ST के Student अपनी पढ़ाई कर रहे हैं उनके साथ भी जातिवादी मानसिकता के कारण परेशान किया जाता है उन्हें भी स्कूल-कॉलेज में परेशान किया जाता है ।


जातिवाद से मुक्ति:-

अब बात आती है कि सब जातिवाद (Casteism) से मुक्ति कैसे हो तो मेरा मानना है, कि जातिवाद से अगर मुक्त होना है और इसके शिकार होने से बचना है तो सबसे पहले डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलना होगा उन्होंने जो सत्ता के मंदिर पर कब्ज़ा (Capture) करने का संविधान में रास्ता दिया है ,उस रास्ते पर चलना होगा । और जो संविधान है,और संविधान और अभी जातिवादी Racist मानसिकता रखने वाले व्यक्तियों के हाथ में हैं उस संविधान को सत्ता के मंदिर पर कब्ज़ा करके उस संविधान को ब्राह्मणवादियों Brahmins के हाथ से छीनना होगा और अपने हाथ में लेना होगा तभी हम जातिवाद से मुक्ति पा सकते हैं और जातिवाद को जड़ से नष्ट कर सकते हैं ।

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Wednesday, 18 July 2018

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 1

भारत में जातिवाद ही सबसे बड़ा आतंकवाद Part 1

Cast in India
सबसे बड़ा आतंकवाद जातिवाद या ISIS
जय भीम

जातिवाद और ISIS में सबसे बड़ा संगठन कौन ?

वैसे अगर कोई मुझसे पूछे भारत में सबसे बड़ा आतंकवाद क्या है तो मैं जातिवाद को ही सबसे बड़ा आतंकवाद Casteism कहूंगा और अगर कोई मुझसे यह पूछे कि सबसे बड़ा देशद्रोही कौन है तो मैं सबसे बड़ा देशद्रोही उसे कहूंगा जो जातिवाद का समर्थन करता है तथा अगर कोई मुझसे पूछे कि जातिवाद Casteism और ISIS में से सबसे बड़ा आतंकी संगठन कौन है ,तो जातिवाद को ही सबसे बड़ा संगठन कहूंगा जातिवाद से बड़ा आतंकी संगठन दुनिया में आज तक पैदा नहीं हुआ है ISIS का मैं समर्थन नहीं कर रहा लेकिन जातिवाद आतंकी संगठन की बात करें तो ISIS जातिवाद के सामने बहुत छोटा संगठन है , ISIS संगठन मैं इंसान की सीधे गर्दन पर दी जाती है लेकिन जातिवाद आतंकी संगठन में जो जिस जाति Cast में पैदा होगा वह उसी जाति को लेकर मरना पड़ता है, जातिवाद के कारण इंसान को तिल, तिल के दिन प्रतिदिन मरना पड़ता है , ISIS का इतिहास History तो कुछ ही साल पुराना है लेकिन जातिवाद का इतिहास हजारों साल पुराना है जातिवाद के खिलाफ हजारों सालों से संघर्ष Straggle चला आ रहा है लेकिन आज भी देश में जातिवाद कायम है , ISIS संगठन  में कुछ सही लोग होंगे लेकिन जातिवाद संगठन में हजारों जातियां Castes हैं और उन जातियों की हजारों उपजातियां हैं जातिवाद में एक जाति दूसरी जाति के बीच ऊंच-नीच की व्यवस्था कायम है । इस जातिवाद में बहुजन समाज को 6743 तथा 49000 के करीब उपजातियों में बांट कर रख दिया और इनके बीच रोटी बेटी का संबंध हमेशा के लिए बंद कर दिया गया ।

जातिवाद आतंकवादी संगठन क्यो है ?

जातिवाद आतंकी संगठन क्यों है अब यह सवाल सामने आता है इसका कारण सदियों से ब्राह्मणवादी व्यवस्था Brahminical system का कायम होना है और यही ब्राह्मणवादी व्यवस्था इस देश में हजारों सालों से कायम है तथा इस देश के सदियों से 85% Bahujan Samaj को गुलाम बनाकर रखना इस आतंकी संगठन का सबसे बड़ा मकसद है, बहुजन समाज को सदियों से गुलाम बनाकर रखा गया तथा इन्हें शिक्षा, बेरोजगार, सामाजिक, अन्याय, अत्याचार, असमानता छुआछूत का सदियों (Centuries) से शिकार होना पड़ रहा है, तथा पशुओं को माता का दर्जा दिया जा रहा है लेकिन बहुजन समाज के लोगों को कभी इंसान नहीं समझा जा रहा है बल्कि इनकी जिंदगी बद से बदतर हो गई है ISIS आतंकवादी संगठन में इंसान को एक झटके में खत्म कर दिया जाता है लेकिन जातिवादी संगठन (Racist organization) में इंसान को मरने  तक नहीं छोड़ा जाता है जातिवाद में इंसान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी (Generation by Generation) गुलाम बनाकर रखा जाता है इसमें इंसान चाहकर भी जाति Cast से बाहर Out नहीं निकल सकता, इंसान भारत में जहां जहां जाएगा जाति उसके पीछे परछाई की तरह साथ रहेगी इंसान कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए लेकिन Cast उसका पीछा मरते दम तक नहीं छोड़ती है , जातिवाद Casteism हजारों सालों से चली आ रही हैं लेकिन यह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है जातिवाद का जहर Poison इंसान के नस नस में भरा हुआ है तथा यह भारत की हवाओं में घुला हुआ है ।

जातिवाद खत्म करने के लिए संघर्ष :-

जब से जातियां बनी है तब से इसके खिलाफ Bahujan Samaj के संतो गुरु महापुरुषों ने अपने अपने समय पर संघर्ष किया है जिसमें सबसे पहले महात्मा गौतम बुद्ध, संत कबीर, संत रविदास, संत चोखामल, महात्मा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, बिरसा मुंडा, पेरियार रामास्वामी नायकर ,नारायण गुरु, तथा डॉक्टर अंबेडकर आदि तमाम प्रकार के संत गुरु महापुरुषों ने संघर्ष किया ।
महात्मा बुद्ध ने सबसे पहले जातिवाद के खिलाफ संघर्ष Struggle जारी  किया तथा उन्होंने अपने धर्म के माध्यम से जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई महात्मा बुद्ध ने अपने धम्म में सभी जातियों को शरण दी तथा महिलाओं Ladies को शरण दी
Mahatma Buddha में कहा कि “ जिस तरह सारी नदियां एक होकर समुद्र में मिल जाती हैं उनका कोई पिछला अस्तित्व नहीं रहता उसी तरह सारी जातियां मेरे धम्म में आकर एक हो जाती हैं उनका कोई जाति Cast नहीं रहती है




इसके बाद सम्राट अशोक Emperor Ashok के शासन में जातिवाद को खत्म कर दिया गया था और बुद्ध धम्म स्थापित हो गया था और 50 साल तक सम्राट अशोक का शासन रहा लेकिन  मौर्य वंश के अंतिम शासक की बृहद्रथ की धोखे हत्या करके ब्राह्मण धर्म Brahman Religion फिर से स्थापित हो गया था ।
इसके बाद महात्मा फुले माता सावित्रीबाई फुले छत्रपति शाहूजी महाराज तथा डॉ बाबासाहेब अंबेडकर 19वीं 20 वीं सदी में आंदोलन चलाया तथा जब डॉक्टर बाबा अंबेडकर को संविधान Constitution लिखने का मौका मिला तो उन्होंने छुआ-छूत (Touched-fingered) जातिवाद  को संविधान Constitution में खत्म कर दिया ।
जातिवादी सबसे बड़ा आतंकवाद के Part 2 में जातिवाद होने का कारण बताये तथा इसका जातिवाद से मुक्ति के बारे में लिखेंगे ।
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Sunday, 8 July 2018

सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा

सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा

Government in hinduism
सरकारी संस्थाओं में ब्राह्मण धर्म का कब्जा
जय भीम
हमारे देश के संविधान में धर्मनिरपेक्षता की बात कही गई है,धर्मनिरपेक्षता का मतलब है किसी धर्म के पक्ष में नहीं ,26 जनवरी 1950 से 2018 तक के 68 सालो की बात करे तो सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा रहा है,जबकि जब देश का संविधान Constitution धर्म निरपेक्षता की बात कहता है,तथा जो लोग ये कहते है कि देश संविधान से चलता है,तो फिर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा क्यों है ,इस मुद्दे पर हमें सोचने पर मजबूर करता है ,और दिमाग मे Question आता है कि :-
  • Question:- क्या भारत मे केवल हिंदुओं की आबादी है ?
  • Answer:- नहीं
  • Question:- अगर भारत मे केवल हिंदुओं की आबादी नहीं है तो फिर पूरा देश क्या हिन्दू धर्म का पक्षधर है ?
  • Answer:- नहीं

अगर भारत मे केवल हिन्दू आबादी नहीं है ,और न ही हिन्दू धर्म को पूरा देश मानता नहीं है ,फिर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म का कब्जा क्यों है इस बात को हमें सोचने समझने  की आवश्यकता (requirement)है ।
Rajasthan high Cort
राजस्थान हाईकोर्ट के सामने मनु की मूर्ति

हिन्दू धर्म का कब्जा कहाँ कहाँ :-

आज देश के हर सरकारी संस्थानों में हिन्दू धर्म के देवी देवताओं की Image या मूर्ति कहीं न कहीं आपको देखने को मिली होगी और शायद आपके मन मे ये Question भी आया होगा कि सरकारी विभाग ,संस्थानों में केवल देवी देवताओं की image या मूर्ति क्यो होती है, तथा अन्य धर्म  मुस्लिम , ईसाई ,जैन सिक्ख धर्म की क्यों नहीं होती है , यह सवाल आपके मन में जरूर आया होगा, आपने हमेशा देखा होगा कि सरकारी, स्कूल कॉलेज सरकारी विभाग, Hospital, पुलिस स्टेशन आदि के पास हिंदू धर्म का मंदिर अवश्य होगा या इन विभागों में देवी देवताओं की मूर्ति या फोटो आपको जरूर देखने मिलेगी और इसका सबसे बड़ा exmaple राजस्थान हाईकोर्ट के बाहर मनु की मूर्ति स्थापित है ।

Government school or colleges में हिन्दू धर्म :-

जब भी हम Government school or colleges में  study  करने जाते हैं तो वहां  देवी देवताओं की मूर्ति या images जरूर देखते है , स्कूल कॉलेज में कोई Program शुरू होने से पहले देवी देवताओं की पूजा अर्चना जरूर होती है, और फिर कार्यक्रम Start होता है जबकि स्कूल कॉलेज में अकेले हिंदू धर्म की Teachers और Students नहीं होते वहां तो सभी धर्म के मानने वाले लोग होते हैं फिर भी वहां Specially  हिंदू धर्म को महत्व दिया जाता है ।
यहां तक की बात करें तो सरकारी स्कूल में पहली से दसवीं तक के Syllabus में Special हिंदू धर्म को महत्व दिया गया है तथा हिंदू धर्म से संबंधित परीक्षा में Question आते है ।

सरकारी विभागों में हिंदू धर्म का कब्जा :-

सरकारी विभागों की अगर हम बात करें तो Government Department जैसे पुलिस स्टेशन, कलेक्ट्रेट, रेलवे स्टेशन, तहसील ,सरकारी बैंक तथा तमाम प्रकार के सरकारी विभागों के Office में खासतौर से देवी देवताओं की फोटो या मूर्ति वहां स्थापित रहती है, इसके अलावा आप लोगों ने देखा होगा कि सरकारी विभागों के Office के बाहर या आस-पास हिंदुओं के मंदिर ज्यादातर रहते हैं, तथा खासकर जेलों के अंदर हिन्दू धर्म के मंदिर बनें होते और वहाँ daily पूजा अर्चना होती है ,जबकि सभी सरकारी विभागों में सभी धर्मों के मानने वाले वहां काम करते है तथा सभी धर्म के लोग अपने काम से आते जाते लेकिन देखने को Only हिंदू धर्म का जबरदस्ती कब्जा जमा रहता है जबकि यह संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ है लेकिन सरकारी विभाग और Office में बिना किसी दबाव के उन्होंने यहां मंदिर तथा देवी देवताओं की मूर्ति स्थापित कर रखी हैं ।

आखिर ऐसा क्यों है ?

प्रश्न सामने आता है कि आखिर क्यों हिंदू धर्म को जबरदस्ती हिंदुत्ववादी लोग थोपना चाह रही हैं इसका कारण यह समझ सकते हैं कि यह ब्राह्मणवादी RSS तथा हिंदुत्ववादी संगठनों की ऐसी साजिश रची जा रही है कि हर Goverment, Private Department में हिंदू देवी देवताओं की फोटो तथा मंदिर स्थापित हो ताकि जैसे मैंने पिछले Article में बताया था इनका मुख्य उद्देश्य (Main Purpose) भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है ।
अभी RSS द्वारा संचालित हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी BJP के पास संविधान बदलने के लिए और हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लोकसभा में पूर्ण बहुमत है, लेकिन अभी राज्यसभा में पूर्ण बहुमत नहीं है , लेकिन जब राज्यसभा में पूर्ण बहुमत साबित हो जाएगा तथा ब्राह्मणवादी सत्ताधारी नेताओं द्वारा हिंदू राष्ट्र घोषित कर देंगे , तब इनसे सवाल पूछेंगे कि हिंदू राष्ट्र क्यों बनाया है तब BJP RSS के नेता इस सवाल के जवाब में यह बोलेंगे कि सालों से देश के सभी Government, Offices में देवी देवताओं की मूर्ति है तथा मंदिर स्थापित है तब किसी ने विरोध नहीं किया इसका मतलब है देश की Public हिंदू राष्ट्र बनाने के पक्ष में है ,तब हम कुछ भी नहीं कर पाएंगे ।

हिंदू राष्ट्र में इस देश के 85% बहुजन समाज का क्या हाल होगा यह आप लोग मेरी पिछले Article 70 साल की आज़ादी और हमारा संविधान में अच्छी तरीके से पढ़ चुके हैं ।
आप सभी Reads पड़कर कुछ लोग अगर यह सोच रहे होंगे कि यह आम बात है तो मैं बता देना चाहता हूं यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है हमें सोच समझकर इससे बाहर निकलना होगा ।

आपको यह Article कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं तथा आपके सुझाव हमें अवश्य बताएं
जय भीम जय भारत